2024 में 10,546 किसानों ने आत्महत्या की, हसदेव में 5 लाख पेड़ कटेंगे, और हंता वायरस का खतरा बढ़ा — पढ़ें आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
1. हंता वायरस का खतरा — 8 मामले, 3 मौतें
चूहों और गिलहरियों जैसे रोडेंट्स से फैलने वाला हंता वायरस अब एक लग्ज़री क्रूज़ शिप के ज़रिए कई देशों तक पहुंच चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार यह जहाज 1 अप्रैल को अर्जेंटिना से रवाना हुआ था, जिसमें 28 देशों के 150 यात्री सवार थे।
अब तक 8 मामले सामने आए हैं और 3 मरीज़ों की मौत हो चुकी है। चिंता की बात यह है कि कई यात्री संक्रमण की पुष्टि होने से पहले ही जहाज से उतर चुके थे। इसी को देखते हुए 12 देशों को अलर्ट किया गया है।
यह हंता वायरस का एंडीज़ वैरियंट है, जो एक इंसान से दूसरे इंसान में भी फैल सकता है — जो इसे और भी खतरनाक बनाता है।
2. हसदेव जंगल फिर खतरे में — 5 लाख पेड़ कटेंगे
छत्तीसगढ़ का हसदेव अरण्य देश के सबसे घने और जैव विविधता से भरे जंगलों में से एक है। यह जंगल लगभग 2 लाख हेक्टेयर में फैला है और यहां कई दुर्लभ वन्यजीव रहते हैं।
लेकिन अब केंते एक्सटेंशन कोल माइन के लिए 1,742 हेक्टेयर जंगल को काटने की योजना है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) ने इसके लिए फॉरेस्ट डायवर्सन की अनुमति मांगी है। इस परियोजना में करीब 5 लाख पेड़ काटे जाएंगे।
पहले से ही कोयला खनन के लिए इस जंगल का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो चुका है। स्थानीय आदिवासी समुदाय और पर्यावरणविद लंबे समय से इसका विरोध कर रहे हैं।
3. अरुणाचल में दुर्लभ पक्षी के घर पर बांध का खतरा
अरुणाचल प्रदेश में 1,200 मेगावॉट के कलाई फेज़ 2 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए 869 हेक्टेयर सेमी एवरग्रीन फॉरेस्ट को हटाने की अनुमति पर्यावरण मंत्रालय से मांगी गई है।
यह जंगल व्हाइट बेलीड हेरॉन का घर है — यह पक्षी गंभीर रूप से विलुप्तप्राय (Critically Endangered) श्रेणी में आता है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत इसे शेड्यूल वन में सर्वोच्च संरक्षण मिला हुआ है।
लेकिन जब स्थानीय वन विभाग (DAFO) ने साइट इंस्पेक्शन रिपोर्ट तैयार की, तो उसमें व्हाइट बेलीड हेरॉन का कोई ज़िक्र ही नहीं था। यह गंभीर चूक — या जानबूझकर की गई अनदेखी — कानून का सीधा उल्लंघन है।
4. दिल्ली में पेट्रोल टू-व्हीलर बैन की तैयारी
दिल्ली सरकार की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी के तहत राजधानी में पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों पर बैन लगाने पर विचार हो रहा है। सरकार चाहती है कि दिल्ली की सड़कों पर केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही चलें।
हालांकि टू-व्हीलर निर्माता कंपनियों ने इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी और भारत अभी बैटरी के लिए चीन पर निर्भर है — इसलिए यह निर्णय बाज़ार को बाधित कर सकता है।
आज का मुख्य विषय: किसान आत्महत्या — एनसीआरबी 2024 के आंकड़े

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने 2024 की आकस्मिक मौतें और आत्महत्याएं रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक देश में पिछले साल कृषि क्षेत्र से जुड़े 10,546 लोगों ने आत्महत्या की।
यह देश में हुई कुल 1,70,746 आत्महत्याओं का 6.2 प्रतिशत है। सीधे शब्दों में कहें तो हर दिन औसतन 28 किसान और खेत मज़दूर अपनी जान दे रहे हैं।
खेत मज़दूर सबसे ज़्यादा प्रभावित
इन 10,546 मामलों में 5,913 यानी 56% मामले कृषि मज़दूरों के थे — यह पिछले पाँच वर्षों में सबसे ऊंचा आंकड़ा है।
2021 से खेत मज़दूरों की आत्महत्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि आज एक सामान्य किसान परिवार की आमदनी सिर्फ फसल बेचने से नहीं, बल्कि खेतों में मज़दूरी करने पर निर्भर होती जा रही है।
मध्य प्रदेश की तस्वीर
मध्य प्रदेश में 2024 में:
82 किसानों ने आत्महत्या की जो खुद की ज़मीन पर खेती करते थे
28 किसान लीज़ पर ज़मीन लेकर खेती करते थे
725 खेतिहर मज़दूरों ने आत्महत्या की
यानी यहां भी खेत मज़दूरों का आंकड़ा बाकी सबसे कहीं ज़्यादा है।
समस्या की जड़ क्या है?
सरकारें कॉटन मिशन और दलहन मिशन जैसी योजनाओं पर करोड़ों खर्च करती हैं — लेकिन खेत मज़दूरों के लिए कोई खास नीति नहीं है।
ये मज़दूर समाज के सबसे हाशिये पर रहने वाले लोग हैं। इनके पास न ज़मीन है, न MSP का फायदा, न किसी योजना की सुरक्षा। इनकी मानसिक सेहत और सामाजिक सुरक्षा को लेकर सरकारी तंत्र में अब तक कोई गंभीर पहल नहीं दिखती।
जब भी सरकार कृषि नीति बनाए, तो उसे केवल “ज़्यादा अनाज उगाने” तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उस अनाज को उगाने और काटने वाले मज़दूर की ज़िंदगी भी उतनी ही ज़रूरी है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।







