नेपाल बाढ़ में अब तक कम से कम 788 मौत, बिहार और झारखण्ड के बीच होगा सोन नदी जल बंटवारा, कश्मीर की 5 झीलों से बाढ़ का खतरा, मप्र में गांवों में संपत्ति कर लगाने की तैयारी। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
नेपाल की भीषण फ्लैश फ्लड के बाद मौतों का आंकड़ा 788 तक पहुंच गया है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। अपर त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में भी सैकड़ों लोगों के फंसे होने की आशंका है।
बिहार और झारखंड करीब 25 साल पुराने सोन नदी जल बंटवारे के विवाद को खत्म करते हुए आज समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। झारखंड बनने के बाद से लंबित इस समझौते के तहत बिहार को 5.75 मिलियन एकड़-फीट और झारखंड को 2 मिलियन एकड़-फीट पानी का हिस्सा मिलेगा।
कश्मीर की 5 झीलों को ‘बहुत अधिक’ जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। 155 झीलों के सैटेलाइट डेटा पर आधारित अध्ययन के अनुसार, इनके फूटने से नीचे के इलाकों की 2.5 हज़ार से अधिक इमारतें, 15 ब्रिज, सड़कें और एक पावर प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाने की सिफारिश की है।
महाराष्ट्र एफडीए (FDA) ने सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की पुणे इकाई का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस ले लिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद यह कदम उठाया गया। एफडीए ने एक टैबलेट की पैकेजिंग, भंडारण और रिकॉल में कथित अनियमितताओं के आरोप में 27 अगस्त से लाइसेंस रद्द किया था।
मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में जुलाई से जल कर लागू करने के बाद अब संपत्ति कर लगाने की तैयारी है। दिसंबर 2026 तक गांवों का सर्वे पूरा कर इसे जनवरी 2027 से लागू करने का प्रस्ताव है। पक्के मकानों पर सालाना 500 से 1,000 रुपये तक कर लगाया जाएगा, जबकि कच्चे-कवेलू घरों को इस टैक्स से छूट रहेगी।
विस्तृत चर्चा
मध्य प्रदेश और उत्तरप्रदेश से अपनी सीमा साझा करने वाला चित्रकूट बाढ़ का सामना कर रहा है। मप्र के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुद यहां हालात का जायज़ा लेने पहुंचे। पूरा अपडेट बता रहे हैं पल्लव जैन।
पूर्वी मध्य प्रदेश में मानसून की भारी बारिश और बाढ़
मध्य प्रदेश का पूर्वी हिस्सा मानसून की शुरुआत से ही कम वर्षा जैसी स्थिति का सामना कर रहा था क्योंकि यहां बहुत कम बारिश हुई थी। लेकिन अगस्त के आखिरी हफ्ते में हुई भारी बारिश ने इस कमी को काफी हद तक पूरा (रिकवरी) कर दिया है। हालांकि, बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने के कारण क्षेत्र में बाढ़ जैसे गंभीर हालात निर्मित हो गए हैं।
विशेष रूप से, मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट में लगभग 14 घंटे तक लगातार हुई बारिश के बाद बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रसिद्ध रामघाट सहित कई इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए। वहीं दूसरी ओर, सतना के कोटर, वीरसिंहपुर और कोठी क्षेत्रों में सिमरावल नदी उफान पर आ गई। गांवों और घरों में पानी घुस जाने के कारण प्रशासन को बड़े पैमाने पर रेस्क्यू (बचाव) अभियान चलाना पड़ा।
अत्यधिक प्रभावित जिले और मौसम विभाग का अनुमान
अगर जिलेवार बात की जाए, तो पूर्वी मध्य प्रदेश के निम्नलिखित जिलों में तेज और भारी बारिश दर्ज की गई है:
- शहडोल
- सिंगरौली
- मंडला
- सतना
- रीवा
- मैहर
- सीधी
- उमरिया
- डिंडोरी
- बालाघाट
मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का एक बेहद मजबूत सिस्टम (स्ट्रॉन्ग सिस्टम) सक्रिय है। इसी वजह से इन जिलों में ऐसे हालात बने हैं और विभाग ने इस हफ्ते भी इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने का अनुमान जताया है।
चित्रकूट में तबाही और मुख्यमंत्री का दौरा
बाढ़ से सबसे अधिक नुकसान चित्रकूट में हुआ है, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुई हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर 30 फीट से अधिक पहुंच गया था। इसके अलावा, वहां स्थित गोरगी बांध (Gorgi Dam) के फूटने से कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। पानी के तेज बहाव के कारण रामघाट का बड़ा पुल बह गया और बाढ़ का पानी उतरने के बाद घरों और सड़कों पर भारी मात्रा में मिट्टी, कचरा और कीचड़ जमा हो गया है।
इस भयावह स्थिति के बाद, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चित्रकूट के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया। उन्होंने राहत शिविरों (आश्रय स्थलों) में जाकर प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उनके बीच राहत सामग्री का वितरण किया।
बाढ़ का मुख्य कारण: अतिक्रमण
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चित्रकूट बाढ़ के कारणों पर बात करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि चित्रकूट में आई इस बाढ़ का मुख्य कारण नदी क्षेत्रों में हुआ अतिक्रमण (Encroachment) है। नदी के बहाव क्षेत्रों और फ्लड प्लेन्स (बाढ़ के मैदानों) पर कब्जे कर लिए गए हैं और वहां होटल तथा अन्य निर्माण कर दिए गए हैं, जिसके कारण बाढ़ का स्वरूप और अधिक भयावह हो गया है और नुकसान का पैमाना बढ़ गया है।
शहडोल में बाणसागर बांध की स्थिति
बाढ़ का असर शहडोल जिले में भी बड़े पैमाने पर देखा गया है, जहां बाणसागर बांध (Bansagar Dam) पूरी तरह से लबालब भर चुका है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बांध का जलस्तर 13 सेंटीमीटर अधिक है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दोपहर 12:00 बजे तक बाँध के छह गेट खोल दिए गए थे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया गया है।
राहत और बचाव कार्य
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान बचाने के लिए बड़े पैमाने पर बचाव कार्य चलाए गए:
शहडोल और संबंधित क्षेत्रों में अब तक लगभग 700 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर निकाला जा चुका है।
चित्रकूट में बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ (SDRF) और अन्य राहत दलों ने मोटर बोट के जरिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया।
हालांकि अब कई इलाकों से बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतरने लगा है, लेकिन पीछे तबाही के बड़े निशान छूट गए हैं।
प्रशासन के सामने भविष्य की चुनौतियां
बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी संकट पूरी तरह टला नहीं है। मकान और दुकानों के क्षतिग्रस्त होने के साथ-साथ सड़क, पुल और बिजली व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचा है। प्रशासन के सामने वर्तमान में दो सबसे बड़ी चुनौतियां हैं:
प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन और संपर्क (कनेक्टिविटी) को जल्द से जल्द बहाल करना।
बाढ़ प्रभावित लोगों के जीवन को पुनः सामान्य और पटरी पर लाना।
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