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जानिए मध्य प्रदेश के कोयले से गैस बनाने के फैसले के बारे में 

कश्मीर के सेब बागानों के हाल से लेकर मप्र के कोयला गैसीकरण के प्रयासों तक, आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट में

हेल्थ सर्वे से की इंडिकेटर गायब, कश्मीर में ओलावृष्टि से सेब बागानों को नुकसान, सीवेज टैंक की सफाई के दौरान 3 मजदूरों की मौत, मध्य प्रदेश में फिर होगी सरकारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की शुरुआत। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ। 


मुख्य सुर्खियां

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) की नई फैक्टशीट से लिंग अनुपात और कैंसर स्क्रीनिंग जैसे कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों को हटा दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह अन्य सर्वेक्षणों के साथ ‘डेटा सामंजस्य’ (data harmonisation) के लिए किया गया है।


कश्मीर में लगातार हो रही ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने सेब बागानों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। बारामूला, सोपोर, बांदीपोरा, गांदरबल और रफियाबाद समेत कई इलाकों में फसलें प्रभावित हुई हैं। उत्पादकों ने सरकार से 2026 को आपदा वर्ष घोषित करने, मुआवजा देने और राहत पैकेज जारी करने की मांग की है।


पंजाब के लुधियाना में एक औजार निर्माण फैक्ट्री में सीवेज टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस के संपर्क में आने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में एक पिता-पुत्र भी शामिल हैं, जबकि दो अन्य मजदूर अस्पताल में भर्ती हैं। 


हरियाणा के हांसी क्षेत्र में पेयजल संकट से परेशान ग्रामीणों ने पानी की पाइपलाइन की मांग को लेकर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से पानी की समस्या बनी हुई है और कई वादों के बावजूद समाधान नहीं हुआ। 


मध्यप्रदेश सरकार 1 अगस्त से ‘मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा’ शुरू करने जा रही है। इसके पहले चरण में 620 मार्गों पर 2432 बसें चलाई जाएंगी, जो संभागों और जिलों को आपस में जोड़ेंगी।


भोपाल सहित प्रदेश में जून के शुरुआती दो हफ्तों में भीषण गर्मी और उमस रहने का अनुमान है। हालांकि, महीने के आखिरी 3-4 दिनों में मानसून की दस्तक के साथ अच्छी बारिश होने की संभावना है।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे असोसिएट एडिटर वाहिद भट से जानिए मध्य प्रदेश के कोयला से गैस बनाने की योजना के बारे में। साथ ही हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी बता रहे हैं मध्य प्रदेश में कुपोषण से निपटने के लिए कौन-से प्रशासनिक बदलाव हुए?  

मध्य प्रदेश में कोयला गैसीकरण

मध्य प्रदेश सरकार राज्य की ऊर्जा और औद्योगिक स्थिति को बदलने के लिए कोयला गैसीकरण (Coal Gasification) पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस तकनीक में कोयले को सीधे जलाने के बजाय उसे गैस (सिंथेसिस गैस या सिनगैस) में बदला जाता है, जिसमें मुख्य रूप से हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड शामिल होते हैं। इस गैस का उपयोग बिजली संयंत्रों, उर्वरक कारखानों, रसायन उद्योगों और अन्य औद्योगिक कार्यों के लिए किया जा सकता है।

राज्य के विशाल कोयला भंडार मध्य प्रदेश में कोयले का विशाल भंडार है, जो सात जिलों में लगभग 14.6 अरब टन फैला हुआ है।

सिंगरौली: यहां सबसे बड़ा भंडार है, जो लगभग 9.1 अरब टन से अधिक है।

शहडोल: यहां लगभग 4 अरब टन से अधिक का भंडार मौजूद है।

इसके अलावा उमरिया और छिंदवाड़ा जैसे क्षेत्रों में भी पर्याप्त भंडार उपलब्ध हैं।

आर्थिक लाभ और राष्ट्रीय मिशन 

केंद्र सरकार के नेशनल कोल गैसीकरण मिशन के तहत 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले को गैस में बदलने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पहले 8,500 करोड़ रुपये और अब निवेश आकर्षित करने के लिए इसे बढ़ाकर 75,000 करोड़ रुपये का पैकेज तैयार किया गया है। इससे एलएनजी और मेथनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर भारत की निर्भरता कम होगी और स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।

नीति निर्माण और पर्यावरणीय चिंताएं 

मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों की नीतियों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश के लिए एक व्यापक नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसकी जिम्मेदारी औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को दी गई है। हालाँकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई औद्योगिक नीति में प्रदूषण नियंत्रण, कार्बन उत्सर्जन और टिकाऊ तकनीक पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है ताकि पर्यावरण पर इसके प्रभाव को कम किया जा सके।


मध्य प्रदेश में कुपोषण: चुनौतियां और समाधान

मध्यप्रदेश भले ही अब बीमारू राज्यों की श्रेणी से बाहर निकल चुका है, लेकिन कुपोषण की समस्या अभी भी राज्य के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मुद्दे पर हुई समीक्षा बैठक में कहा कि बच्चों और महिलाओं में कुपोषण खत्म करने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग को आपसी समन्वय बढ़ाने और संयुक्त रूप से अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

बैठक में बताया गया कि राज्य में कुपोषण की स्थिति अभी भी चिंताजनक है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के 39.7 प्रतिशत बच्चे कम वजन के हैं। वहीं 23.8 प्रतिशत बच्चे दुबलेपन यानी वेस्टिंग की समस्या से प्रभावित हैं और 35.7 प्रतिशत बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुसार कम है, जिसे स्टंटिंग कहा जाता है। इसके अलावा 6 से 23 महीने की उम्र के केवल 12 प्रतिशत बच्चों को ही पर्याप्त और संतुलित पूरक आहार मिल पा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषण को खत्म करने के लिए केवल एक विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए पोषण आहार वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा, कुपोषित बच्चों की पहचान और नियमित निगरानी की जाएगी तथा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि आर्थिक और सामाजिक विकास के बावजूद कुपोषण का दाग मिटाना जरूरी है, इसलिए आने वाले समय में इस दिशा में विशेष अभियान चलाया जाएगा।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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