मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में 13 सितंबर से चल रही दुग्ध किसानों की हड़ताल डिप्टी कलेक्टर निधि भारद्वाज के आश्वासन के बाद 30 सितंबर तक स्थगित कर दी गई है। किसानों ने सहमति जताई है कि 19 सितंबर से दूध की आपूर्ति फिर से सुनिश्चित की जाएगी।
हड़ताल में शामिल किसानों की प्रमुख मांग है कि दूध के फैट का रेट 12 रुपये प्रति यूनिट किया जाए, जिससे गाय के दूध की कीमत 80 रुपये और भैंस के दूध की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर हो सके।
पशु विभाग के आंकड़ों के अनुसार राजगढ़ जिले में कुल 6,52,792 पशु हैं। इनमें 60 प्रतिशत यानी लगभग 3.92 लाख पशु दूध देते हैं। इनसे प्रतिदिन 4.50 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। साँची दुग्ध संघ के कृपाल डुंगरिया ने बताया कि वे प्रतिदिन 70 हजार लीटर दूध प्राप्त करते हैं। 13 से 18 सितंबर तक हड़ताल के दौरान केवल करीब 2 हजार लीटर का अंतर आया।
लाखन सिंह खींची, दुग्ध संगठन के संयोजक, ने कहा कि पिछले छह दिनों से हड़ताल चल रही है, 30 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया जा रहा है। अगर समस्या का हल नहीं निकला तो फिर से हड़ताल की रूपरेखा बनाई जाएगी।
पशु आहार महंगा

देवनारायण दुग्ध संघ के जिला अध्यक्ष प्रेम सिंह राणावत के अनुसार, पशु आहार, चारा और गुड़ की कीमतें बढ़ गई हैं, लेकिन दूध का फैट रेट आज भी लगभग 8 से 9 रुपये ही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लोहारी भैंस का दूध यदि 4 फैट निकलता है तो किसान को महज 30-40 रुपये प्रति लीटर मिलता है, जबकि सांची इसे प्रोसेस कर घी आदि बनाकर 70 रुपये प्रति लीटर बेचती है। किसानों का आरोप है कि यह उनके साथ अन्याय है।
वैकल्पिक मांग के रूप में किसानों ने कहा कि पशु आहार की बोरी 3500 रुपये के बजाय 2000 रुपये में और गुड़ 80 रुपये के बजाय 30 रुपये प्रति किलो उपलब्ध कराया जाए।
उनका तर्क है कि जब सरकार अन्य वस्तुओं के भाव बढ़ा सकती है तो दुग्ध किसानों के रेट क्यों नहीं बढ़ाए जा सकते।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई किसान दूध बेचकर ही अपना और पशुओं का खर्च चलाते हैं। हड़ताल के दौरान वे दूध नहीं बेच रहे हैं, और कई परेशानियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन और पुलिस सहयोग नहीं कर रहे हैं।

हड़ताल के दौरान दूध बेचते हुए पाए जाने वाले अन्य किसान और व्यापारियों के साथ हड़तालियों के द्वारा जबरदस्ती करने के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए थे, जिसमें जो किसान दूध बांटने जा रहे थे उनकी दूध की टंकियों का दूध l हड़ताली किसान के द्वारा पिया जा रहा था।
साथ ही दूध बेचते हुए पकड़े गए व्यापारियों के दूध के पैकेट लूटे जा रहे थे, इन वीडियो को लेकर राणावत कहते है कि, हमने किसानों को पहले ही समझाया था कि, किसी के साथ जबरदस्ती नहीं करना है और ना ही दूध को सड़क पर फैलाना है। हमने केवल दूध बेचते हुए अन्य किसानों और व्यापारियों के पकड़े हुए दूध को अस्पताल, भंडारे और वृद्धाश्रम में पहुंचाया है, ताकि हड़ताल का महत्व बना रहे, किसी के साथ हमने गलत काम नहीं किया।
ज्ञापन

शुक्रवार (18 सितंबर) को पूरे जिले के दुग्ध किसान देवनारायण मंदिर में एकत्रित हुए। बाइक रैली निकालकर उन्होंने विरोध दर्ज कराया और कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर ज्ञापन देने के लिए बैठ गए।
राणावत ने बताया कि हड़ताल 13 सितंबर से जारी है। 15 सितंबर को राजगढ़ जिला मुख्यालय में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांगें रखी गईं।
ज्ञापन लेने आई डिप्टी कलेक्टर निधि भारद्वाज ने किसानों को आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर ने एनडीडीबी (नैशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड) के समक्ष मामला रखा है। दुग्ध संघ के मैनेजरों से भी बैठक की गई है। 30 सितंबर को दुग्ध संघ की बैठक होनी है, जिसमें सांची और अन्य सहकारी समितियां अपने रेट रिवाइज कर सकती हैं।

इससे प्राइवेट डेयरियां भी रेट बढ़ाने के लिए बाध्य होंगी। घर-घर दूध बेचने वाले किसानों के रेट ग्राहक और किसान के बीच का मामला है। शासन की योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
डिप्टी कलेक्टर के आश्वासन के बावजूद कुछ किसान जिद पर अड़े रहे। उन्होंने सवाल किया कि क्या उन्हें अपने दूध के दाम खुद तय करने का हक नहीं है।
किसानों ने 30 सितंबर तक हड़ताल स्थगित कर दी है। 19 सितंबर से दूध आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद है। अब सबकी नजर 30 सितंबर की दुग्ध संघ बैठक पर टिकी है, जिसमें रेट संशोधन की संभावना जताई गई है।
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