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क्या भारत पहुंच जाएगा हंतावायरस?

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दिल्ली में जल संकट, सरकारी तेल कंपनियों को 30 हज़ार करोड़ का नुकसान, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को कानूनी चुनौती और हंतावायरस से संक्रमित क्रूज़ शिप MV होंडियस पर 2 भारतीय क्रू मेंबर। सुनिए आज का डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट “पर्यावरण आज”।

आज की प्रमुख हेडलाइन्स

चुनाव खत्म, बढ़ेंगे तेल गैस के दाम

सरकारी तेल कंपनियों को ईरान युद्ध की वजह से हर महीने 30 हज़ार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। ग्लोबल ऑयल प्राइज़ बढ़ने के बाद भी घरेलू बाज़ार में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें नहीं बढ़ाई जा रहीं। विधानसभा चुनाव खत्म होते ही तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।


दिल्ली की द्वारका में जल संकट

दिल्ली के द्वारका के 8 सेक्टर्स में जल संकट गहराता जा रहा है। दिल्ली जल बोर्ड की पानी सप्लाई पर्याप्त नहीं है और रेज़िडेंशियल सोसाइटीज़ हर महीने टैंकर पर 1 लाख रुपए खर्च करने को मजबूर हैं।


ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर कलकत्ता हाई कोर्ट में केस

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 के तहत मिली ग्रामसभा की मंज़ूरी को कलकत्ता हाई कोर्ट में एक रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट मीना गुप्ता ने चुनौती दी है। केंद्र सरकार ने इस PIL को खारिज करने की मांग की थी क्योंकि मीना गुप्ता अंडमान निकोबार की निवासी नहीं हैं। हालांकि कोर्ट ने PIL स्वीकार कर ली है, क्योंकि मीना गुप्ता ने कुछ साल अंडमान निकोबार में बिताए हैं और इस विषय पर उनकी अच्छी समझ है।


गरीबों पर युद्द का असर

ईरान युद्ध की वजह से दुनियाभर में अमीरों की तुलना में गरीब लोग अधिक प्रभावित हुए हैं। फर्टिलाइज़र और तेल-गैस की बढ़ी हुई कीमतों ने गरीब वर्ग को हाशिये पर धकेल दिया है।


हंतावायरस प्रभावित शिप पहुंचने वाले कैनरी आईलैंड

हंतावायरस से संक्रमित क्रूज़ शिप, जिसमें 140 यात्री सवार हैं, स्पेन के कैनरी आइलैंड्स पहुंचने वाला है। वहां मेडिकल टीम सभी यात्रियों को इवैक्युएट करेगी और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए उन्हें आइसोलेट किया जाएगा।


विस्तृत चर्चा: क्या भारत पहुंचने वाला है हंतावायरस?

शिशिर अग्रवाल, हिंदी एडीटर ग्राउंड रिपोर्ट

Hantavirus-pulmonary-syndrome, Microscopic view, Credit: Cynthia Goldsmith, US
Hantavirus-pulmonary-syndrome, Microscopic view, Credit: Cynthia Goldsmith, USCDCP

इस वक्त दुनियाभर की नज़र क्रूज़ शिप MV होंडियस पर है। यह शिप 1 अप्रैल को अर्जेंटीना के उशुआइया से रवाना हुआ था और 10 मई को स्पेन के कैनरी आइलैंड्स पहुंचने की उम्मीद है। अटलांटिक महासागर पर अपनी यात्रा कर रहा यह शिप हंतावायरस का हॉटस्पॉट बना हुआ है।

BBC के अनुसार अब तक 5 लोगों में हंतावायरस की पुष्टि हुई है और 3 लोगों की मौत हो चुकी है। ये सभी किसी न किसी तरह इस शिप से जुड़े हैं।

हंतावायरस वायरस का एक बड़ा समूह है जो चूहों और चूहे जैसे जानवरों में पाया जाता है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इसके अलग-अलग स्ट्रेन पाए जाते हैं। ज़्यादातर हंतावायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलते, लेकिन एंडीज़ स्ट्रेन के मामले में ऐसा होता देखा गया है। लैब टेस्ट से पता चला है कि MV होंडियस में फैलने की वजह यही स्ट्रेन है।

यह वायरस इंसानों में संक्रमित जानवरों के यूरिन, मल या लार से निकली बूंदों या धूल को सांस के ज़रिए अंदर लेने से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षणों में बुखार, पेट की समस्याएं, निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम और शॉक शामिल हैं।

अभी की स्थिति

WHO के प्रमुख ने बताया कि पहले दो केस एक डच दंपति के थे जो बर्ड-वॉचिंग ट्रिप पर अर्जेंटीना, चिली और उरुग्वे गए थे, जिसमें उन जगहों पर जाना भी शामिल था जहां वायरस फैलाने वाली चूहे की प्रजाति मौजूद थी। शुरू में 28 देशों के करीब 150 पैसेंजर और क्रू मेंबर जहाज़ पर सवार थे, लेकिन 24 अप्रैल को दर्जनों लोग सेंट हेलेना आइलैंड पर उतर गए। WHO कम से कम 12 देशों के अधिकारियों के संपर्क में है जो अपने उन नागरिकों पर नज़र रख रहे हैं जो जहाज़ पर थे या घर लौट आए हैं।

WHO के अनुसार इस बीमारी का इनक्यूबेशन पीरियड छह हफ्ते तक हो सकता है, इसलिए और मामले सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि WHO ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह छह साल पहले हुई कोविड जैसी महामारी की शुरुआत नहीं है, क्योंकि यह हंतावायरस स्ट्रेन केवल करीबी संपर्क से फैलता है।

भारत के लिए चिंता की बात यह है कि इस शिप में 2 भारतीय क्रू मेंबर भी सवार हैं। हालांकि ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. नवीन कुमार ने कहा है कि भारत को अभी कोई पब्लिक हेल्थ खतरा नहीं है क्योंकि रिपोर्ट किए गए मामले अलग-थलग लग रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी कम्युनिटी स्प्रेड का कोई सबूत नहीं है और हंतावायरस कोविड-19 के उलट इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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