पर्यावरण आज | सल्फर की आयातित कीमत दोगुनी होकर 1,100 डॉलर प्रति टन हो गई है, जिससे उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित हुई। केरलम में भारी बारिश से 5 लोगों की मौत हुई। मध्य प्रदेश में 24 सितंबर से भारी बारिश का अलर्ट है। देश में 21 फीसदी कम बारिश से जल संकट का खतरा है। गांधी सागर में मादा चीता सीसीबी-2 छोड़ी गई। आज चर्चा करेंगे मध्य प्रदेश में हाथियों के संकट पर।
आज की हेडलाइन्स
भारत में इंपोर्ट होने वाले सल्फर की ‘लैंडेड’ कीमत दोगुनी होकर 1,100 डॉलर प्रति टन हो गई है। इसकी मुख्य वजह यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध है। सल्फर का सिर्फ 10 फीसदी हिस्सा माइनिंग से मिलता है, बाकी 90 फीसदी पेट्रोलियम रिफाइनिंग और प्राकृतिक गैस प्रोसेसिंग के बाइप्रोडक्ट के रूप में हासिल होता है। सल्फर की कमी का असर खेती में इस्तेमाल होने वाले डाई-अमोनियम फॉस्फेट, सिंगल सुपर फॉस्फेट और दूसरे बड़े कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइज़र की उपलब्धता पर पड़ा है।
केरलम में सोमवार को लगातार दूसरे दिन तेज बारिश की आशंका है। मौसम विभाग ने कई जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। इससे पहले रविवार को भारी बारिश ने इडुक्की, मलप्पुरम सहित कई जिलों में तबाही मचाई थी। लैंडस्लाइड, मडस्लाइड और अचानक आई बाढ़ की अलग-अलग घटनाओं में 5 लोगों की मौत हो गई।
मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर शुरू होगा। मौसम विभाग ने 24 सितंबर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। तब तक प्रदेश में हल्की बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। प्रदेश में अब तक औसतन 33.9 इंच बारिश हो चुकी है, जो सामान्य बारिश का करीब 91 फीसदी है।
देश में पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 21 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग 741 जिलों में बारिश दर्ज करता है, जिनमें से 343 जिलों में बारिश का कोटा अधूरा रह गया है। 82 जिले ऐसे हैं, जहां 50 फीसदी से भी कम बारिश हुई है। पिछले साल के मुकाबले जलाशयों में भी 21 फीसदी कम पानी है। ऐसे में देशभर में पानी का संकट गहरा सकता है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को बोत्सवाना से भारत लाई गई मादा चीता सीसीबी-2 को गांधी सागर राष्ट्रीय उद्यान में रिलीज़ किया। गांधी सागर को कूनो के बाद चीतों के दूसरे घर के रूप में तैयार किया गया है। अब यहां चार चीते हो गए हैं, दो नर और दो मादा। वन्यजीव अधिकारियों को उम्मीद है कि सीसीबी-2 के आने से चीतों का नया परिवार बसाने में मदद मिलेगी।
आज की चर्चा
मध्य प्रदेश के सतपुड़ा नेशनल पार्क में देनवा नदी के पास एक हाथी दिखाई दिया है। बताया जा रहा है कि वह छत्तीसगढ़ से यहां आया है। मध्य प्रदेश में हाथियों का प्रबंधन वन विभाग के लिए कैसे चुनौती बना हुआ है।
चर्चा: अब्दुल वसीम अंसारी, ग्राउंड रिपोर्ट

शुक्रिया पल्लव। सबसे पहले मैं ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ की हाल ही में प्रकाशित उस खबर का ज़िक्र करना चाहूंगा, जो मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से सामने आई है। मऊगंज के मलकपुर गांव के पास करंट लगने से एक मादा हाथी की दर्दनाक मौत हो गई है।
दरअसल, पिछले छह महीने से रीवा, सीधी और मऊगंज के अलग-अलग वन क्षेत्रों में हाथियों का एक जोड़ा लगातार घूम रहा था। शुक्रवार की रात यह जोड़ा मलकपुर गांव के पास पहुंचा, जहां बिजली का एक खुला तार मादा हाथी की सूंड में फंस गया और करंट लगने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि हाथियों की आवाजाही को देखते हुए गांवों में पहले से बिजली की कटौती की जा रही थी। खुद रीवा के डीएफओ लोकेश नीरापुरे ने 2 सितंबर को ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ से बातचीत में कहा था कि हाथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके मूवमेंट वाले इलाकों की बिजली काटी जा रही है।
लेकिन इस घटना के बाद अब बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर मलकपुर के पास सुरक्षा के क्या इंतजाम थे। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि वन विभाग और बिजली विभाग के बीच बेहतर समन्वय बनाया जाए, कम ऊंचाई पर लटक रहे तारों को दुरुस्त किया जाए और बचे हुए अकेले नर हाथी की निगरानी के लिए एक विशेष टीम बनाई जाए।
फिलहाल वन विभाग पोस्टमार्टम और वैधानिक जांच के जरिए जिम्मेदारी तय करने में जुटा है।
इसके अलावा, दैनिक भास्कर की हालिया खबरों पर नजर डालें, तो एक और अहम घटना सामने आती है। छत्तीसगढ़ से भटककर आया एक जंगली नर हाथी इन दिनों सतपुड़ा नेशनल पार्क पहुंचा हुआ है। करीब एक सप्ताह तक सांगाखेड़ा के जंगल में रहने के बाद, अब वह पार्क की सीमा के अंदर देनवा नदी के आसपास के जंगल क्षेत्र में विचरण कर रहा है।
वन विभाग की टीमें लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, ताकि वह इंसानी आबादी की तरफ न बढ़े। विभाग के मुताबिक सतपुड़ा और पेंच नेशनल पार्क हाथियों का प्राकृतिक आवास नहीं हैं, इसलिए उम्मीद है कि यह नर हाथी जल्द ही अपने प्राकृतिक आवास की ओर लौट जाएगा। करीब छह साल पहले भी दो हाथी इसी तरह इस नेशनल पार्क की सीमा में आए थे और कुछ समय बाद वापस लौट गए थे।
अगर हम मध्य प्रदेश में हाथियों से जुड़ी पिछली घटनाओं को भी जोड़कर देखें, तो हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में एक साथ 10 हाथियों की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया था। जांच में पता चला कि फंगस से संक्रमित कोदो बाजरे की फसल खाने से उनकी जान गई थी। मैहर क्षेत्र में भी हाथी के हमले में एक व्यक्ति की मौत और घरों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
ये तमाम खबरें साफ इशारा करती हैं कि मध्य प्रदेश में हाथियों का आना तो बढ़ रहा है, लेकिन उनकी सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अभी बहुत ठोस कदम उठाए जाने बाकी हैं। पल्लव, यह थी अब तक की पूरी स्थिति।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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