7 शहरों में बाढ़ रोकने के लिए 3 हज़ार करोड़ रु खर्च होंगे, कर्णाटक को हर दिन 3500 क्यूसेक पानी देने का आदेश, जम्मू कश्मीर में भारी बारिश के बाद स्कूल बंद, जापान में 7.1 तीव्रता का भूकंप। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को बताया कि केंद्र सरकार ने सात शहरों के लिए अर्बन फ्लड रिस्क मैनेजमेंट प्रोग्राम फेज़ I को मंज़ूरी दी है। इसका कुल खर्च 3 हज़ार करोड़ रुपये है।
कावेरी वाटर रेगुलेशन कमिटी ने कर्नाटक को 29 जुलाई से अगले 15 दिनों तक प्रतिदिन 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु की ओर छोड़ने का निर्देश दिया है। तमिलनाडु का कहना है कि उसे तय हिस्से से 9.46 टीएमसी पानी कम मिला है, जबकि कर्नाटक इस आदेश को चुनौती देने पर विचार कर रहा है।
भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जबकि किश्तवाड़ के संवेदनशील इलाकों के कई स्कूलों में भी छुट्टी घोषित की गई है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
जापान के दक्षिणी द्वीप क्यूशू में 7.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया है, जिससे काफी नुकसान हुआ है। 1.5 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में जाने के निर्देश दिए हैं।
मध्य प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं को 200 से 500 यूनिट के बीच की खपत पर बिजली बिल में ₹35 से ₹87 तक बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। सरकार ने फ्यूल कॉस्ट सरचार्ज 1.11% से बढ़ाकर 3.77% कर दिया गया है। प्रदेश में कम बारिश के कारण, हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर जेनरेशन में 74% की गिरावट आई है।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पलाव जैन आपको बता रहे हैं मूंग की खरीदी के लिए पदयात्रा कर रहे किसानों के आंदोलन में कल क्या-क्या हुआ?
भोपाल के क़रीब पहुंचे प्रदर्शनकारी किसान
मध्य प्रदेश में किसान एमएसपी पर ज़ायद की फसल मूंग के शत प्रतिशत उपार्जन और कुछ अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। यह आंदोलन 27 जुलाई को नर्मदापुरम के सेठानी घाट से शुरु हुआ और अब किसानों का प्लान भोपाल आकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है।
इंडियन एक्सप्रेस में आज छपी खबर के मुताबिक अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना पकाने के बर्तन और एक हफ़्ते का राशन लेकर, लगभग 2,000 किसान मंगलवार को भोपाल के बाहरी इलाकों में पहुंच गए। उन्होंने शहर के दक्षिणी छोर पर पुलिस की बैरिकेडिंग को तोड़ दिया है। ग्राउंड रिपोर्ट भी इस आंदोलन को ज़मीन पर कवर कर रहा है लेकिन हम स्वतंत्र रुप से किसानों की संख्या की पुष्टी नहीं कर सके हैं।
क्या है विवाद?
आंदोलन के बारे में और जानने से पहले हम अपने श्रोताओं को मूंग खरीदी विवाद के बारे में बता दें।
दरअसल मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान तीसरी फसल के रुप में मूंग की खेती करते हैं, यह रबी और खरीफ की फसल के बीच बोई जाती है। मूंग क्योंकि 2 महीने में पककर तैयार हो जाती है किसान इसे लगाना पसंद करता है।
हम सभी जानते हैं कि देश में दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनने के लिए दाल मिशन भी चलाया जा रहा है जिसका मकसद किसानों को दालें जैसे तुअर, मूंग, उड़द, मसूर लगाने के लिए सरकार प्रेरित कर रही हैं।
लेकिन समस्या यह कि केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार, तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की 100% फसल एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीदी जा सकती है। लेकिन मूंग जैसी अन्य फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के सिर्फ 25% तक ही सीमित है।
मप्र का केंद्र को पत्र
इस साल मूंग का एमएसपी ₹8,768 प्रति क्विंटल तय किया गया है। चूंकि सिर्फ एक-चौथाई (25%) फसल ही एमएसपी पर खरीदी जा सकती है, इसलिए किसानों को बाकी 75% फसल खुले बाजार में बेचनी पड़ रही है। अब बाज़ार में इसका भाव 6,000-7,000 प्रति क्विंटल है। इस तरह किसानों को हर क्विंटल पर हजारों रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है।
मध्य प्रदेश किसान कल्याण और कृषि विकास निदेशक उमाशंकर भार्गव ने ग्राउंड रिपोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र से मूंग खरीद कोटा 25% से बढ़ाकर 40% करने को लेकर पत्र लिखा है।
हम यहां बता दें कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 21 मई 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को यह पत्र लिखा था जिसमें मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया गया था। हालांकि चौहान ने इस पत्र के जवाब में कहा कि 16 जुलाई तक राज्य के लिए मंजूर 4,54,580 मीट्रिक टन मूंग खरीद कोटे में से सिर्फ 7,947 मीट्रिक टन (लगभग 2%) ही खरीदा गया है। इससे अब तक सिर्फ करीब 12,000 किसानों को ही फायदा मिला है।
केंद्र का जवाब और प्रदेश की स्थिति
केंद्र का कहना है, जब मौजूदा कोटा ही पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुआ, तो उसे बढ़ाने का सवाल ही नहीं उठता।
अब यहां पर मोहन यादव सरकार फंसी हुई दिखाई देती है, और उपार्जन कम होने का कारण भी यही है कि किसानों ने अपनी फसल रोक कर रखी है। वह तभी अपनी फसल बेचेंगे जब खरीदी कोटा बढ़ेगा। लेकिन यह बात केंद्र सरकार समझ नहीं रही है।
इधर आंदोलन में शामिल किसान नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव मिलने का समय नहीं दे रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री के साथ बातचीत नहीं हुई या उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे भोपाल में यातायात रोकेंगे। इसके अलावा उन्होंने ओबेदुल्लागंज से मिसरोद के बीच रेल यातायात भी बाधित करने की चेतावनी दी है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
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