रायपुर। छत्तीसगढ़ के खुले मैदानों में एक बार फिर कृष्णमृग यानी काला हिरण दिखने लगा है। यह वही जानवर है जिसे साल 2017 में इस राज्य से पूरी तरह खत्म हो चुका मान लिया गया था। लेकिन पाँच साल की लगातार मेहनत के बाद यह खूबसूरत हिरण एक बार फिर यहाँ की धरती पर दौड़ रहा है।
इस काम की शुरुआत बरनावापारा वन्यजीव अभयारण्य से हुई। जब पता चला कि काला हिरण यहाँ से पूरी तरह गायब हो गया है, तो वन विभाग ने उसे वापस लाने की योजना बनाई। दिल्ली के चिड़ियाघर और बिलासपुर के कानन पेंडारी से कुछ कृष्णमृग यहाँ लाए गए। उनकी देखभाल की गई, उनके रहने के लिए घास के मैदान तैयार किए गए और डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखती रही। आज वहाँ हिरणों की एक पूरी आबादी पल-बढ़ रही है।
इसी तरह की एक अच्छी खबर इंसान और हाथी के रिश्ते को लेकर भी है। पहले हाथी खेतों में घुस आते थे, फसल बर्बाद होती थी और कभी-कभी लोगों की जान भी जाती थी। लेकिन अब गाँव के लोगों ने खुद “हाथी मित्र दल” बनाए हैं। ये लोग ड्रोन और व्हाट्सऐप के जरिए हाथियों की चाल पर नजर रखते हैं और गाँव वालों को पहले से सतर्क कर देते हैं। इससे झगड़े काफी कम हो गए हैं और लोगों का जंगली जानवरों के प्रति नजरिया भी बदला है।
कृष्णमृग की वापसी और हाथी मित्र दल की कोशिशें यही बताती हैं कि अगर सरकार और आम लोग मिलकर काम करें, तो खत्म होते जानवरों को भी बचाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ आज पूरे देश के लिए एक मिसाल बन रहा है।
(IANS इनपुट के साथ)
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