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यूनियन बजट 2026 में कृषि क्षेत्र के लिए क्या-क्या है?

Agriculture Budget 2026

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को संसद में भारत सरकार का आगामी वित्तवर्ष के लिए बजट पेश किया। लगातार 9वां बजट पेश करने वाली वो पहली वित्तमंत्री बन गईं। उन्होंने साल 2026-27 के लिए भारत सरकार की अनुमानित कमाई और खर्च का स्टेटमेंट पेश किया।

सीतारमण ने कहा कि हम दुनिया की सबसे बड़ी इकोनॉमी बनने की तरफ बढ़ रहे हैं। हमने तय किया है कि ग्रोथ के नतीजे किसानों, आदिवासियों, महिलाओं और युवाओं तक पहुंचें।

तमाम जोड़-घटाव के बीच आइए जानते हैं कि इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए क्या-क्या घोषणाएं की गईं हैं?

India develops 691 new crop varieties for climate and nutrition
इस बजट में ख़ास तौर पर उत्तर भारत के किसानों के लिए कोई घोषणा नहीं की गई। फ़ोटो: ग्राउंड रिपोर्ट

प्रमुख घोषणाएं

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए नारियल, चंदन, कोको और काजू जैसी खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

केंद्र सरकार मछलीपालन के लिए कोस्टल एरिया में 500 जलाशयों और अमृत सरोवरों की योजना बना रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि 30 मिलियन लोग अपनी रोज़ी-रोटी के लिए नारियल पर निर्भर हैं। उन्होंने नारियल प्रमोशन स्कीम की घोषणा की।

नारियल प्रमोशन स्कीम से उत्पादन और उत्पादकता बढ़ेगी। इस योजना में मुख्य नारियल उगाने वाले राज्यों में कम उत्पादकता वाले पेड़ों की जगह नई किस्म के पौधे लगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा।

आम बजट में निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए काजू और कोको के लिए डेडिकेटेड कार्यक्रम का प्रस्ताव दिया गया। 2030 तक भारतीय काजू और भारतीय कोको को प्रीमियम ग्लोबल ब्रांड बनाने का लक्ष्य।

चंदन के लिए, केंद्र राज्यों के साथ साझेदारी करेगा ताकि फोकस्ड खेती को बढ़ावा दिया जा सके और कटाई के बाद पुराने, कम पैदावार वाले बागों को फिर से ज़िंदा किया जा सके।

सरकार भारत विस्तार नाम के एक बहुभाषी एआई टूल का विकास करेगी। इससे एग्री स्टैक और ICAR पोर्टल को जोड़ा जाएगा। इसके लिए 150 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

वित्तमंत्री ने लाइवस्टॉक सेक्टर को बढ़ाने, इनका आधुनिकीकरण करने और डेयरी, मत्स्य और लाइवस्टॉक इंटीग्रेटेड वैल्यू चेन बनाने को बढ़ाने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम की घोषणा की।

पशु चिकित्सा पेशेवरों की संख्या बढ़ाने पर जोर होगा साथ ही निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा को बढ़ावा देने वालों को सरकार सब्सिडी के ज़रिए सहायता करेगी।

farmer protest in sheopur
आगामी वित्त वर्ष के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट ₹1,30,561.38 करोड़ रखा गया है। फ़ोटो: ग्राउंड रिपोर्ट

तमाम विभागों का कितना-कितना बजट?

कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्रों के संदर्भ में बजट को समझने के लिए हम प्रमुख रूप से चार विभागों के अंतर्गत आवंटित बजट को देखते हैं। इन चार विभागों में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, मत्स्य पालन डेयरी एवं पशुपालन विभाग शामिल हैं।  

किसान कल्याण और शिक्षा

आगामी वित्त वर्ष के लिए  कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट ₹1,30,561.38 करोड़ रखा गया है। यह चालू वित्तवर्ष के लिए आवंटित बजट से अधिक है। 

इस विभाग के अंतर्गत संचालित कृषि उन्नति योजना का बजट ₹8,000.00 करोड़ से बढ़ाकर ₹11,200.00 करोड़ कर दिया गया है। इसी तरह प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जारी राष्ट्रिय मिशन के अंतर्गत भी ₹616.01 करोड़ से बढ़ाकर ₹750.00 करोड़ का प्रावधान किया गया है। 

मगर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए बजट में मामूली कटौती भी की गई है। इसका बजट ₹12,242.27 करोड़ से घटकर ₹12,200.00 करोड़ कर दिया गया है। वहीं किसान उत्पादक संगठनों के बजट में भी 84 करोड़ की कटौती करते हुए आगामी वित्त वर्ष के लिए 500 करोड़ रूपए का ही प्रावधान किया गया है। 

इसके उलट कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग का बजट घटकर ₹9,967.40 करोड़ हो गया है। हालांकि केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों (₹821.27 करोड़) और कृषि विज्ञान केंद्रों (₹210.00 करोड़) के बजट में वृद्धि की गई है। लेकिन कृषि शिक्षा (₹514.87 करोड़) और बागवानी विज्ञान (₹220 करोड़) का बजट घटा दिया गया है। 

पशुपालन और डेयरी विभाग का बजट बढ़कर ₹6,153.46 करोड़ हो गया है। फ़ोटो: ग्राउंड रिपोर्ट

जानवरों और मछलियों के लिए बजट

मत्स्य पालन विभाग का कुल बजट 2025-26 के ₹2,703.67 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में ₹2,761.80 करोड़ हो गया है। इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (₹2,465.00 करोड़), मत्स्य पालन संस्थान (₹152.95 करोड़) और तटीय एक्वाकल्चर प्राधिकरण यानि सीएए (₹7.25 करोड़) का बजट बढ़ा है। जबकि राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड का बजट घटाकर ₹14.55 करोड़ कर दिया गया है। 

इसी तरह पशुपालन और डेयरी विभाग का बजट बढ़कर ₹6,153.46 करोड़ हो गया है। इसमें सबसे ज्यादा वृद्धि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत की गई है। इसके लिए केंद्रीय आवंटन ₹0.01 करोड़ (सांकेतिक) से बढ़ाकर ₹800.00 करोड़ किया गया है। वहीं पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण के लिए ₹2,010.00 करोड़ और डेयरी विकास के लिए ₹1,055.00 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

मगर पशु स्वास्थ्य संस्थानों के लिए बजट ₹100.00 करोड़ से घटकर ₹74.43 करोड़ रह गया है। जबकि नस्ल सुधार संस्थान का आवंटन ₹50.00 करोड़ से घटाकर ₹38.00 करोड़ कर दिया गया है। 

ध्यान देने वाली बात ये है कि पिछले साल मखाना बोर्ड का गठन करके उसके लिए 100 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया था। इस साल इस बोर्ड के लिए कोई भी अलग से प्रावधान नहीं है। यही हाल दालों के लिए लॉन्च किए गए मिशन का भी है जहां 2025-26 में 1000 करोड़ रूपए आवंटित किए गए थे। यह मिशन भी अलग से बजट पाने में नाकाम रहा। कॉटन टेक्नोलॉजी मिशन और नेशनल मिशन ऑन हाइब्रिड सीड्स का भी यही हाल हुआ। 

paddy crop in mandi for sale
किसान नेताओं ने बजट पर निराशा ज़ाहिर करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। फ़ोटो: ग्राउंड रिपोर्ट

बजट पर विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

भारतीय किसान संघ (चदुनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरमान सिंह चढुनी इस बजट के प्रति निराशा प्रकट करते हैं। वह कहते हैं कि इस बजट में किसानों की आमदनी बढ़ाने, फसलों की लागत कम करने और पानी-बिजली की सुविधा देने के लिए कोई भी बात नहीं कही गई है।     

वह पंजाब में हाल में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहते हैं, “सरकार को बीते साल से सबक लेते हुए फसलों को बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए कोई योजना या प्लान लाना चाहिए था.” उनके अनुसार अगर गांवों की बरसाती नदियों को गहरा कर उसके किनारे पक्के किए जाने के लिए कोई काम किया जाए तो फसलों और गांवों को डूबने से भी बचाया जा सकेगा और भूजल स्तर को भी बढ़ाया जा सकेगा।       

वह कहते हैं कि फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए बिजली और पानी की सुविधाओं को दुरुस्त करना होगा तभी लागत कम होगी और किसान की आमदनी बढ़ सकेगी। उनके अनुसार कृषि की उत्पादकता बढ़ाना और भूजल को बचाना दोनों एक साथ किया जाना चाहिए ताकि आम लोगों को भी जल का संकट पैदा न हो। 

वहीं भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रिय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक कहते हैं, “किसानों के ऊपर क़र्ज़ का बोझ बढ़ रहा है। इसका एक कारण फसल की बढ़ती लागत एवं घटते दाम और दूसरा कारण प्राकृतिक आपदाओं से होने वाला नुकसान है।” वह कहते हैं कि सरकार ने किसानों के लोन को सस्ता करने का कोई उपाए नहीं किया ना ही क्लाइमेट रेजिस्टेंट पर कोई बात कही है। वह कहते हैं कि सरकार के पास अब तक जलवायु परिवर्तन से किसानों को बचाने का कोई रोड मैप नहीं है जबकि पिछले साल मराठवाड़ा और पंजाब में किसान इसका खामियाज़ा बड़े स्तर पर उठा चुके हैं। 

MP Forests Face One Health Crisis as Cattle, Wildlife Meet
आर्थिक सर्वेक्षण में चारा की कमी पर चिंता जताई गई थी। फ़ोटो: ग्राउंड रिपोर्ट

वह पशुपालन क्षेत्र के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम को भी बहुत आशा की नज़र से नहीं देखते। वह कहते हैं, “देश में जब तक चारा सस्ता नहीं होगा तब तक पशुपालन आसन नहीं होगा। बजट में चारा सस्ता करने की कोई बात ही नहीं हुई।” मलिक संविदा पर काम कर रहे पशु चिकित्सकों को नियमित करने और सरकारी पशु चिकित्सालयों में और सुविधाएं देने की बात भी कहते हैं। 

गौरतलब है कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025 के अनुसार कुल कृषि क्षेत्र में चारा फसलों का हिस्सा मात्र 4-5% है। इससे हरे और सूखे चारे की कमी बढ़ रही है। कमजोर फसल उत्पादन, चारा संकट और पशुपालन पर बढ़ती निर्भरता- ये तीनों मिलकर कृषि संरचना की गहरी चुनौतियों को उजागर करते हैं।

बजट की घोषणाओं में उत्तर भारत में कृषि के विकास पर कम ध्यान दिया गया है। ज़्यादातर घोषणाएं दक्षिण और उत्तर-पूर्व में नारियल, चंदन और कोको जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए की गई हैं। किसानों को उम्मीद थी कि किसान सामान निधि की राशि 6 हजार से बढ़कर 9 हज़ार की जाएगी मगर अब तक इसकी कोई घोषणा नहीं की गई। साथ ही पूरे भारत के लिए कोई भी नई कृषि स्कीम की घोषणा नहीं की गई।

भारतीय किसान संघ खंडवा के जिला मंत्री सुभाष पटेल कहते हैं, “मध्यप्रदेश में ना काजू होता है और ना ही नारियल। बजट जिस क्षेत्र में गया है वो खेती-किसानी से दूर है। वह कहते हैं कि अगर पीएम किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी की जाती तो किसानों को सीधा फायदा होता। उनके अनुसार मध्यप्रदेश की पृष्ठभूमि के हिसाब से ये बजट निराशाजनक है।

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