भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ कांग्रेस ने मध्य प्रदेश की राजधानी में किसान महाचौपाल का आयोजन किया। इस दौरान प्रदेश के सभी प्रमुख नेताओं के साथ पार्टी के राष्ट्रिय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए। सभा में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने बिना अपनी कैबिनेट की सलाह लिए ट्रेड डील की है। वहीं खड़गे ने कहा “हमारे किसान जो भी पैदावार करते हैं, उन्हें मोदी सरकार में फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है। अब अमेरिका अपने घटिया सामानों को भारत में लाकर सस्ते में बेचेगा।”

सोयाबीन के किसानों को होगा नुकसान
7 फरवरी को भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर दोनों देशों ने एक संयुक्त बयान जारी किया था। इसमें कहा गया है, “भारत अमेरिका के सभी औद्योगिक सामानों और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर टैरिफ को समाप्त या कम करेगा।” इसके बाद कुछ उत्पादों का ज़िक्र भी बयान में किया गया है जिसमें सोयाबीन का तेल शामिल है।
उज्जैन से आए जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष अजय जाट मानते हैं कि ट्रेड डील से मध्य प्रदेश के किसानों को घाटा होगा। वह कहते हैं कि ट्रेड डील में सोयाबीन के तेल के आयात को रियायत दी गई है जबकि इस साल प्रदेश में सोयाबीन के किसानों को अपनी फसल बेहद कम दाम में बेचनी पड़ी है। उनकी आशंका है कि अगर रियायतों के साथ अमेरका का सोयाबीन तेल भारतीय बाज़ार में आएगा तो इससे बाज़ार में फसल के दाम और गिर जाएंगे।
वहीं शाजापुर से आए जिलाध्यक्ष नरेश्वर प्रताप सिंह कहते हैं कि भारत के किसान की जोत कम है और फसल की लागत और मेहनत दोनों ज़्यादा है जबकि अमेरिका में इसका उलट है। वह मानते हैं कि इस मूलभूत अंतर के कारण भारत का किसान अमेरिका के किसानों से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा। उनका कहना है कि अमेरिका के किसान अगर कम दाम पर अपनी फसल यहां बेचते हैं तो भारतीय किसानों को उनकी फसल के उचित दाम नहीं मिल पाएंगे। सिंह के ही बगल में खड़े एक अन्य नेता आरोप लगाते हैं कि इस डील से केवल ‘दो नेताओं’ को लाभ मिलेगा।
मध्य प्रदेश विधानसभा में पेश किए गए आर्थिक सर्वे के अनुसार प्रदेश में सोयाबीन का रकबा 3.10 प्रतिशत घटा है। यह 2023–24 के 6,060 हजार हेक्टेयर से घटकर 2024–25 में 5,872 हजार हेक्टेयर रह गया है।

कपास को होगा नुकसान
भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) के इंदौर जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पाठक कहते हैं कि यह समझौता किसानों और मजदूरों दोनों के हित में नहीं है। वह कहते हैं कि अगर विदेशों से कम दाम पर कपास खरीदा जाएगा तो मध्य प्रदेश के कपास उत्पादकों के लिए अपनी फसल का उचित दाम लेना मुश्किल हो जाएगा। वह कपास की खेती में बढ़ती हुई लागत पर चिंता जताते हैं। उनके अनुसार बीते कुछ सालों में प्रदेश के किसानों के लिए फसल से (कपास की) लाभ कमाना मुश्किल हो गया है ऐसे में अगर ट्रेड डील के बाद कपास के दाम और गिरेंगे तो या तो किसान कपास उत्पादन बंद करेंगे या फिर उन्हें मज़दूर बनाना पड़ेगा।
वह केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि पहले सरकार ने रोटी छीना, मकान छीना और अब कपड़ा भी छीनना चाहती है।
वहीं बीते दिनों ट्रेड डील का बचाव करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “घरेलू प्रोडक्शन इंडस्ट्रीज़ की ज़रूरतों से कम है, जिससे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को चालू रखने, रोज़गार बढ़ाने और एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए कुछ कॉटन इम्पोर्ट करना ज़रूरी हो गया है।”
बीते साल ही केंद्र सरकार ने कपास पर आयत शुल्क में छूट को 31 दिसंबर 2025 तक के लिए बढ़ा दिया था। इसका कांग्रेस सहित कई किसान संगठनों ने विरोध किया था।

बदली परिस्थिति के बीच क्या करना चाहिए?
दोनों देशों ने भले ही 7 फरवरी को संयुक्त बयान जारी किया हो मगर अब तक इसके क़ानूनी दस्तावेज साइन नहीं किए गए हैं। इस हफ्ते अंतरिम व्यापार समझौते पर दोनों देशों के बीच में 3 दिवसीय बैठक होनी थी। मगर फिलहाल के लिए यह टाल दी गई है। दरअसल बीते शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दूसरे देशों पर लगाए गए टैरिफ को अवैध ठहरा दिया। हालांकि इसके कुछ देर बाद ही ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 का उपयोग करते हुए 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी। इसका आसान भाषा में मतलब यह है कि अमेरिका सभी देशों के आयात पर 10% टैरिफ लगाएगा। यह अधिकतम 150 दिनों के लिए मान्य होगा।
ट्रंप ने कहा कि भारत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। मगर भारत की ओर से अब तक इस पर कोई भी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रतलाम के पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता पारस सकलेचा मानते हैं कि बदली हुई परिस्थिति में भारत को यह ट्रेड डील निरस्त कर देनी चाहिए। वह कहते हैं कि राष्ट्रिय स्तर पर आलोचना के बाद सरकार को यह समझ आ गया है कि यह डील हमारे हित में नहीं है। वह कहते हैं, “सरकार को स्पष्ट कहना चाहिए कि बदली हुई परिस्थिति में पुरानी डील हमारे देश के लिए फायदेमंद नहीं है और इसलिए हम नए सिरे से आकलन करके ट्रेड डील करेंगे।”
अमेरिकी कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर जल्दबाजी में डील करने का आरोप लगाया। कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने पूछा कि भारत ने डील साइन करने के लिए 20 फरवरी तक का इंतज़ार क्यों नहीं किया? हालांकि कांग्रेस के इन आरोपों और समझौते के टलने पर भारत की ओर से अब तक कोई भी आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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