मानसून में 10% कमी और गर्मी की भविष्यवाणी, निकोबार की कोरल कॉलोनियों का होगा स्थानांतरण, हर दिन 200 लीटर डीजल ही खरीद सकेंगे ग्राहक, श्योपुर में आंधी-बारिश के बीच 3 लोगों की मौत। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
मौसम विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ की स्थिति बन गई है, जो मानसून के दौरान और तेज हो सकती है। उत्तर-पूर्वी और सुदूर दक्षिणी भारत को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के दौरान कम वर्षा होने की उम्मीद है जिससे मानसून के महीनों में तापमान में भी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) ने निकोबार द्वीप समूह की कोरल कॉलोनियों को स्थानांतरित करने के लिए चार स्थानों की पहचान की है। यह कॉलोनियां प्रस्तावित बंदरगाह परियोजना के कारण प्रभावित होने वाली हैं ऐसे में इसके पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
सरकार ने डीजल की खुदरा बिक्री को 200 लीटर प्रतिदिन प्रति ग्राहक तक सीमित करने वाला 90 दिनों का नियम लागू किया है। लेकिन इससे किसानों के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। वो अब सामान्य कैन में डीजल नहीं भरवा सकेंगे। इसके लिए उन्हें पेसो-अप्रूव्ड कैन खरीदना पड़ेगा।
मई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई। खाद्य और ईंधन कीमतों में तेज वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे। विशेष रूप से टमाटर और अदरक जैसी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
भोपाल के एम्स अस्पताल में 3 वर्षीय मासूम बच्चे को आईवी फ्लश की जगह गलती से शव सुरक्षित रखने वाला रसायन (फॉर्मेलिन) इंजेक्ट कर दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस मामले में दो नर्सिंग ऑफिसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
देश में मानसून तेजी से बढ़ रहा है और 15-17 जून के बीच इसके मध्य प्रदेश पहुंचने की उम्मीद है। इसी बीच, श्योपुर में तेज आंधी और बारिश के कारण दीवार गिरने से एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत हो गई।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी से जानिए मानसून की कमी की आशंका के बीच देश के प्रमुख जलाशयों का क्या है हाल?
देश में गहराता जल संकट
देश में जल संकट लगातार गहराता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) की निगरानी में आने वाले 166 प्रमुख जलाशयों में अब केवल 28 प्रतिशत पानी ही बचा है। इन जलाशयों की कुल भंडारण क्षमता 183.56 अरब घन मीटर (BCM) है, लेकिन इनमें उपलब्ध जल तेजी से घट रहा है। मई महीने में ही करीब 21 अरब घन मीटर पानी कम हो गया, जो गर्मी, बढ़ती खपत और वर्षा की कमी का संकेत है।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे गंभीर स्थिति दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में जलाशयों का स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच गया है। कई जलाशयों में पानी उनकी सामान्य क्षमता के आधे से भी कम रह गया है। कुछ नदी घाटियों में भी जल स्तर लगातार घट रहा है, जिससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और जलविद्युत उत्पादन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मानसून में देरी होती है या अपेक्षा से कम बारिश होती है, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। जलाशयों में घटता जल भंडार कृषि, शहरों की पेयजल व्यवस्था और बिजली उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए आने वाले हफ्तों में जल प्रबंधन और पानी के विवेकपूर्ण उपयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
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