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जंगल खोने के मामले में मध्य प्रदेश ने किया टॉप

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‘पर्यावरण आज’ में सुनिए NOTTO ने अंग प्रत्यारोपण के लिए राष्ट्रीय रियल-टाइम पोर्टल लॉन्च किया। दिल्ली में रूफटॉप सोलर सब्सिडी एकमुश्त देने की योजना और प्रदूषण के चलते स्कूलों में खेल कैलेंडर बदला गया। केरल में जंगलों की जियो-टैगिंग गैर-कानूनी घोषित। भोपाल में अवैध पेड़ कटाई पर जुर्माना लगा। मध्य प्रदेश में मूंग खरीद में अनियमितताएं, और यह राज्य देश में सबसे ज़्यादा वन क्षेत्र (371.54 वर्ग किमी) व वन भूमि (24,969.87 हेक्टेयर) खोने वाला राज्य बना।

प्रमुख हेडलाईन्स

ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन (अंग प्रत्यारोपण) की देखरेख करने वाली राष्ट्रीय रेगुलेटर संस्था ने एक डायनामिक, रियल-टाइम पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। यह पूरे देश के लिए एक वेटिंग लिस्ट बनाएगा और अंग का इंतज़ार कर रहे लोगों की स्थिति को अपडेट करेगा। इस पोर्टल के ज़रिए अस्पताल, राज्य और क्षेत्रीय संस्थाएं मरीज़ों की हालत के आधार पर “सुपर अर्जेंट” (बहुत ज़रूरी) अनुरोध भी कर सकेंगी।

अधिकारियों ने कहा कि नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन (NOTTO) द्वारा इस पोर्टल का लॉन्च, अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था को ज़्यादा पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने कहा कि रूफटॉप सोलर सिस्टम को अपनाने में सबसे बड़ी रुकावट इसकी शुरुआती ज़्यादा लागत रही है; बड़े सिस्टम के लिए यह लागत लगभग 2 लाख रुपये तक हो सकती है। उन्होंने कहा, “लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए, हम दिल्ली और केंद्र सरकार की योजनाओं के तहत जनरेशन-बेस्ड सब्सिडी (जो अभी पाँच साल में मिलती है) को एक ही बार में देने की योजना बना रहे हैं। इससे इंस्टॉलेशन की लगभग 90% लागत कवर हो जाएगी।”


दिल्ली में हवा की सबसे खराब गुणवत्ता वाले महीनों में अब स्कूलों में खेल-कूद की गतिविधियां नहीं होंगी।

राज्य सरकार ने 2026-27 के लिए अपना खेल कैलेंडर बदल दिया है और दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि सभी इवेंट अक्टूबर तक पूरे कर लिए जाएंगे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि नवंबर से जनवरी के बीच छात्र बाहर न खेलें, क्योंकि इस दौरान राजधानी की हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ (severe) से ‘खतरनाक’ (hazardous) स्तर के बीच रहती है।


केरल के जंगलों में जगहों की अंधाधुंध जियो-टैगिंग अब गैर-कानूनी है। केरल सरकार के वन विभाग ने राज्य के जंगलों में उन जगहों का पता लगाने और उन्हें हटाने का फैसला किया है, जिन्हें लोगों ने ऑनलाइन मैप प्लेटफ़ॉर्म पर गैर-कानूनी तरीके से जियो-टैग किया है।

राज्य वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख राजेश रवींद्रन ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि लोग संवेदनशील इकोलॉजिकल जगहों पर न जाएं, जिससे उनकी अपनी जान और वहां रहने वाले जानवरों और जीवों की जान को खतरा हो सकता है।


भोपाल के डेयरी स्टेट फार्म पर बिना अनुमति 700 पेड़ पौधारोपण करने के लिए ज़मीन तैयार करने के नाम पर काट दिए गए थे। इस मामले में नगर निगम ने कॉन्ट्रैक्टर पर 3 लाख 30 हज़ार रुपए का जुर्माना लगाया है और काटे गए पेड़ों के बदले 10 गुना पेड़ लगाने को कहा है, साथ ही कंपनी को लगाए गए पेड़ों का 3 साल तक निशुल्क संरक्षण और रखरखाव भी करना होगा।


मध्य प्रदेश में किसानों के मूंग आंदोलन के बाद एमएसपी पर खरीदी की सीमा 25 से 60 फीसदी तो कर दी गई, लेकिन जो किसान खरीदी केंद्रों पर मूंग बेचने जा रहे हैं उन्हें भारी अनियमितताओं का सामना करना पड़ रहा है। इंतज़ार करते-करते किसानों के स्लॉट एक्सपायर हो रहे हैं।


आज की चर्चा

मध्य प्रदेश में कटते जंगल

रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी से बातचीत

MP Court Bans All Tree Cutting After Thousands Felled Illegally
भोपाल में विधायकों के आवास के लिए हज़ारों पेड़ काट दिए गए थे | अगस्त 2025, फोटो-शिशिर अग्रवाल

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संसद में पेश रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक वन आवरण (फॉरेस्ट कवर) खोने वाला राज्य बन गया है। भारतीय वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR) के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच राज्य ने 371.54 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र गंवा दिया — यह देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सबसे अधिक गिरावट है। ISFR-2021 के मुताबिक मध्य प्रदेश का कुल वन आवरण 77,444.98 वर्ग किलोमीटर था, जो ISFR-2023 में घटकर 77,073.44 वर्ग किलोमीटर रह गया।

इसके साथ ही, विकास परियोजनाओं के लिए वन भूमि का भूमि उपयोग बदलने के मामले में भी मध्य प्रदेश देश में शीर्ष पर है। पिछले पांच वर्षों (1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026) में राज्य में 24,969.87 हेक्टेयर वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों के लिए डायवर्ट की गई, जो देशभर में डायवर्ट हुई कुल 1,05,594.32 हेक्टेयर वन भूमि का करीब 23.65 प्रतिशत है। यानी देश में गैर-वानिकी कार्यों के लिए दी गई हर चौथी हेक्टेयर वन भूमि मध्य प्रदेश से गई।

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राज्य में पेड़ कटाई को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं। सिंगरौली से लेकर भोपाल तक विकास परियोजनाओं के नाम पर हो रही पेड़ कटाई पर विपक्षी दल और पर्यावरणविद लगातार सवाल उठा रहे हैं।

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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