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मानसून आने से पहले ही पहाड़ों में आपदा का दौर शुरू 

कश्मीर की आपदा से लेकर मध्य प्रदेश में बढ़ते एचआईवी तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

‘गॉडज़िला अल नीनो’ के कारण सूखे-बाढ़ की आशंका, महाराष्ट्र में किसानों की कर्जमाफी, झाबुआ में पानी भरने गई बच्ची डूबी, मप्र में बच्चों में बढ़ता एचआईवी। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ। 


मुख्य सुर्खियां

विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि ‘गॉडज़िला अल नीनो’ के कारण भारत को अगले तीन महीनों तक सूखे और बाढ़ जैसे चरम मौसम का सामना करना पड़ सकता है। वहीं केरल में मानसून के जल्द पहुंचने की उम्मीद है, जो वर्तमान में अपनी सामान्य तिथि से 11 दिन की देरी से चल रहा है।


माउंट एवरेस्ट पर 8,000 मीटर से ऊपर के ‘डेथ जोन’ में अत्यधिक भीड़ और कुप्रबंधन के कारण पिछले 3 सालों में 36 पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है। विशेषज्ञों ने सुरक्षा नियमों को कड़ा करने की सलाह दी है।


महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार ने चुनाव से पहले किसानों के लिए 2 लाख रुपये तक की कर्ज माफी योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना से राज्य के करीब 56 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।


मानसून में देरी और बांधों में पानी के घटते स्तर के कारण पुणे में पानी की भारी किल्लत का खतरा मंडरा रहा है। चुनाव आचार संहिता के कारण जल वितरण की योजना बनाने में भी देरी हुई है।


झाबुआ के गोपालपुरा गांव में नल-जल योजना ठप होने के कारण कुएं से पानी भरने गई 12 साल की बच्ची की डूबने से मौत हो गई। यह घटना सरकारी दावों के विपरीत ग्रामीण इलाकों में पानी की भारी किल्लत को उजागर करती है।


मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भोपाल और इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों के लिए सरफेस वाटर मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं । अब सरकार का मुख्य फोकस केवल भूजल पर न होकर नदियों, तालाबों के संरक्षण और सीवेज प्रबंधन पर रहेगा।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए कश्मीर में प्राकृतिक आपदाओं का अपडेट। साथ ही हमारे असिस्टेंट एडिटर चंद्र प्रताप तिवारी बता रहे हैं मध्य प्रदेश में बच्चों में बढ़ते एचआईवी के बारे में। 

जम्मू-कश्मीर में प्राकृतिक आपदाएं

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों, विशेष रूप से किश्तवाड़, डोडा और पुंछ जिलों में तेज बारिश, आंधी और अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) ने सामान्य जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

क्षेत्रीय प्रभाव और बुनियादी ढांचे को नुकसान: 

किश्तवाड़ और डोडा में सबसे अधिक असर देखा गया है, जहां सड़कों पर मलबा और बड़े पत्थर आने के कारण नेशनल हाईवे 244 के कई हिस्से बंद हो गए हैं। कई वाहन मलबे में दब गए हैं और लोगों को पैदल यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। डोडा में आवासीय क्षेत्रों और बाजारों में पानी और कीचड़ घुस गया है।

IMD का स्पष्टीकरण

स्थानीय लोगों ने इसे ‘बादल फटना’ (Cloudburst) बताया, लेकिन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्पष्ट किया कि यह एक ‘इंटेंस थंडरस्टॉर्म एक्टिविटी’ थी, जिसमें कम समय में बहुत अधिक बारिश हुई।

जनहानि की दुखद घटनाएं 

डोडा के कश्तीगढ़ इलाके में बिजली गिरने से पिंकी देवी नामक महिला की मृत्यु हो गई। वहीं, अनंतनाग में पेड़ गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई और उसकी पत्नी घायल हो गई। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इन घटनाओं पर दुख व्यक्त किया है और प्रभावितों को सहायता देने के निर्देश दिए हैं।

बचाव कार्य और आगामी चेतावनी 

प्रशासन, NDRF, पुलिस और जिला आपदा प्रबंधन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और सड़कों को खोलने का काम जारी है। स्थानीय स्वयंसेवकों ने एक मदरसे के पास भूस्खलन के दौरान बच्चों को सुरक्षित निकालने में मदद की।

भविष्य के लिए सतर्कता

IMD ने 3 जून से 6 जून तक के लिए अलर्ट जारी किया है, जिसमें 40-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने, ओले गिरने और बारिश की संभावना जताई गई है। लोगों को नालों, पेड़ों और जल निकायों से दूर रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं, इसलिए ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ को मजबूत करना आवश्यक है।


मप्र में बच्चों में बढ़ता एचआईवी संक्रमण

मध्यप्रदेश में एचआईवी संक्रमित गर्भवती महिलाओं और उनसे जन्म लेने वाले संक्रमित बच्चों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020-21 में राज्य में 514 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवती महिलाएं थीं, जो 2025-26 में बढ़कर 743 हो गई हैं। पिछले पांच वर्षों में एचआईवी संक्रमित माताओं से 201 नवजात बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पैदा हुए हैं।

आंकड़ों में चिंताजनक वृद्धि 

आंकड़े बताते हैं कि 2020-21 में 21 संक्रमित बच्चे जन्मे थे, 2021-22 में 26, 2022-23 में 42, 2023-24 में 48, 2024-25 में 25 और 2025-26 में अब तक 39 बच्चे संक्रमित पाए गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गर्भावस्था के दौरान समय पर एचआईवी जांच और इलाज हो जाए तो बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है।

रिपोर्ट में दो उदाहरण भी सामने आए हैं। एक महिला की पहली डिलीवरी के समय एचआईवी जांच नहीं हुई। दूसरी गर्भावस्था में जांच में वह एचआईवी पॉजिटिव मिली और उसके दोनों बच्चे भी संक्रमित पाए गए। दूसरे मामले में महिला को समय पर दवा नहीं मिली, जिससे उसका बच्चा एचआईवी पॉजिटिव हो गया।

रोकथाम के उपाय 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर गर्भवती महिला की एचआईवी जांच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश भी यही कहते हैं। समय पर जांच, एंटीरेट्रोवायरल (एआरटी) दवाओं का नियमित सेवन और चिकित्सकीय निगरानी से मां से बच्चे में संक्रमण का खतरा काफी हद तक रोका जा सकता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ गर्भावस्था के शुरुआती चरण में ही जांच कराने पर जोर दे रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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