कमज़ोर मानसून गुजरात के बाँधों और रबी बुआई पर भारी पड़ा है, जबकि कर्नाटक ने ₹22,400 करोड़ की सूखा राहत माँगी है। बिहार में नदियों की गाद से राजमार्ग बनाने का समझौता हुआ है। मध्य प्रदेश ने दीपावली पर झुलसे मरीजों के लिए एयर एंबुलेंस प्रोटोकॉल लागू किया, वहीं भोपाल में AQI 200 पार होने पर सावधानी की सलाह है।
पर्यावरण की प्रमुख खबरें
गुजरात: कमज़ोर मानसून, सूखे रह गए बाँध
कमज़ोर मानसून के कारण गुजरात के बाँध सूखे रह गए हैं। प्रदेश के 206 जलाशयों में से 147 का जलस्तर 70% से कम हो गया है। राज्य के कुल जल भंडारण में भी 34% की कमी आई है।
देश में रबी फसलों की कुल बुआई 46% घट गई है। गेहूँ का रकबा पिछले वर्ष के 3.34 लाख हेक्टेयर के मुकाबले गिरकर महज़ 19,000 हेक्टेयर रह गया है। इसका कारण मानसून की कमी और मिट्टी में नमी का अभाव माना जा रहा है।
बिहार: नदियों की गाद से बनेंगे राजमार्ग
बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने नदियों से वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालने के लिए एक MoU किया है। ‘नदी संजीवनी’ पहल के तहत इस गाद का इस्तेमाल राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में होगा। इससे बाढ़ का खतरा घटेगा और उपजाऊ कृषि भूमि का संरक्षण होगा।
कर्नाटक: ₹22,400 करोड़ की सूखा राहत की माँग
कर्नाटक ने केंद्र से ₹22,400 करोड़ की सूखा राहत माँगी है। राज्य के 226 तालुकों में फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे 62,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के आर्थिक नुकसान का अनुमान है। राज्य ने ₹11,000 प्रति हेक्टेयर की सहायता दर का अनुरोध किया है।
मध्य प्रदेश: झुलसे मरीजों के लिए एयर एंबुलेंस
मध्य प्रदेश सरकार ने दीपावली के दौरान कार्बाइड गन या पटाखों से गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के लिए एयर एंबुलेंस सेवा का आपातकालीन प्रोटोकॉल लागू किया है। मरीज को दूसरे ज़िले या राज्य के अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए ज़िला कलेक्टर की स्वीकृति अनिवार्य होगी।
भोपाल: AQI 200 के पार, सेहत की सलाह
भोपाल में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 के पार जाने पर स्वास्थ्य विभाग ने सुबह और देर रात की सैर या दौड़ से बचने की सलाह दी है। इसके अलावा घरों के भीतर अंगीठी, कोयला, कंडे या केरोसिन जलाने से पूरी तरह परहेज़ करने की सलाह दी गई है।
आज की चर्चा
कुल्सी नदी पर बांध का विरोध
पल्लव जैन, ग्राउंड रिपोर्ट
अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना का विरोध हो रहा है। इसी तरह असम और मेघालय में कुलसी नदी पर प्रस्तावित 55 मेगावॉट की जलविद्युत परियोजना का विरोध लोग पिछले एक साल से कर रहे हैं।
जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, इस परियोजना से 26,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिलेगी, 55 मेगावॉट जलविद्युत का उत्पादन होगा और बाढ़ का खतरा कम होगा। इसकी अनुमानित लागत 1,454.95 करोड़ रुपये है।
सरकारी अनुमानों के अनुसार इससे लगभग 15 गाँव प्रभावित होंगे, जबकि स्वतंत्र सामुदायिक आकलन के मुताबिक असम-मेघालय सीमा के दोनों ओर कुल 36 गाँव प्रभावित हो सकते हैं। समुदाय के नेताओं का कहना है कि डूब क्षेत्र में आने के कारण परियोजना के आसपास खेती करने वाली लगभग 90% आबादी प्रभावित हो सकती है।
स्क्रॉल डॉट इन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक इसके कई पर्यावरणीय जोखिम भी हैं। ‘कुलसी नदी बेसिन प्रकृति और आजीविका संरक्षण समिति’ का तर्क है कि इस बाँध से कुलसी नदी बेसिन को स्थायी पारिस्थितिक नुकसान पहुँचेगा। इससे गंगा डॉल्फिन की आबादी को भी नुकसान हो सकता है। परियोजना क्षेत्र चंदुबी झील और पास की एक आर्द्रभूमि (वेटलैंड) से मुश्किल से 3 किमी दूर है, जो पारिस्थितिक, जल-विज्ञान और पर्यटन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
इस विरोध-प्रदर्शन का केंद्र उकियाम गाँव है, जहाँ लगभग 800 लोग रहते हैं। वहाँ के निवासियों का कहना है कि 62 मीटर ऊँचा बाँध बनने से उनके ज़्यादातर घर पानी में डूब जाएँगे। उनके अनुसार बाँध बना, तो सभी 10 गाँव डूब जाएँगे। पहाड़ी इलाके की एक काफ़ी संकरी नदी के उद्गम स्थल पर इतनी ऊँचाई और इतने बड़े पैमाने का ढाँचा बनाने से नदी के प्राकृतिक बहाव में बहुत बड़ा बदलाव आ जाएगा। ग्राम सभाओं ने भी इस परियोजना के खिलाफ़ प्रस्ताव पारित किए हैं।
अब प्रशासनिक कदमों की बात करें। जून 2025 में असम और मेघालय की सरकारों ने बाँध बनाने की अपनी योजना की घोषणा की थी। दोनों राज्यों के 26 से अधिक गाँवों ने इसका विरोध किया। लोगों ने स्थानीय सर्कल कार्यालय और गुवाहाटी में धरना दिया और सरकार को ज्ञापन सौंपा। इसके बाद असम सरकार ने कदम पीछे खींचते हुए कहा कि अभी तक इस पर “कोई अंतिम निर्णय” नहीं लिया गया है।
लेकिन जुलाई में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली एक संस्था ने कुलसी बाँध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) असम पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंप दी। इससे असम सरकार के लिए इस परियोजना को आगे बढ़ाने और लागू करने का रास्ता साफ़ हो गया।
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