ग्रीन पटाखे जेब और पर्यावरण के लिए महंगे, क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने की योजना, कश्मीर में टूरिस्ट संख्या लिमिट करने की तैयारी, मध्य प्रदेश में ट्रीटेड वेस्टवॉटर को रिसायकल करने का लक्ष्य। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
प्रमुख ख़बरें
ग्रीन पटाखे बाज़ार में 30% तक ज़्यादा महंगे हैं। लेकिन इस बात का कोई साइंटिफिक सबूत नहीं है कि वे प्रदूषण कम करते हैं। एक स्टडी के अनुसार, ग्रीन पटाखे आम पटाखों की तुलना में 60% ज़्यादा अल्ट्रा-फाइन पार्टिकल्स निकालते हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने घरेलू स्तर पर क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाने के लिए ₹2,800 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत 4 प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही ₹500 करोड़ का ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स स्टॉकपाइल प्रोग्राम’ भी प्रस्तावित है।
कश्मीर में टूरिस्ट जगहों पर रोज़ाना आने वाले टूरिस्ट की संख्या को लिमिट करने की तैयारी चल रही है। जम्मू और कश्मीर सरकार ने “सस्टेनेबल माउंटेन डेवलपमेंट पॉलिसी” का एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके तहत 15 बड़े टूरिस्ट जगहों पर रोज़ाना आने वाले टूरिस्ट की लिमिट तय करने और एक ऑनलाइन “J&K माउंटेन पास” लागू करने का प्रस्ताव है।
कुनो नेशनल पार्क का एक चीता सीमा पार कर राजस्थान के करौली गांव में पहुंच गया और मंगलवार शाम उसने एक मवेशी (पाड़े) का शिकार कर लिया। इससे आक्रोशित होकर ग्रामीणों ने वन विभाग की ट्रैकिंग टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और उन्हें बंधक बना लिया, जिन्हें बाद में सुरक्षित छुड़ाया गया।
मध्य प्रदेश सरकार ने “ट्रीटेड वेस्टवॉटर के रीसायकल और रीयूज़ के लिए ड्राफ़्ट स्टेट-लेवल पॉलिसी, 2026” तैयार की है। इस पॉलिसी के तहत, 2037 तक नॉन-ड्रिंकिंग एरिया में 100% सीवेज ट्रीटमेंट और 50% ट्रीटेड वॉटर का रीयूज़ करने का टारगेट है।
विस्तृत चर्चा
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2026-27 से 2030-31 तक ₹17,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) योजना को मंजूरी दी है। खबर पर विस्तार से बता रहे हैं पल्लव जैन।
‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ योजना को मंज़ूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए एक नई ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) योजना को मंज़ूरी दी है। इसके लिए 17,500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
इसके तहत सरकार 92 गीगावाट आवर (GWh) की एनर्जी स्टोरेज क्षमता को बढ़ावा देने की योजना बना रही है। इसमें से 30 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, 60 GWh पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज और बाकी 2 GWh नई स्टोरेज तकनीकों पर केंद्रित होंगे।
भारत में अभी लगभग 54 GWh की ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज क्षमता है, और 2031-32 तक इसे 411 GWh करने का लक्ष्य रखा गया है। माना जा रहा है कि आवंटित बजट से मौजूदा क्षमता में लगभग 170% की बढ़ोतरी हो सकती है।
असमान ऊर्जा का संकट
भारत जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपनी रीन्यूएबल एनर्जी क्षमता तेज़ी से बढ़ा रहा है। लेकिन यह ऊर्जा हमेशा एक समान नहीं मिलती। सोलर सूरज की रोशनी पर निर्भर है और विंड हवा की रफ़्तार पर, यानी जैसा मौसम, वैसी बिजली। इससे ग्रिड अस्थिर हो जाती है। ऐसे में हमें एनर्जी स्टोरेज की ज़रूरत है, जो इस अनियमितता को स्थिर कर सके।
एनर्जी स्टोरेज सिस्टम रीन्यूएबल एनर्जी के अधिक उत्पादन के समय अतिरिक्त बिजली को स्टोर कर लेते हैं। जब बिजली की मांग बढ़ती है लेकिन उत्पादन कम होता है, तब इसे वापस इस्तेमाल में लाया जा सकता है। मूल रूप से ये सिस्टम सोलर और विंड जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली को ऐसे रूप में बदल देते हैं जिसे स्टोर किया जा सके, और ज़रूरत पड़ने पर उसे वापस बिजली में बदल देते हैं।
योजना के तहत सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज परियोजनाओं के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग पाने की पात्र होंगी। वहीं, वैकल्पिक एनर्जी स्टोरेज तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की इकाइयां लागू करेंगी। घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए बैटरी एनर्जी स्टोरेज बनाने में कम से कम 40 प्रतिशत भारत में निर्मित सामान इस्तेमाल करने की शर्त रखी गई है।
पहले भी लागू हो चुकी यह फंडिंग
हम यह भी बता दें कि सरकार पहली बार इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग नहीं ला रही है। विद्युत मंत्रालय पहले से ही 43.8 GWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्षमता के विकास में सहयोग देने के लिए दो VGF योजनाएं लागू कर रहा है, जिनके तहत कुल 9,160 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है।
वायबिलिटी गैप फंडिंग उन प्रोजेक्ट्स को दी जाती है जिनमें रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट जोखिम भरा हो। सरकार इस क्षेत्र में प्राइवेट प्लेयर्स को लाना चाहती है, इसलिए VGF के ज़रिए जोखिम कम करके उन्हें आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। पहले जब सरकार ने एनर्जी स्टोरेज के लिए VGF दी थी, तो उसके नतीजे सकारात्मक रहे थे और भारत अपनी क्षमता 54 GWh तक ले आया है। हालांकि लक्ष्य काफ़ी बड़ा है: 2032 तक 411 GWh।
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