क्या आप जानते हैं कि भारत जो दाल खाता है, उसका 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा विदेश से मंगाया जाता है? यानी हमारी थाली में परोसी जाने वाली दाल का बड़ा हिस्सा विदेशी है। इस स्थिति को बदलने के लिए मध्यप्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को “दलहन आत्मनिर्भरता मिशन” को मंजूरी देते हुए अगले पाँच वर्षों में ₹2,442 करोड़ खर्च करने का फैसला किया है। यह योजना देश को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरु की गई है।
दाल भारतीय खाने की थाली का अभिन्न हिस्सा है और प्रोटीन का सबसे सस्ता और सुलभ स्रोत है। लेकिन देश में मांग के मुकाबले उत्पादन कम होने की वजह से हर साल अरबों रुपए की दाल विदेश से आयात करनी पड़ती है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा खर्च होती है, बल्कि दाल की कीमतें भी अनियंत्रित हो जाती हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
मध्यप्रदेश देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों में पहले से शामिल है। ऐसे में अगर यह राज्य इस मिशन की अगुवाई करे, तो पूरे देश की तस्वीर बदल सकती है।
इस मिशन के तहत पाँच साल में कई अहम काम किए जाएंगे। बीजों की गुणवत्ता सुधारी जाएगी और उन्हें प्रमाणित किया जाएगा ताकि किसानों को सबसे अच्छे बीज मिलें। दाल की ग्रेडिंग और लेबलिंग होगी जिससे बाजार में उचित मूल्य मिले। उत्पादन और प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी ताकि किसान सीधे बाजार से जुड़ सकें। किसानों को आधुनिक खेती के तरीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी और विशेष प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जाएंगी।
किसानों को क्या फायदा होगा?

राज्य के एमएसएमई मंत्री चेतन्य कुमार कश्यप ने बताया कि यह मिशन किसानों के जीवन में सीधा बदलाव लाएगा। बेहतर बीज और तकनीक से उत्पादन बढ़ेगा, जिससे आमदनी में इजाफा होगा। इसके साथ ही दलहन से जुड़े कृषि उद्योगों का विस्तार होगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। किसानों को सरकारी सहायता और प्रोत्साहन भी मिलेगा, जिससे उनकी खेती की लागत कम होगी और मुनाफा बढ़ेगा।
भारत में स्वतंत्र पर्यावरण पत्रकारिता को जारी रखने के लिए ग्राउंड रिपोर्ट को आर्थिक सहयोग करें।
यह भी पढ़ें
मध्य प्रदेश ने दाल उत्पादन का एक चौथाई हिस्सा खोया
क्या इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग नहीं खरीदेगी मध्य प्रदेश सरकार?
पर्यावरण से जुड़ी खबरों के लिए आप ग्राउंड रिपोर्ट को फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सएप पर फॉलो कर सकते हैं। अगर आप हमारा साप्ताहिक न्यूज़लेटर अपने ईमेल पर पाना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें।
Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India
We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.
Connect With Us
Send your feedback at greport2018@gmail.com
Newsletter
Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.
When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.
Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.




