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मध्य प्रदेश में 2 दशकों बाद सरकारी बसों की वापसी

महाराष्ट्र के सूखे से लेकर मध्य प्रदेश में सरकारी बसों की वापसी तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

सिक्किम में भूस्खलन; नेपाल में भी अलर्ट, महाराष्ट्र में सूखा प्रभावित किसानों को राहत, तमिलनाडु का कर्णाटक को पानी देने से इंकार, 31 अक्टूबर को गुजरात जाएंगे चीता। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

सिक्किम के पश्चिमी जिले के रिंबी गांव में लगातार बारिश के बाद बड़ा भूस्खलन हुआ, जिससे घरों, सरकारी क्वार्टरों और अन्य संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा। अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। नेपाल में भी 25–27 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान है, जिससे बाढ़, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा बताया गया है। 


केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम रिफाइनरियों और टेक्सटाइल इकाइयों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन-तीव्रता के लक्ष्यों में संशोधन किया है। रिफाइनरी क्षेत्र की 21 इकाइयों और टेक्सटाइल क्षेत्र की 173 इकाइयों पर यह व्यवस्था लागू है। संशोधन में सात इंडियन ऑयल रिफाइनरियों के उत्सर्जन बेसलाइन आंकड़े बदले गए हैं और 2025-26 के अनुपालन लक्ष्य हटा दिए गए हैं। 

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महाराष्ट्र सरकार वाशिम और अमरावती सहित सूखा प्रभावित जिलों के किसानों को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए सूखा राहत नियमों के तहत पहला आदेश जारी करेगी। जल निकायों की डी-सिल्टिंग, तालाबों की मरम्मत, चारा व पेयजल आपूर्ति, खाद्यान्न सहायता और किसानों के बच्चों की शिक्षा के लिए सीधी वित्तीय मदद शामिल है।


कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि जलाशयों में पानी की आवक रुकने और भीषण सूखे के कारण तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ना कठिन है। सीडब्ल्यूआरसी (CWRC) ने तमिलनाडु के लिए 15 दिनों तक 4,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था, जिसके खिलाफ कर्नाटक सरकार अपील दायर करेगी।


उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने स्पष्ट किया कि बुधनी, उज्जैन, नीमच, छतरपुर और दमोह सहित 9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी (PPP) मॉडल के बजाय सरकार खुद संचालित करेगी।

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कूनो नेशनल पार्क से 6 चीतों को गुजरात के बन्नी घास मैदान में 31 अक्टूबर तक शिफ्ट करने की तैयारी है। संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों इन चीतों को बन्नी में छोड़ा जाएगा।

विस्तृत चर्चा

मध्य प्रदेश में ‘सीएम सुगम ट्रांसपोर्ट बस सेवा’ की शुरुआत

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री मोहन यादव आज भोपाल-इंदौर-उज्जैन रूट पर नई बस सेवा का शुभारंभ करेंगे। यह लगभग 2 दशक बाद प्रदेश में सरकारी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की वापसी होगी। 

बसों की संख्या, प्रकार और भविष्य का लक्ष्य

प्रथम चरण: पहले चरण में भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, सागर, रीवा और पन्ना सहित विभिन्न मार्गों पर कुल 351 बसें चलाई जाएंगी।

पीएम ई-बसें: इन 351 बसों में 180 प्रधानमंत्री इलेक्ट्रिक बसें (PM Electric Buses) भी शामिल हैं।

दीर्घकालिक लक्ष्य: वर्ष 2031 तक राज्य में 15,000 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है।

ग्रामीण नेटवर्क: इस सेवा का विस्तार राज्य की 75% ग्राम पंचायतों तक करने की योजना है।

संचालन मॉडल: यह पूरा परिवहन ढांचा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP मोड) पर आधारित है।

किराया और यात्रियों के लिए सुविधाएं

निश्चित किराया (Fixed Fare): यात्रियों के लिए बस किराया तय कर दिया गया है। निजी बस ऑपरेटर्स अपनी मर्जी से अधिक किराया नहीं वसूल सकते; ओवरचार्जिंग की शिकायत सही साबित होने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फ्रीक्वेंसी एवं समय: भोपाल और इंदौर जैसे व्यस्त मार्गों पर हर 5 से 10 मिनट में बसें उपलब्ध होंगी, जबकि अन्य मार्गों पर यह अंतराल 5 से 30 मिनट का होगा।

रात्रि सेवा: बसें रात के समय भी संचालित होंगी।

डिजिटल सुविधाएं: यात्री अपने मोबाइल फोन से ऑनलाइन टिकट बुक कर सकते हैं और एक ऐप के माध्यम से बसों की लाइव लोकेशन देख सकते हैं। बस डिपो पर भी डिजिटल डिस्प्ले की सुविधा होगी, जहाँ से रूट्स और टाइमिंग की जानकारी मिलेगी।

सुरक्षा, रियायतें और निगरानी व्यवस्था

सुरक्षा व्यवस्था: यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में CCTV कैमरे और पैनिक बटन लगाए गए हैं।

दिव्यांगजनों के लिए रियायत: दिव्यांग (डिसेबल) यात्रियों को किराए में 50% की विशेष छूट मिलेगी।

सामान संबंधी नियम: सामान्य व्यक्तिगत सामान के लिए कोई अलग किराया नहीं लिया जाएगा, लेकिन अतिरिक्त सामान या कार्गो पर शुल्क लागू होगा।

कमांड एंड कंट्रोल रूम से निगरानी: बसों की रफ्तार, लाइव लोकेशन, रूट, टाइमिंग तथा ड्राइवर व कंडक्टर के व्यवहार की निरंतर मॉनिटरिंग कमांड और कंट्रोल रूम द्वारा की जाएगी।

कंट्रोल रूम केंद्र: इसके लिए भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, रीवा, उज्जैन और सागर में कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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