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इंदौर के बाद महू में गंदा पानी पीने से बीमार हुए लोग, 22 की तबियत बिगड़ी 

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब 24 किमी दूर महू में भी दूषित पानी से लोगों के बीमार होने का मामला उजागर हुआ है। स्थानीय लोगों, अधिकारियों और अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के ...
Mhow Water Contamination Ground Report
Child receiving treatment at Mhow Red Cross Hospital after testing positive for jaundice

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद अब 24 किमी दूर महू में भी दूषित पानी से लोगों के बीमार होने का मामला उजागर हुआ है। स्थानीय लोगों, अधिकारियों और अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां लोगों को पीलिया होने की शिकायत सामने आई है।

ग्राउंड रिपोर्ट से बात करते हुए इंदौर के जनसंपर्क अधिकारी महिपाल ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से कुल 22 लोगों की तबियत ख़राब हुई है। इसमें से 9 लोग अभी अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि कुल 22 प्रभावितों में 17 बच्चे शामिल हैं।

यह मामला गुरूवार, 22 जनवरी को सार्वजनिक हुआ। इसी दिन स्थानीय विधायक उषा ठाकुर ने भी पीड़ित परिवारों से मुलाक़ात की। इंदौर कलेक्टर ऑफिस से मिली जानकारी के अनुसार गुरूवार शाम से ही स्वास्थ्य विभाग की एक टीम को इंदौर से भेज दिया गया है और फिलहाल स्वास्थ्य कैम्प लगाकर लोगों की जांच की जा रही है। इसी बीच चंदर नगर और पत्ती बाज़ार में नर्मदा की पाईपलाइन और सरकारी एवं निजी बोर वेल से पानी के कुल 50 नमूने लिए गए हैं।

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स्थानीय पीड़ितों से मिलते इंदौर कलेक्टर। फ़ोटो- ग्राउंड रिपोर्ट के लिए विशेष प्रबंध के तहत।

6 जनवरी से शिकायत आना शुरू हुई

माधुरी मिठौरा के 17 साल के बेटे आदित्य मिठौरा को 6 जनवरी को तेज़ बुखार आना शुरू हुआ था। उन्होंने डॉक्टर की सलाह पर पहले अपने बेटे को इंजेक्शन लगवाया मगर हालत न सुधरने पर पीलिया सहित अन्य बीमारियों का टेस्ट करवाया। 8 जनवरी को आदित्य को पीलिया होना पाया गया। माधुरी बताती हैं कि 8 तारिख से लेकर अब तक उन्हें 8 बोतल ग्लूकोज़ चढ़ाया जा चुका है।

आदित्य के बाद उनकी एक और सगी बहन हर्षिता मिठोरा (14) को भी पीलिया हुआ। माधुरी के अनुसार उनके संयुक्त परिवार में 6 बच्चों को पीलिया हुआ है सभी की उम्र 20 वर्ष से कम है। सभी लोगों का घर पर ही इलाज जारी है। 

इसी प्रकार छठवीं क्लास में पढ़ने वाले 12 वर्षीय उमेर सलमानी को 18 जनवरी को स्कूल में ही सर और सीने में तेज़ दर्द की शिकायत हुई। उनके पिता नौशाद सलमानी बताते हैं कि 19 जनवरी को मेडिकल रिपोर्ट्स में उमेर को पीलिया होना पाया गया। इसके अलावा उसके लीवर और शरीर में भी इन्फेक्शन हुआ है। फिलहाल घर पर ही उमेर का इलाज जारी है। 22 जनवरी को स्थानीय कलेक्टर शिवम वर्मा उमेर के घर पहुंचे और पानी उबाल कर और छानकर पीने की सलाह दी। 

पीने के पानी की स्थिति

महू के ज़्यादातर घरों की तरह माधुरी और नौशाद के घर में भी नर्मदा पाईपलाइन से ही पानी सप्लाई होता है। माधुरी शिकायत करती हैं कि 6 तारिख से पहले ही पानी गंदा और बदबूदार आ रहा था। वह कहती हैं, “रोज़ सुबह 6 बजे पानी आता है। शुरुआत में साफ़ आता है फिर मटमैला पानी आने लगा था।”

मगर माधुरी और अन्य स्थानीय लोगों के लिए यह कोई नई बात नहीं थी। माधुरी बताती हैं कि कुछ दिनों के अंतराल में कभी-कभी गंदा पानी आ जाता है। हालांकि अपनी बात में वे यह भी जोड़ती हैं कि “नर्मदा से आम तौर पर अच्छा पानी ही आता है।”  

इसी तरह नौशाद भी अनियमित रूप से साफ़ पानी ना मिलने की शिकायत करते हैं। उन्होंने बताया कि 2 दिन पहले भी उनके घर में दूषित पानी आया था। आम तौर पर स्थानीय लोग गंदे पानी को साफ़ करने के लिए फिटकरी का उपयोग करते हैं। हालांकि अभी माधुरी और नौशाद डॉक्टर की सलाह पर ‘पानी साफ़ करने वाली दवाई’ डाल कर और उबालकर पानी का सेवन कर रहे हैं। 

मगर चंदर मार्ग के ही रहने वाले स्थानीय पत्रकार अरुण सोलंकी कहते हैं, “नर्मदा के पानी में कोई दिक्कत नहीं है। मुख्य पाइपलाइन से कनेक्शन की जो निजी पाइपलाइन लगाते हैं, उसे कटिंग चार्ज बचाने के लिए लोग नालियों में से होकर गुज़ारते हैं।” यहां कटिंग चार्ज का मतलब उस शुल्क से है जो नल का कनेक्शन लेने वाले हर व्यक्ति को सड़क काटने के लिए देना पड़ता है। 

इसे और आसान भाषा में समझाते हुए छावनी परिषद के स्वास्थ्य अधीक्षक मनीष अग्रवाल कहते हैं कि परिषद द्वारा पानी की पाइप लाइन घरों के सामने तक दी जाती है। यह पाइपलाइन सड़क के पास स्थित होती है जहां से घर तक की निजी कनेक्शन की पाइप लाइन ले जाने के लिए सरकारी ज़मीन को खोदकर पाइपलाइन बिछानी पड़ती है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक छावनी परिषद को एक शुल्क देता है।   

सोलंकी खुद नर्मदा का पानी इस्तेमाल करते हैं। वह कहते हैं, “अगर नर्मदा के पानी से संक्रमण होता तो मुझे या मेरे परिवार की तबियत भी ख़राब हुई होती। यह उन्हीं घरों में हुआ है जहां पाईपलाइन नाली के अन्दर से गुज़ारी गई है।” हालांकि माधुरी बताती हैं कि उनके घर की पाईपलाइन नाली के पास से ज़रूर गुज़ारी गई है मगर अंदर से नहीं।  

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स्थानीय लोग नर्मदा पाईपलाइन से संक्रमण होने को लेकर एकमत नही हैं। फ़ोटो केवल प्रतीकात्मक है।

पानी की सप्लाई

महू एक छावनी इलाका है जहां तमाम नागरिक सुविधाएं महू छावनी परिषद (MCB) द्वारा दी जाती हैं। परिषद द्वारा 7 जनवरी को अखबारों में एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की गई जिसके अनुसार जिन लोगों के पेयजल कनेक्शन नालियों से होकर गुजर रहे हैं उन्हें स्वयं या फिर परिषद में आवश्यक शुल्क जमा कर पाइप लाइन बाहर निकालने के लिए कहा गया।

सूचना के अनुसार 30 दिन के अंदर ऐसा नहीं नहीं करने पर जल का कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा। परिषद के अधिकारी अब अनाधिकारिक बातचीत में इसी को संक्रमण का कारण बता रहे हैं।    

परिषद को शहर के लिए इंदौर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से बल्क वॉटर सप्लाई मिलती है। जिसे फिर मोटर पंप से सप्लाई किया जाता है। परिषद के पास हर दिन 7.5 लाख गैलन पानी सप्लाई के लिए उपलब्ध होता है। इसमें नगर निगम से मिलने वाले पानी के अलावा 91 गहरे ट्यूबवेल, मोटर पंप वाले 25 खुले कुएं, पीने के पानी के लिए हैंड पंप वाले 66 गहरे ट्यूबवेल और पानी की कमी वाले इलाकों के लिए 05 ओवर हेड टैंक और 02 पंप हाउस शामिल हैं। वहीं महू को प्रति दिन 11 मिलियन लीटर (MLD) पानी नर्मदा पाईपलाइन के ज़रिए दिया जाता है। 

कलेक्टर के अनुसार प्रभावित इलाके में टैंकर से पानी की सप्लाई की जाएगी। फ़ोटो केवल प्रतीकात्मक है।

छावनी परिषद के स्वास्थ्य अधीक्षक मनीष अग्रवाल ग्राउंड रिपोर्ट से बात करते हुए कहते हैं, “नर्मदा सप्लाई के जो भी इनलेट हैं, जहां से सप्लाई शुरू होती है वहां से लेकर जहां तक सप्लाई होती है उस पूरी पाइपलाइन की जांच करवाई जा रही है।” उन्होंने बताया कि परिषद द्वारा संचालित 3 बोर वेल के साथ ही निजी बोरवेल से भी पानी के सैम्पल लिए गए हैं। 

फिलहाल महू के पत्ती बाज़ार और मोती महल इलाके में नर्मदा की पाइप लाइन से पानी के नमूने लिए जा रहे हैं। अग्रवाल ने हमे बताया कि अभी पानी की सप्लाई नहीं रोकी गई है और स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि जांच के परिणाम आने पर यह देखा जाएगा कि क्या नर्मदा की सप्लाई रोककर टैंकर से पानी देना ज़रूरी है। जबकि कलेक्टर वर्मा ने कहा कि प्रभावित इलाकों में टैंकर से पानी की सप्लाई की जाएगी।  

इस बीच शुक्रवार 23 जनवरी को स्थानीय कलेक्टर एक बार फिर प्रभावित इलाके में पहुंचे। उन्होंने कहा कि पीलिया और उससे मिलते-जुलते लक्षण लोगों में देखे गए हैं। उन्होंने बताया कि 12 सर्वे टीम 200 से 250 घरों में सर्वे किया जा रहा है। सभी प्रभावितों का इलाज महू के अस्पताल में ही चल रहा है।

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Author

  • Shishir Agrawal is the Hindi Editor of Ground Report. However he identifies himself as a young enthusiast passionate about telling tales of unheard. He covers environment and development affairs from the tribal landscape of central India.

    He has also covered issues related to agrarian crisis, wildlife, water, waste and urban development. He has been a recipient of several fellowships and grant. This includes Gandhi Fellowship, Vikas Samvad Media Fellowship and Earth Journalism Network Grant.

    Apart from having long conversations he indulges himself in reading books, watching theater and gazing at flying objects for leisure. He can be reached at shishiragrawl007@gmail.com.

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