...
Skip to content

अंधेरे में केरलम: कम बारिश, ज़्यादा मांग से बिजली संकट गहराया

आप हमारा यह पॉडकास्ट स्पॉटीफाय, एमज़ॉन म्यूज़िक, जियो सावन और एप्पल पॉडकास्ट पर इंवारमेंट डेली के नाम से सर्च कर सुन सकते हैं।
Listen On Spotify
Advertisements

पर्यावरण आज | मुंबई ने अयोग्य घोषित कंपनी को 14 करोड़ का कचरा-बैरियर ठेका दिया। मेघालय में मानसून की रिकॉर्ड 59% कमी से सूखे जैसे हालात बने। अंटार्कटिक ओज़ोन होल औसत से पहले ही असामान्य रूप से बड़ा हो गया। NGT ने मध्य प्रदेश की चंपक झील की वैज्ञानिक सीमा-रेखा तय करने का आदेश दिया। साथ ही आज चर्चा करेंगे केरलम में कम बारिश, बढ़ी मांग और पुराने बिजली समझौते के खत्म होने से गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है।

आज की प्रमुख हेडलाइन्स

मुंबई का कचरा-रोधी बैरियर ठेका

मुंबई नगर निकाय ने कचरा रोकने वाले बैरियर (ट्रैश बूम) का 14 करोड़ रुपये का ठेका उस कंपनी को दे दिया है, जिसे पहले गाद निकालने (डिसिल्टिंग) के काम में अयोग्य घोषित किया जा चुका है। ट्रैश बूम प्लास्टिक या धातु जैसी मज़बूत सामग्री से बने तैरते हुए बैरियर होते हैं, जिन्हें पानी में एक स्थान पर बांधकर रखा जाता है ताकि नालों और नहरों से बहकर आने वाला कचरा उनमें फंस सके।


मेघालय में रिकॉर्ड मानसून घाटा

दुनिया की सबसे अधिक बारिश वाली जगहों में गिने जाने वाले मेघालय में 2026 में मानसून की बारिश में अब तक की सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई है। यहाँ बारिश में 59% की कमी आई है, और राज्य के 11 में से 10 ज़िले “बारिश की कमी” या “बहुत अधिक कमी” वाली श्रेणी में आ गए हैं। सूखे जैसी यह उभरती स्थिति खेती, जल-सुरक्षा और झरनों पर निर्भर पेयजल आपूर्ति के लिए खतरा बन रही है, जिससे मानसूनी बारिश में गिरावट और जलवायु दबाव जैसे लंबे समय से चले आ रहे रुझान और गंभीर होते जा रहे हैं।

Advertisements

ओज़ोन होल असामान्य रूप से बड़ा हुआ

कोपरनिकस की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में अंटार्कटिक ओज़ोन होल औसत से पहले ही 15 मिलियन वर्ग किलोमीटर से बड़ा हो गया था, और सितंबर के मध्य तक यह लगभग 25 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक फैल चुका है — जो मौसमी औसत से करीब 5 मिलियन वर्ग किलोमीटर अधिक है। इसके तेज़ विस्तार के पीछे स्ट्रैटोस्फीयर का असामान्य रूप से ठंडा तापमान और ध्रुवीय बादल ज़िम्मेदार हैं, हालांकि अन्य संकेतक अब भी ऐतिहासिक औसत के आसपास हैं, जो ओज़ोन परत के ठीक होने की जटिल प्रक्रिया को दर्शाता है।


चंपक झील की सीमा तय करने का निर्देश

NGT ने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम ज़िले की वेटलैंड संरक्षण समिति को निर्देश दिया है कि वह पंचमढ़ी स्थित चंपक झील की सीमाएँ वैज्ञानिक तरीके से तय करे। इस सीमांकन में झील के मूल क्षेत्र, जल-फैलाव क्षेत्र, कैचमेंट एरिया और बफ़र ज़ोन को शामिल किया जाना चाहिए, और सटीक पहचान व मैपिंग के लिए ड्रोन सर्वे सहित जियो-टैगिंग का उपयोग किया जाना चाहिए। यह निर्देश उस याचिका के जवाब में आया है जिसमें चंपक झील को वेटलैंड घोषित करने की मांग की गई थी।


आज की चर्चा

केरल में बिजली संकट

वाहिद भट, ग्राउंड रिपोर्ट

Advertisements
Water and electricity charges increased in Madhya Pradesh

केरल पिछले दो हफ्तों से शाम और रात में 15-30 मिनट की बिजली कटौती झेल रहा है, जिससे घरों, अस्पतालों और वृद्धाश्रमों में परेशानी बढ़ गई है। राज्य अपनी ज़रूरत की केवल 20% बिजली खुद पैदा करता है — इस महीने खपत 94.08 मिलियन यूनिट रही जबकि उत्पादन सिर्फ 23.06 मिलियन यूनिट, यानी करीब 71 मिलियन यूनिट बाहर से खरीदनी पड़ी। संकट की एक बड़ी वजह कम बारिश है: 1 जून से 16 सितंबर तक बारिश में 27% की कमी आई, जिससे बांधों और जलाशयों का जलस्तर घटा और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ।

दूसरी ओर गर्मी के कारण मांग बढ़ी है — सितंबर में पीक डिमांड 4,900-5,100 मेगावाट तक पहुंच गई, जो पिछले साल से 15% अधिक है; इसके पीछे AC, कूलर, EV चार्जिंग और इंडक्शन चूल्हों का बढ़ता इस्तेमाल बताया जा रहा है। मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है — वर्तमान सरकार पिछली सरकार के 465 मेगावाट के 25-वर्षीय समझौते के खत्म होने को ज़िम्मेदार ठहरा रही है, जिसे पिनराई विजयन ने खारिज किया है। सरकार अन्य राज्यों से बातचीत कर रही है और 1 अक्टूबर से नई आपूर्ति नीति लाने की बात कह रही है।


ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

ग्राउंड रिपोर्ट का डेली इंवायरमेंट न्यूज़ पॉडकास्ट ‘पर्यावरण आज’ Spotify, Amazon Music, Jio Saavn, Apple Podcast, पर फॉलो कीजिए।

Author

Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

Connect With Us

Send your feedback at greport2018@gmail.com

Newsletter

Subscribe our weekly free newsletter on Substack to get tailored content directly to your inbox.

When you pay, you ensure that we are able to produce on-ground underreported environmental stories and keep them free-to-read for those who can’t pay. In exchange, you get exclusive benefits.

Your support amplifies voices too often overlooked, thank you for being part of the movement.

EXPLORE MORE

LATEST

mORE GROUND REPORTS

Environment stories from the margins