पर्यावरण आज | सितंबर के आखिर में बारिश की संभावना, अहमदाबाद के कार्बन न्यूट्रल परिवार, बिजली गिरने और सेप्टिक टैंक हादसों में मौतें, प्रवासी पक्षियों की घटती संख्या पर नई रिपोर्ट, ओडिशा में मिले बीमार ओरंगुटान, मध्य प्रदेश में मूंग खरीद फ़र्ज़ीवाड़ा। आज की चर्चा अगस्त में बढ़ी महंगाई दर जैसी अहम खबरें शामिल हैं।
आज की हेडलाईन्स
1. मॉनसून/बारिश
मॉनसून लगभग खत्म होने वाला है, लेकिन सितंबर के आखिर में देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 24 से 28 सितंबर के बीच बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र विकसित होकर डिप्रेशन का रूप ले सकता है। यह सिस्टम पूर्वी तट से होते हुए मध्य भारत की ओर रुख करेगा, जिससे पूर्वी और मध्य भारत के बड़े हिस्से में बारिश हो सकती है।
2. कार्बन न्यूट्रल परिवार
अहमदाबाद में ‘ट्री वॉक’ संस्था से जुड़े परिवार खुद की जीवनशैली को कार्बन न्यूट्रल बना रहे हैं। अब तक 750 परिवार इससे जुड़ चुके हैं। ये परिवार पहले अपने कार्बन उत्सर्जन की गणना करते हैं, फिर उतने ही कार्बन को सोखने वाले प्राकृतिक विकल्प अपनाकर संतुलन बनाते हैं। इसके लिए हर हफ्ते सत्र आयोजित होते हैं, जहां इन परिवारों को कार्बन न्यूट्रल होने के तरीके सिखाए जाते हैं।
3. बिजली गिरने और हादसे
बिजली गिरने से यूपी के बलिया जिले में दो युवकों की मौत हो गई और एक घायल हो गया। ये लोग बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे खड़े थे, तभी बिजली गिरने की घटना हुई। वहीं बिहार में दो मज़दूरों की नए बने सेप्टिक टैंक में उतरने के दौरान दम घुटने से मौत होने की खबर है।
4. प्रवासी पक्षी रिपोर्ट
प्रवासी पक्षियों की 45 प्रतिशत प्रजातियों की संख्या घट रही है। ‘बर्डलाइफ़ इंटरनेशनल’ की ‘स्टेट ऑफ़ द वर्ल्ड्स बर्ड्स’ रिपोर्ट के अनुसार, जो 11 सितंबर 2026 को ‘नेचर केन्या’ के सहयोग से आयोजित ‘ग्लोबल फ्लाईवेज़ समिट’ में जारी हुई, हर नौ में से एक प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा है। ‘स्लेंडर-बिल्ड कर्ल्यू’ का विलुप्त होना—जिसे आखिरी बार फरवरी 1995 में मोरक्को के एक लैगून में देखा गया था—हाल की सदियों में मुख्य भूमि यूरेशिया और अफ्रीका में पक्षियों के विलुप्त होने की पहली वैश्विक घटना है। इसके अलावा, पिछले 150 वर्षों में छह अन्य प्रवासी प्रजातियों के भी विलुप्त होने की पुष्टि हुई है या ऐसी आशंका जताई गई है।
5. ओरंगुटान
ओडिशा के जंगल में मिले 5 ओरंगुटान में से एक का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, नंदनकानन ज़ू अथॉरिटी उसकी सेहत सुधारने पर फोकस कर रही है। बाकी के 4 ओरंगुटान स्वस्थ हैं।
6. मूंग खरीद फ़र्ज़ीवाड़ा
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक, मध्य प्रदेश के रायसेन ज़िले के दूर-दराज़ इलाकों में कुछ किसानों को कथित तौर पर यह पता चला कि उन्होंने सरकार को मूंग बेची है, जबकि उन्होंने न तो कभी इसकी खेती की, न इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया और न ही इसे किसी खरीद केंद्र पर ले गए। उनकी ज़मीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल करके खरीद के लिए रजिस्ट्रेशन कर दिया गया, जिसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
आज की चर्चा
देश में बढ़ी खुदरा महंगाई
देश की खुदरा महंगाई दर अगस्त में बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जो जुलाई में 4.45 फीसदी थी। यह पिछले नवंबर से अब तक सात गुना बढ़ चुकी है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में सभी ज़रूरी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से महंगाई चरम पर पहुंच गई है।
अब्दुल वसीम अंसारी, ग्राउंड रिपोर्ट

भोपाल के बाज़ार में खाद्य पदार्थ खरीदते लोग | फोटो: ग्राउंड रिपोर्ट
अखबारों में हेडलाइन छपी है—”बजट बिगड़ा… रिटेल महंगाई बढ़कर 4.82% हुई; गांवों में दाम शहरों से ज्यादा।”
पल्लव: महंगाई की मार एक बार फिर आम जनता पर पड़ी है। अगस्त महीने में देश की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation Rate) बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई है, जो जुलाई में 4.45% थी। हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले साल नवंबर से लेकर अब तक यह दर लगभग 7 गुना बढ़ चुकी है! इसका सीधा-सा मतलब है कि सब्जी, किराना और रोज़मर्रा की ज़रूरत का हर सामान इस महीने तेज़ी से महंगा हुआ है।
इस रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आमतौर पर हम सोचते हैं कि शहरों में रहना महंगा है, लेकिन इस बार ग्रामीण इलाकों (गांवों) में महंगाई शहरों से भी ज्यादा दर्ज की गई है। अगस्त में ग्रामीण इलाकों में रिटेल महंगाई 5.23% रही, जबकि शहरी इलाकों में यह आंकड़ा 3.96% था। यानी गांवों में रहने वालों पर इस वक्त महंगाई का बोझ ज्यादा है।
सिर्फ खुदरा महंगाई ही नहीं, थोक महंगाई (Wholesale Inflation) भी अगस्त में बढ़कर 9.92% हो गई है, जो पिछले 6 महीनों से लगातार 9% से ऊपर बनी हुई है। सितंबर 2022 के बाद पहली बार यह लगातार 10% के करीब पहुंची है। थोक महंगाई बढ़ने का मतलब है कि फैक्ट्रियों में सामान बनाने की लागत बढ़ रही है, जिससे आगे चलकर चीज़ें और महंगी हो सकती हैं।
पल्लव: अब बात करते हैं उस जगह की, जहां इस महंगाई का सबसे सीधा असर दिखता है—यानी हमारी रसोई! भास्कर की इस रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक साल में प्याज औसतन 48% तक महंगा हो गया है। अगस्त 2025 में जो प्याज करीब 36 रुपये किलो था, वो अगस्त 2026 में 53.65 रुपये किलो पर पहुंच गया। इसी तरह लहसुन लगभग 43% महंगा हुआ है, और अदरक में तो सीधे 73.82% का भारी उछाल आया है। इसके अलावा अरहर दाल, उड़द दाल, चीनी और चावल के दामों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।
रसोई के अलावा, ज़रूरत की दूसरी चीज़ें और सेवाएं भी महंगी हुई हैं। गेहूं पिसाई, बीयर, सिगरेट, शर्ट, चप्पल, घर का किराया और यहां तक कि पानी का बिल भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ गया है।
राज्यों की बात करें तो अगस्त में सबसे ज्यादा महंगाई तेलंगाना में (6.27%) रही, उसके बाद तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश का नंबर आता है।
पल्लव: अब सवाल उठता है कि अचानक यह महंगाई इतनी क्यों बढ़ रही है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) के दामों में आई तेजी है। पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव और यमन में हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण कच्चा तेल 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी ज़रूरत का ज्यादातर तेल बाहर से खरीदता है, इसलिए तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग की लागत बढ़ जाती है, जिससे हर चीज़ महंगी होने लगती है।
तो आगे क्या होने वाला है? भास्कर एक्सपर्ट्स और अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा का मानना है कि इस महंगाई को काबू में करने के लिए RBI (रिज़र्व बैंक) आने वाले समय में ब्याज दरें (Interest Rates) बढ़ा सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो आपके लोन की EMI भी महंगी हो सकती है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों के कारण भारतीय रुपया और कमज़ोर होने की आशंका है, जिससे आयातित (Imported) सामान और महंगा हो सकता है।
महंगाई और ऊंची ब्याज दरों की वजह से लोगों की खरीदारी करने की क्षमता घटेगी, जिससे कार, घर और गैजेट्स जैसी चीज़ों की मांग पर असर पड़ सकता है। सरकार के सामने इस वक्त टैक्स में राहत देने, सब्सिडी और वित्तीय बजट को संतुलित रखने की बहुत बड़ी चुनौती है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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