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रिपोर्टर से बात: मध्य प्रदेश में आंदोलनों का दौर

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पर्यावरण आज | भोज वेटलैंड के जलग्रहण क्षेत्र में अल्ट्राटेक के प्रस्तावित सीमेंट प्लांट से लेकर मध्य प्रदेश के 11 जिलों में सूखे जैसे हालात तक, आज की सुर्खियां पानी और पर्यावरण पर केंद्रित हैं। तेलंगाना में सुपर अल नीनो की चेतावनी और विशाखापट्टनम में गूगल डेटा सेंटर का विरोध भी चर्चा में हैं। साथ ही मध्य प्रदेश के आंदोलनों पर रिपोर्टर से बात।

आज की प्रमुख हेडलाइंस

वेटलैंड के कैचमेंट में सीमेंट प्लांट की तैयारी

भोपाल के भोज वेटलैंड के कैचमेंट क्षेत्र में सीमेंट प्लांट लगाने के लिए पर्यावरण मंजूरी मांगी गई है। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड 80 लाख टन उत्पादन क्षमता वाला यह प्लांट भोज वेटलैंड के जलग्रहण क्षेत्र में स्थित फंदा कलां में लगाना चाहती है। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि जनसुनवाई के बाद ही प्लांट को मंजूरी दी जाएगी।


अभी तक सूखा घोषित नहीं

मध्य प्रदेश के 11 जिलों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात बन गए हैं। धार, झाबुआ और अलीराजपुर सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, लेकिन सरकार ने अब तक यहां सूखा घोषित नहीं किया है।

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धान न लगाएं किसान

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सुपर अल नीनो और सूखे के हालात को देखते हुए किसानों से धान और अधिक पानी वाली फसलें न उगाने की अपील की है। राज्य में 28 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे जलाशय 50 फीसदी तक खाली हो गए हैं और राज्य जल संकट के मुहाने पर खड़ा है।


डेटा सेंटर्स का विरोध

विशाखापट्टनम में सरकार और गूगल के बीच एआई हब और डेटा सेंटर बनाने के करार का जमकर विरोध हो रहा है। पर्यावरणीय संगठनों का कहना है कि एआई डेटा सेंटर आगे चलकर शहर में पानी का संकट खड़ा कर सकते हैं। इसके विरोध में शहर में बड़े स्तर पर रैलियां और प्रदर्शन हो रहे हैं।


रिपोर्टर से बात

मध्य प्रदेश में आंदोलनों का दौर

अब्दुल वसीम अंसारी, ग्राउंड रिपोर्ट

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पिछले सप्ताह सिर्फ दिल्ली ही नहीं, मध्य प्रदेश में भी आंदोलनों का दौर रहा। फर्क यह था कि यहां आंदोलन सत्ता परिवर्तन के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय समस्याओं को लेकर थे। सीहोर के कोसमी में आदिवासियों को वनभूमि से बेदखल किए जाने के खिलाफ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। वहीं प्रभावित आदिवासियों ने वनाधिकार की मांग को लेकर कोसमी से भोपाल तक पैदल मार्च शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने आदिवासियों को न्याय का भरोसा दिया, जिसके बाद आंदोलन शांत हो गया।

पूरी खबर यहां पढ़ें। कोसमी में आदिवासियों के घरों पर बुलडोज़र, वन भूमि पर अतिक्रमण का सच

प्रदेश में दो और आंदोलनों की गूंज रही, जिन्हें हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी ने ग्राउंड पर जाकर कवर किया। ये आंदोलन क्या थे और रिपोर्टिंग का उनका अनुभव कैसा रहा, यह जानेंगे आज के विशेष अंक “रिपोर्टर से बात” में।

पटवारियों का आंदोलन

देवास में पटवारियों पर की गई कार्रवाई के बाद पटवारियों का उग्र प्रदर्शन | फोटो: विशेष प्रबंध
देवास में पटवारियों पर की गई कार्रवाई के बाद पटवारियों का उग्र प्रदर्शन | फोटो: विशेष प्रबंध

हाल ही में पटवारियों ने मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत कराई जा रही फ्री रजिस्ट्री अभियान को लेकर अपनी नाराजगी जताई थी और वही दूसरी और ग्रामीण और कांग्रेस ने विद्युत कटौती को लेकर प्रदर्शन किया था।

पल्लव ये दोनों ही स्टोरी ग्राउंड रिपोर्ट ने जमीनी स्तर से कवर की है,सबसे पहले हम बात करते है पटवारियों कि,

केंद्र सरकार की मूल योजना स्वामित्व योजना में अधिकार पत्र को रजिस्ट्री में बदलने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है,जिसमें सरकार 3800 करोड़ रुपए खर्च करके इन अधिकार पत्रों की मुफ्त रजिस्ट्री कर रही हैं।इस अभियान को गति देने के लिए सरकार ने पटवारियों को निष्पादक यानि कि विक्रेता बनाया जिसके बाद पटवारियों का विरोध शुरू हो गया।

हमने राजगढ़ सहित प्रदेश के अलग अलग जिले से पटवारियों की इस खबर को कवर किया और पटवारियों से बात की,तो हमारे सामने वो बाते भी आई,जो कई तरह के सवाल खड़े कर रही थी।

जिन पटवारियों से हमने बात की,उनका कहना था कि,इस अभियान में सरकार हमे निष्पादक यानि कि विक्रेता बना रही है,जबकि हम सिर्फ सरकारी कर्मचारी है भूमि के मालिक नहीं है,यदि भविष्य में ग्रामीणों में अधिकार पत्र को लेकर कोई वाद विवाद होंगे तो हमे कोर्ट में घसीटा जाएगा,जबकि स्वामित्व योजना में दिए गए अधिकार पत्र में हमे इतना समय भी नहीं दिया गया था कि,हम किसी बात को अच्छी तरह से वेरीफाई करले जो मौके पर दिखा और मिला हमने बस वही वेरिफाई किया और अधिकार पत्र दे दिए।

अब सरकार चाहती है कि,ये रजिस्टर्ड हो और ग्रामीणों को लोन सहित अन्य सुविधाओं का लाभ मिले,जबकि लोन और अन्य सुविधाएं अधिकार पर भी मिल रहे है उन्होंने हमे पूरे प्रदेश की सूची दिखाई और कहां की हजारों ग्रामीणों को करोड़ों रुपए का ऋण पहले ही मिल चुका है,फिर भी सरकार हम पर दबाव बना रही है और काम न करने वाले पटवारियों पर कार्यवाही की गई है।हालांकि बाद में नियमों में संशोधन हुए और पटवारियों ने दोबारा से काम शुरू कर दिया।

पूरी खबर यहां पढ़ें: स्वामित्व योजना का एक शब्द कैसे बन गया मध्य प्रदेश में पटवारी आंदोलन की वजह

बिजली कटौती के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध प्रदर्शन

पल्लव अब हम अगर दूसरी खबर की बात करे जो मध्यप्रदेश में ग्रामीण क्षेत्रों में रात में होने वाली विद्युत समस्याओं से जुड़ी है तो उसमें प्रदेश के अलग अलग जिले राजगढ़,सीहोर,नीमच वा अन्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों से रात में होने वाली विद्युत कटौती को लेकर विरोध की बाते सामने आई,जिन्हें कांग्रेस का भी समर्थन मिला।

बिजली कटौती के खिलाफ राजगढ़ में आंदोलन | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी
बिजली कटौती के खिलाफ राजगढ़ में आंदोलन | फोटो: अब्दुल वसीम अंसारी

ग्राउंड रिपोर्ट ने जब इस विरोध को कवर किया तो ये बात सामने आई कि,विद्युत कंपनी लोड शेडिंग करने के नाम पर पिछले 15 दिनों से रात में 8 से 10 घंटे कटौती कर रही है और दिन में भी कटौती का कोई समय निर्धारित नहीं है,ग्रामीणों ने हमे बताया कि,इस विद्युत कटौती के कारण रात निकालना मुश्किल हो रहा है और इस कटौती के कारण रबी की फसल की तैयारी भी प्रभावित हो रही है,जब वे स्थानीय स्तर पर विद्युत विभाग के अधिकारियों से बात करते तो वे हाथ खड़े करते हुए कहते कि,हमारे हाथ में कुछ नहीं है।उसी को लेकर हमने विरोध प्रदर्शन किए,जिसके बाद उन्हें एफआईआर करने की धमकियां दी जा रही है।

ग्रामीणों की इन्हीं समस्याओं को लेकर कांग्रेस ने भी पूर्व ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह खींची के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया।

दरअसल पल्लव प्रदेश सरकार का कहना था कि,इस बार बारिश कम हुई है इस कारण जो विद्युत प्लांट्स है उन पर प्रभाव पड़ा है और पिछले वर्ष की तुलना में डिमांड बढ़ने के कारण प्रदेश 800 मेगावाट कम बिजली की समस्या का सामना कर रहा है,सरकार इस समस्या को सुलझाने का प्रयास कर रही है ताकि कि रबी की फसल के समय किसानों को परेशानी न हो।

लेकिन ग्राउंड रिपोर्ट से बात करते हुए पूर्व ऊर्जा मंत्री ने आरोप लगाए कि,वर्ष 2021 में जब वे ऊर्जा मंत्री थे तब 17 से 18 हजार की डिमांड भी मध्यप्रदेश में मेट आउट हुई है।सरकार चाहे तो बिजली खरीदकर इस समस्या को दूर कर सकती है।

लेकिन पल्लव जब हमने विद्युत प्रवाह का ऑनलाइन पोर्टल चेक किया था ये बात सामने आई कि,सरकार दिन में कम राशि होने के कारण एक्सचेंज से बिजली तो खरीद रही थी लेकिन रात में एक्सचेंज की कीमत में बढ़ोतरी होने के कारण बिजली नहीं खरीदी जा रही थी। जो सीधे तौर पर ग्रामीणों और कांग्रेस के प्रदर्शन को बल दे रही थी।

पूरी खबर यहां पढ़ें। मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 10 घंटे तक बिजली कटौती, कई जिलों में विरोध प्रदर्शन

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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