गेहूं की एमएसपी मात्र ₹25 बढ़ी, पटाखों पर पूर्णतः प्रतिबंध नहीं, गुजरात में सूखे से चारे की दिक्कत, मप्र में लगातार दूसरे साल भावांतर से खरीद। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
केंद्र सरकार ने रबी की 6 फसलों के MSP में बढ़ोतरी की घोषणा की है। गेहूं की MSP ₹25 बढ़ाकर ₹2,610 प्रति क्विंटल किया गया। जो 2010-11 के बाद से सबसे कम वार्षिक वृद्धि है। सरकार 324 लाख टन फसलों की खरीद के लिए किसानों को कुल ₹90,962 करोड़ का भुगतान करेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली से पहले देशव्यापी पूर्ण प्रतिबंध से इनकार किया, लेकिन चौबीसों घंटे आतिशबाजी पर रोक की बात कही। कोर्ट ने नेक्स्ट-जनरेशन ज्वॉइंट ग्रीन क्रैकर्स के निर्माण व बिक्री की अनुमति दी है। पटाखों में बेरियम के इस्तेमाल पर अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
सूखाग्रस्त मराठवाड़ा क्षेत्र में पानी की किल्लत बढ़ी है, जिसमें बीड़ जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है। प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 142 तथा बस्तियां 91 हो गई हैं। क्षेत्र में 246 टैंकरों (अकेले बीड़ में 120 टैंकर) से पानी दिया जा रहा है।
गुजरात (विशेषकर सौराष्ट्र व कच्छ) में चारे के संकट के कारण किसानों ने 15–20 दिनों में करीब 2,000 बैल राजकोट के सद्भावना बैल आश्रम में समर्पित कर दिए हैं। हरा चारा ₹60 से बढ़कर ₹140 (प्रति 20 किग्रा) हो गया है तथा बैलों की जोड़ी के रखरखाव का खर्च ₹300/दिन हो गया है।
मध्य प्रदेश सरकार लगातार दूसरे वर्ष भावांतर योजना के तहत सोयाबीन की खरीदी करेगी, जिसके लिए 3 से 17 अक्टूबर 2026 तक e-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन होगा। खाते के सत्यापन के लिए किसानों के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ₹1 भेजकर पेमेंट टेस्टिंग की जाएगी। इस वर्ष 7 से 10 लाख किसानों के पंजीयन और करीब 20 लाख टन सोयाबीन खरीदी का अनुमान है।
मध्य प्रदेश राशन विक्रेता संघ ने 1 से 7 अक्टूबर तक हड़ताल का ऐलान किया है, जिससे भोपाल की 400 दुकानों सहित प्रदेश की करीब 26,000 उचित मूल्य दुकानें बंद रहेंगी। राशन विक्रेता वितरण कमीशन को वर्तमान ₹90 प्रति क्विंटल से बढ़ाकर ₹200 से ₹250 प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।
विस्तृत चर्चा
देश में मानसून 2026 सामान्य से 12.6% कम बारिश के साथ समाप्त हुआ, जो 2001 के बाद 13वां सबसे सूखा मानसून दर्ज हुआ। पूरे देश का अपडेट दे रहे हैं अब्दुल वसीम अंसारी।
भारत में सूखा गुज़रा मानसून
दैनिक भास्कर की आज 1 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल का मानसून देश में 13वां सबसे सूखा मानसून रहा है। पूरे सीजन में सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। साल 2001 के बाद से यह देश की चौथी सबसे कम बारिश है। देश के करीब 43% जिलों में इस बार सामान्य से 20 से 72 फीसदी तक कम पानी बरसा है।
भारत में बारिश का वितरण
अगर हम राज्यों की बात करें, तो इस कम बारिश का सबसे ज्यादा असर देश के 11 बड़े राज्यों पर पड़ा है। पंजाब पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है जहां 41% कम बारिश हुई है।
इसके बाद बिहार में 32%, कर्नाटक में 30.3%, आंध्र प्रदेश में 24.3%, हरियाणा में 23.4%, राजस्थान में 21.8%, तमिलनाडु में 19.7% और महाराष्ट्र में 19% कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा तेलंगाना, गुजरात और हिमाचल प्रदेश में भी सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है।
मध्य प्रदेश में बारिश का हाल
देश के साथ-साथ अगर हम मध्य प्रदेश की बात करें, तो यहां भी स्थिति ठीक नहीं है। एमपी में इस बार कुल 36.4 इंच बारिश हुई है, जो सामान्य से 4% कम है। लेकिन राज्य के 10 जिलों में सूखे जैसे हालात बन गए हैं जहां बारिश की भारी कमी रही है।
इन जिलों में सबसे बुरा हाल आलीराजपुर का है जहां सामान्य से 51% कम बारिश हुई है। इसके अलावा धार में 40%, झाबुआ में 35%, रतलाम में 35%, बैतुल में 33%, हरदा में 32% और छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, इंदौर व नर्मदापुरम जैसे जिलों में भी 23% से लेकर 33% तक कम पानी गिरा है।
भोपाल में ज़्यादा बारिश
अब बात करते हैं राजधानी भोपाल की। यहां एक बहुत ही दिलचस्प और विरोधाभासी स्थिति देखने को मिली है। भोपाल में पूरे मानसून सीजन में कुल 45.18 इंच बारिश हुई, जो सामान्य से 9% ज्यादा है। यहां के बड़े तालाब समेत भदभदा के गेट भी खुले और कोलार जलाशय 95.7%, बरगी 98.3% तक भर चुके हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि भोपाल में सितंबर का महीना पिछले 8 साल में सबसे कमजोर रहा, जहां सितंबर में सिर्फ 6.18 इंच पानी ही बरसा।
मौसम वैज्ञानिकों और आईसीआईसीआई बैंक की रिपोर्ट का कहना है कि मानसून के कमजोर होने के पीछे अल नीनो एक बड़ा जोखिम बना हुआ था।
इंडियन ओशन डिपोल (IOD) के 0.76 पॉजिटिव होने की वजह से अल नीनो के इस असर की कुछ हद तक भरपाई हो पाई। जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ने से बच गई। अब आने वाले दो से तीन दिनों में राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड, गुजरात और मध्य प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से मानसून की पूरी तरह विदाई होने जा रही है।
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