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बांधों वाले राजगढ़ में हवा में बिछा है पानी के पाईपों का जाल

राजगढ़ में कुंडालिया और मोहनपुरा बांध बनने के बावजूद गांव-गांव पानी को तरस रहे हैं। देखिए ग्राउंड रिपोर्ट, आखिर पानी कहां अटका है।
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मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में साल 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बड़े बांधों, कुंडालिया और मोहनपुरा के निर्माण को मंजूरी दी। 2019 तक दोनों बांध बनकर तैयार हो गए और जो जिला कभी अपनी सूखे के लिए जाना जाता था वहां प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध हो गया।

सरकार का दावा है कि इन बांधों से करीब 2 लाख 90 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन सिंचित हो रही है, 1100 से ज़्यादा गांवों तक पानी पहुंचा है और पांच लाख किसानों को इसका फायदा मिला है। नहरों का जाल बिछा, खेतों तक प्रेशर पाइपलाइनें पहुंचीं और गांवों में नल-जल योजना के कनेक्शन भी लगे। बांधों ने बंजर ज़मीन को सच में आबाद कर दिया। लेकिन इसी राजगढ़ की सड़कों पर घूमने पर एक दूसरी सच्चाई सामने आती है। यह तस्वीरें 2019 से पहले की नहीं, बल्कि आज की हैं। भरी गर्मी में जून के महीने में मोहनपुरा बांध पानी से लबालब भरा दिखता है, लेकिन आसपास के गांवों में घरों के नल सूखे पड़े हैं। बांधों से निकली नहरें भी सूखी हैं, और किसान महीनों से इंतज़ार में हैं कि कब पानी आएगा।

ग्राउंड रिपोर्ट की टीम ने राजगढ़ जिले के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी हकीकत का जायजा लिया, जहां पानी जुटाने के लिए स्थानीय स्तर पर किया जा रहा संघर्ष साफ नजर आता है।

भोजपुर गांव में हवा में बिछा पाईपों का जाल

भोजपुर गांव में लोग हवा में पाईप लाईन बिछाकर अपने घरों तक पानी लेकर आए हैं | फोटो:अब्दुल वसीम अंसारी
भोजपुर गांव में लोग हवा में पाईप लाईन बिछाकर अपने घरों तक पानी लेकर आए हैं | फोटो:अब्दुल वसीम अंसारी

राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले भोजपुर गांव में, जो कि राजस्थान की सीमा के नजदीक स्थित है, प्रवेश करते ही एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है। यहां घरों की छतों और गलियों से होकर गुजरने वाले प्लास्टिक के पाइपों का एक बड़ा जाल बिछा हुआ है।

हैरानी की बात यह है कि हवा में लटके इन निजी पाइपों में कई जगह बड़े छेद (लीकेज) हैं, जिससे पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, ये पाइप उन्होंने अपनी निजी व्यवस्था और खर्च के तहत खरीदे हैं ताकि खेतों और निजी कुओं से घरों तक पानी पहुंचाया जा सके। स्थानीय निवासियों का कहना है कि घरों के आगे सरकारी नल तो स्थापित कर दिए गए हैं, लेकिन उनमें जरूरत के मुताबिक पानी की आपूर्ति अभी तक सुचारू नहीं हो सकी है।

इसके अलावा, तकनीकी स्तर पर एक बड़ी खामी यह सामने आई है कि जल निगम द्वारा बनाई गई पानी की टंकी गांव के काफी ऊपरी हिस्से पर स्थित है। ग्रामीणों के अनुसार, इस टंकी को भरने में ही लगभग 6 से 7 घंटे का समय लग जाता है। इस विषय पर ग्राम पंचायत के सरपंच का कहना है कि उन्होंने संबंधित विभाग को टंकी के बजाय सीधे बायपास कनेक्शन देने का सुझाव दिया है, ताकि ग्रामीणों को सीधे नलों से पानी मिल सके, लेकिन इस पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है।

दोलाज़ और ढाबला: हैंडपंप और नदी का सहारा

नल कनेक्शन होने के बावजूद लोग दूसरे घरों में लगे बोरवेल से पानी भरने को मजबूर हैं | फोटो अब्दुल वसीम अंसारी
नल कनेक्शन होने के बावजूद लोग दूसरे घरों में लगे बोरवेल से पानी भरने को मजबूर हैं | फोटो:अब्दुल वसीम अंसारी

पानी का यह संकट केवल भोजपुर तक सीमित नहीं है। दोलाज़ गांव में धरातल पर वैसी ही स्थिति है। यहां महिलाएं आज भी गांव के मुहाने पर स्थित एकमात्र हैंडपंप पर कड़ी मेहनत और मशक्कत करके पानी भरती हुई नजर आती हैं, क्योंकि उनके घरों में लगे नलों से जल आपूर्ति सुचारू नहीं है।

वहीं ढाबला गांव में, जो नदी के ऊपरी हिस्से पर बसा है, ग्रामीणों ने अपनी व्यवस्था सीधे नदी के भीतर पाइपलाइनें बिछाकर की है। इसी पानी से उनके खेतों और मवेशियों के लिए इंतजाम होता है और जरूरत पड़ने पर ग्रामीण कुओं के साथ-साथ इसी नदी का पानी पीने को भी मजबूर हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के इतर, जिले का सबसे बड़ा व्यावसायिक केंद्र ब्यावरा भी इस समय भीषण जल संकट के दौर से गुजर रहा है। चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी के बीच शहर की पक्की सड़कों पर छोटे-छोटे बच्चे और महिलाएं पानी की भारी-भारी कैन और बर्तनों को ढोते और घसीटते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं।

निष्कर्ष

इस पूरी ग्राउंड रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण और विरोधाभासी पहलू राजगढ़ का मोहनपुरा डैम है। इस भीषण गर्मी के मौसम में भी मोहनपुरा डैम में पानी की कोई कमी नहीं है और इसका जलस्तर पर्याप्त बना हुआ है। डैम पानी से लबालब भरा हुआ है।

तथ्य यही इशारा करते हैं कि मुख्य स्रोत पर पानी भरपूर मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन वितरण प्रणाली, प्रशासनिक तालमेल या तकनीकी मैनेजमेंट की कमी के कारण यह पानी उन नलों तक नहीं पहुंच पा रहा है जो गांवों और शहरों में लगाए गए हैं। स्रोत पर पानी होने के बावजूद, धरातल पर उपभोक्ताओं तक उसकी सुचारू पहुंच होना अभी बाकी है। जल जीवन मिशन के असल लक्ष्यों की पूर्ण प्राप्ति का इंतजार आज भी राजगढ़ की जनता कर रही है।

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Author

  • Abdul Wasim Ansari is an independent journalist based in Rajgarh, Madhya Pradesh, bringing nearly a decade of experience in journalism since 2014. His work focuses on reporting from the grassroots level in the region.

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