क्या सोलर ट्रॉली हो सकती है सोलर पंप को चोरी और क्षति से बचाने का समाधान?
किसान अजीत सिंह सोलर ट्रॉली के साथ | फोटो: चंद्र प्रताप तिवारी
सोलर पंप को चोरी, प्राकृतिक आपदा और तोड़ फोड़ से होने वाले नुकसान से सुरक्षित रखने के उपाय मध्य प्रदेश के किसान खोज रहे हैं। मोबाईल सोलर बनवाकर किसान जय सिंह ने अपनी इन्हीं समस्याओं को एक साथ हल करने का प्रयास किया है।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले के सोनवर्षा गांव में रहने वाले जय सिंह को अपने पिता से विरासत में जो खेती की ज़मीन मिली, वह एक जगह न होकर अलग-अलग टुकड़ों में बंटी थी। ज़्यादातर ज़मीन नालों, तालाबों या बांधों के पास थी। अनियमित बिजली कटौती की वजह से सिंचाई के लिए उन्हें पूरी तरह डीज़ल पंप पर निर्भर रहना पड़ता था। पेशे से भूगोल के प्रोफेसर रहे जय सिंह के लिए खेती का अतिरिक्त काम संभालना चुनौतीपूर्ण तो था ही, लेकिन इसमें सिंचाई सबसे बड़ी समस्या थी। वे एक ऐसा समाधान खोज रहे थे जो उनकी इन सभी समस्याओं को हल कर दे।जय सिंह चाहते थे कि उनके बेटे अजीत, जो अब खेती का पूरा काम संभालते हैं, उन्हें उन समस्याओं का सामना न करना पड़े जिनसे वे खुद जूझते रहे। टीकमगढ़ में पोस्टिंग के दौरान उन्हें सोलर पंप ट्रॉली बनवाने का ख़याल आया। यह एक ऐसा समाधान हो सकता था जो सरकारी बिजली और डीज़ल पर निर्भर हुए बिना, टुकड़ों में बंटे उनके खेतों को आसानी से सींच सके।खोज शुरू की तो हरियाणा स्थित टीजीएसपी कंपनी का विज्ञापन उनके सामने आया, जो हूबहू वैसा ही पोर्टेबल सोलर पंप बनाकर दे रही थी जैसा उन्होंने सोचा था। जय सिंह कहते हैं, “चोरी और वैंडलिज़्म (तोड़फोड़) का डर और बंटी हुई ज़मीन होने की वजह से हम सरकारी सब्सिडी पर मिलने वाले स्थायी सोलर पंप की ओर नहीं जा सकते थे, इसलिए हमने यह पोर्टेबल सोलर पंप बनवाया।”जय सिंह बताते हैं कि ऑर्डर देने के तीन महीने के भीतर टीजीएसपी ने यह मोबाइल सोलर पंप उनके दरवाज़े तक पहुंचा दिया। इसे बनवाने में उन्होंने कुल 3 लाख 80 हज़ार रुपए खर्च किए, जबकि ट्रांसपोर्टेशन पर 55 हज़ार रुपए का खर्च आया। पिछले पांच सालों से वे इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और खुश हैं कि अब तक इसके संचालन में उन्हें किसी भी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है।जय सिंह के बेटे अजीत बताते हैं कि उनके खेतों तक पहुंचने का रास्ता समतल नहीं है। ऊंचा-नीचा रास्ता होने की वजह से सोलर ट्रॉली को बड़े एहतियात के साथ संभलकर चलाना पड़ता है। लेकिन मोबाइल सोलर पंप ने उनकी ज़िंदगी काफ़ी आसान कर दी है, क्योंकि बढ़ते डीज़ल के दाम और अनियमित बिजली कटौती उनके लिए बड़ी समस्या थे। इस समाधान से अब वे जब चाहें, अपनी सुविधा के अनुसार सिंचाई कर पाते हैं।मोबाइल सोलर पंप को खेतों तक ले जाने और सिंचाई करने का काम अजीत के सहायक धर्मदास साकेत करते हैं। वे कहते हैं कि इसे चलाना आसान है। शुरुआत में तकनीशियन ने उन्हें एक बार समझाया था, और तब से वे यह काम आसानी से कर रहे हैं। पुराने दिनों को याद करते हुए वे कहते हैं, “पहले भागदौड़ ज़्यादा हो जाती थी।”जय सिंह मोबाइल सोलर पंप के अन्य फ़ायदे भी बताते हैं। वे कहते हैं, “घर की बिजली चलानी हो, खेती के अन्य काम करने हों या दाल मिल और चक्की जैसा कोई छोटा-मोटा धंधा चलाना हो, यह हर जगह कारगर है।”बाकी किसानों के लिए मोबाइल सोलर पंप अपनाना मुश्किल क्यों है, इस सवाल पर जय सिंह कहते हैं, “शायद हर किसान के लिए चार लाख रुपए का निवेश करना संभव नहीं है। इस तरह के समाधानों के लिए फाइनेंस की सुविधा न होना भी एक रुकावट है।”खेत में लगे स्थायी सोलर पंप की चोरी, प्राकृतिक आपदा और तोड़फोड़ से होने वाला नुकसान देशभर के किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है। सोलर पंप की सुरक्षा के लिए किसान अलग-अलग उपाय खोज रहे हैं। कई किसान अपने सोलर पंप को खोलकर घर ले आ रहे हैं, लेकिन ऐसे में पंप के वारंटी पीरियड से बाहर हो जाने का खतरा रहता है। चोरी या क्षति की स्थिति में किसानों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसे और समझने के लिए आप हमारी यह रिपोर्ट पढ़ सकते हैं।
फोटो क्रेडिट: चंद्र प्रताप तिवारी, ग्राउंड रिपोर्ट
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Climate journalist and visual storyteller based in Sehore, Madhya Pradesh, India. He reports on critical environmental issues, including renewable energy, just transition, agriculture and biodiversity with a rural perspective.
Rajeev Tyagi is an independent environmental journalist in India reporting on the intersection of science, policy and public. With over five years of experience, he has covered issues at the grassroots level and how climate change alters the lives of the most vulnerable in his home country of India. He has experience in climate change reporting, and documentary filmmaking. He recently graduated with a degree in Science Journalism from Columbia Journalism School. When he is not covering climate stories, you’ll probably find Tyagi exploring cities on foot, uncovering quirky bits of history along the way.
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