पर्यावरण आज | BRICS देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने में सिर्फ उत्सर्जन घटाने पर नहीं, बल्कि क्लीन टेक्नोलॉजी के उत्पादन और उसके फायदे पर भी जोर दिया है। नई दिल्ली घोषणा में फोटोवोल्टिक उद्योग की कार्ययोजना, हाइड्रोजन, स्मार्ट ग्रिड और ऊर्जा भंडारण को शामिल किया गया। आज की चर्चा में जानेंगे ब्रिक्स देशों के शिखर सम्मेलन में क्या कुछ हुआ।
आज की प्रमुख हेडलाइन्स
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों को चेताया कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को हथियार बनाने की प्रवृत्ति साझा प्रगति और समृद्धि में बाधा बन सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि बढ़ते युद्ध, महामारी, आपदाएं और सप्लाई चेन में रुकावटें किसी एक देश तक सीमित नहीं रहतीं, इसलिए ब्रिक्स को इन चुनौतियों के लिए पहले से तैयार रहना होगा। ब्रिक्स ग्यारह प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों का एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसका 18वां शिखर सम्मेलन रविवार को दिल्ली में संपन्न हुआ।
केदारनाथ यात्रा रुकी
लगातार बारिश के बीच चीरबासा हैलीपेड के पास मलबा और पत्थर गिरने से केदारनाथ यात्रा का पैदल मार्ग बंद हो गया, जिसके चलते रविवार को यात्रा रोक दी गई। श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग, गौरीकुंड और जंगलचट्टी में रोका गया है।
चीता प्रोजेक्ट फेज़ 2
दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते अक्तूबर से दिसंबर के बीच कूनो नेशनल पार्क लाए जाएंगे। वन विभाग के मुताबिक अगले एक महीने में तारीख तय होने के बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय इसकी घोषणा करेगा। कूनो में चीतों की संख्या बढ़ने और इनब्रीडिंग की आशंका को देखते हुए फेज़-2 का मास्टरप्लान तैयार किया गया है, जिसके तहत भारत में जन्मे 18 चीतों को गुजरात की बन्नी सेंचुरी, मंदसौर की गांधी सागर सेंचुरी और रानी दुर्गावती टाइगर रिज़र्व भेजा जाएगा। भारत में इस समय 48 चीते हैं, जिनमें 19 अफ्रीकी मूल के और 29 भारत में जन्मे हैं।
कर्नाटक से एमपी आएंगे हाथी
टाइगर रिज़र्व के कोर एरिया में गश्त बढ़ाने और रेस्क्यू अभियानों के लिए कर्नाटक से 3 प्रशिक्षित हाथी मध्य प्रदेश लाए जाएंगे। पर्यावरण मंत्रालय ने राज्य को कर्नाटक से 14 हाथी लाने की अनुमति दी थी, जिसके तहत अब तक 11 हाथी लाए जा चुके हैं। अब बचे हुए 3 हाथियों को लाने की कवायद की जा रही है।
दीपके पहुंचे बलाघाट
कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके बालाघाट पहुंचे, जहां उन्होंने उन गांवों का दौरा किया जहां आदिवासी बच्चों की मौत हो रही है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को दिए गए 4 लाख रुपये के मुआवजे पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर ये बच्चे मंत्रियों के होते तो क्या यह मुआवज़ा पर्याप्त होता। उन्होंने अस्पताल, शिक्षा और पानी की उपलब्धता की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
इंडोनेशिया में यात्री नाव डूबी
जावा सागर में इंडोनेशियाई यात्री फेरी पलट गई। इस हादसे में छह लोगों की मौत हो गई है, 107 लोगों को बचाया गया है और 130 लोग अभी भी लापता हैं। यह फेरी सुराबाया से दक्षिण कालीमंतन के शहर बंजारमासिन जा रही थी। घटनास्थल पर जहाज़ और एक हेलीकॉप्टर भेजे गए हैं, और 280 कर्मी खोज और बचाव अभियान में जुटे हैं।
आज की चर्चा
BRICS सम्मेलन में क्या कुछ हुआ?

नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स सम्मेलन का समापन हो गया। आखिरी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर सख्त रुख अपनाया। यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि क्रिटिकल मिनरल्स के निर्यात को लेकर चीन की सख्त नीति और उन्नत तकनीक साझा करने में उसकी अनिच्छा लगातार बढ़ती जा रही है।
चंद्र प्रताप तिवारी, ग्राउंड रिपोर्ट
BRICS देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सिर्फ उत्सर्जन कम करने की बात नहीं की है, बल्कि अब उनका जोर इस बात पर भी है कि भविष्य की साफ-सुथरी तकनीक कौन बनाएगा, उसका उत्पादन कहां होगा और उसका फायदा किसे मिलेगा।
नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में जारी घोषणा में क्लीन टेक्नोलॉजी, ऊर्जा सुरक्षा और ग्रीन वैल्यू चेन पर खास जोर दिया गया है।
BRICS देशों ने एक ऐसी ऊर्जा व्यवस्था की बात की है जो न्यायपूर्ण, व्यवस्थित और सभी को साथ लेकर आगे बढ़े। हालांकि इस घोषणा में जीवाश्म ईंधनों को पूरी तरह खत्म करने की बात नहीं है, और इसकी एक वजह इन देशों की बढ़ती ऊर्जा जरूरतें और ऊर्जा सुरक्षा की चिंता है।
इसके बावजूद BRICS देशों के लिए साफ ऊर्जा का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी तकनीकों को अपनाने में इन देशों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट यानी CSE के मुताबिक, BRICS देश दुनिया की आधे से ज्यादा सौर ऊर्जा पैदा कर रहे हैं।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कितनी नवीकरणीय ऊर्जा पैदा की जाए, बल्कि यह भी है कि सोलर पैनल, बैटरी, हाइड्रोजन और दूसरी क्लीन टेक्नोलॉजी का निर्माण कौन करेगा।
इसीलिए नई दिल्ली घोषणा में BRICS के फोटोवोल्टिक उद्योग के लिए एक कार्ययोजना अपनाई गई है। कम उत्सर्जन वाले हाइड्रोजन पर भी काम शुरू करने की बात कही गई है, और इसके अलावा स्मार्ट ग्रिड व ऊर्जा भंडारण के लिए भी साझा सिद्धांत तय किए गए हैं।
इसका एक बड़ा पहलू है ग्लोबल वैल्यू चेन। आसान भाषा में समझें तो BRICS देश सिर्फ कच्चा माल उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहना चाहते; वे चाहते हैं कि क्लीन टेक्नोलॉजी के ज्यादा मूल्य वाले हिस्सों, जैसे निर्माण और तकनीकी उत्पादन, में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़े।
घोषणा में विकसित देशों द्वारा लगाए जाने वाले कुछ जलवायु-आधारित व्यापार उपायों, जैसे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म, पर भी आपत्ति जताई गई है। BRICS का कहना है कि ऐसे कदम विकासशील देशों के लिए व्यापार में असमानता बढ़ा सकते हैं।
CSE के मुताबिक, इस पूरे रुख को सिर्फ जलवायु लक्ष्य के तौर पर नहीं देखना चाहिए; यह आने वाले समय की ग्रीन इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश भी है, क्योंकि ऊर्जा परिवर्तन की रफ्तार इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सौर पैनल, बैटरी, हाइड्रोजन और जरूरी खनिजों जैसी तकनीकों और संसाधनों पर किसका नियंत्रण है।
यानी BRICS की इस घोषणा का बड़ा संदेश यह है कि ऊर्जा का भविष्य सिर्फ तेल और गैस से दूर जाने का सवाल नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी सवाल है कि साफ ऊर्जा की नई अर्थव्यवस्था में कौन उत्पादन करेगा, कौन कमाएगा और कौन पीछे रह जाएगा।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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