यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-168 है। बुधवार, 18 मार्च को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए सरकार द्वारा प्रस्तावित नए ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन अमेंडमेंट बिल का क्यों हो रहा है विरोध?
मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट ने दत्तक माताओं के लिए मातृत्व अवकाश पर लगी उम्र सीमा को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया है। पहले नियम के अनुसार केवल 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर ही 12 हफ्ते की छुट्टी मिलती थी, जिससे कई दत्तक माताएं वंचित रह जाती थीं।
एलपीजी और अन्य ईधनों के खपत के मार्च के पहले पखवाड़े के आंकड़ों के अनुसार देश में एलपीजी की खपत 17.7% तक घटी है। हालांकि पेट्रोल की बिक्री 13.2 और डीज़ल की 8.2% तक बढ़ी है।
सोनम वांगचुक ने लद्दाख की मांगों पर ‘गिव एंड टेक’ यानि आपसी समझौते का रास्ता अपनाने की बात कही। उन्होंने सरकार के साथ संवाद और भरोसा बढ़ाने पर जोर दिया, हालांकि मूल मांगें अभी भी कायम हैं।
संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए सरकार ने बताया कि 2030 तक भारत में लगभग 600 किलो टन सोलर कचरा उत्पन्न हो सकता है। हालांकि सरकार ने कहा कि वह इससे निपटने के उपायों के बारे में सोच रही है।
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने गेहूं की खरीद पर 40 रु प्रतिक्विंटल बोनस को मंज़ूरी दे दी है। सरकार ने इस साल 78 लाख मीट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य रखा है जबकि 365 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है।
प्रदेश में अब तक 1 लाख 8 हज़ार 842 लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगाईं जा चुकी है। यह लक्ष्य से 13.54% अधिक है जो देश में सबसे ज्यादा है।
विस्तृत चर्चा
ट्रांसजेंडर की पहचान पर आधारित बिल का विरोध
संसद में बीते हफ्ते ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया गया। इसे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री ने 13 मार्च को पेश किया था। ऐसा माना जा रहा है कि इससे 2019 के ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट्स) एक्ट में बड़े बदलाव हो सकते हैं। मगर अब इसका विरोध हो रहा है।
प्रस्तावित बिल की मुख्य बातें और विवाद:
स्व-पहचान के अधिकार को हटाना: इस संशोधन विधेयक का सबसे विवादित हिस्सा ‘राइट टू जेंडर सेल्फ आइडेंटिफिकेशन’ (लिंग की स्व-पहचान का अधिकार) को हटाना है। 2014 के ‘नालसा बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिकार को मान्यता दी थी।
मेडिकल बोर्ड का गठन: 2019 के अधिनियम में पहचान पत्र की प्रक्रिया प्रशासनिक थी, लेकिन नए बिल में एक मेडिकल बोर्ड बनाने का प्रावधान है। अब ट्रांसजेंडर प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को चिकित्सा परीक्षण (Medical Examination) से गुजरना होगा और बोर्ड की सिफारिश के बाद ही डीएम (DM) प्रमाण पत्र जारी करेंगे।
सरकार का तर्क: सरकार का मानना है कि 2019 की परिभाषा अस्पष्ट थी, जिससे ‘असली पीड़ितों’ की पहचान करना मुश्किल हो रहा था। सरकार का तर्क है कि लोग गलत तरीके से प्रमाण पत्र लेकर योजनाओं का लाभ उठाते हैं, इसलिए अब पात्रता के लिए जैविक विशेषताओं (Biological Variations) को पैमाना माना जा रहा है।
भेदभाव के खिलाफ दंड: विधेयक में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ भेदभाव, उन्हें बंधुआ मजदूरी में धकेलने या नुकसान पहुँचाने पर 6 महीने से लेकर 2 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।
देश भर के ट्रांसजेंडर और एलजीबीटीक्यू+ (LGBTQ+) समुदाय इस बिल की आलोचना कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह 2014 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले और मानवीय गरिमा के खिलाफ है, क्योंकि यह स्व-पहचान के बजाय चिकित्सा जांच को अनिवार्य बनाता है।
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