यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का 78वां एपिसोड है। शनिवार, 29 नवंबर को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए श्रीलंका में दितवाह के चलते हुए नुकसान और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स उत्पादन के बारे में।
मुख्य सुर्खियां
थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया में बाढ़ के चलते अब तक कुल 241 लोगों की मौत हो चुकी है। थाईलैंड में लगातार हो रही बारिश ने 300 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 21 नवंबर को यहां 13.2 इंच बारिश हुई है।
श्रीलंका में चक्रवाती तूफ़ान दितवाह के चलते 46 लोगों की मौत हो चुकी है वहीं 23 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के प्रदूषण को राष्ट्रिय स्वास्थ्य आपातकाल बताते हुए आगामी शीतकालीन सत्र में इस बारे में चर्चा कराने की मांग की है।
दिल्ली का ग्राउंड वाटर यूरेनियम से दूषित है. सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में, यहां मॉनसून के बाद के 15.66% सैंपल ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स की 30 पीपीबी की लिमिट से ज़्यादा थे।
श्रीनगर में गुरूवार को रात का तापमान -4.5 द्रिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 2007 के बाद यहां सबसे सर्द नवंबर रहा है।
मध्य प्रदेश में सोमवार से विधानसभा का सत्र शुरू होगा। ऐसा पहली बार होगा कि विधानसभा सत्र केवल 4 दिन का होगा उसमें भी बैठक केवल 3 दिन ही होंगी।
विस्तृत चर्चा
चक्रवाती तूफान दितवा और क्षेत्रीय प्रभाव (पल्लव जैन के साथ)
बंगाल की खाड़ी में साइक्लोन सन्यार के बाद अब दितवा चक्रवात का असर देखने को मिला है। चक्रवाती तूफान दितवा ने श्रीलंका में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ और लैंडस्लाइड की घटनाओं के कारण कम से कम 80 लोगों की जान जा चुकी है, और 34 लोग लापता हुए हैं।
आपदा के हालात: श्रीलंका के पश्चिमी जिलों में किलानी और अतना गालू नदियों का जल स्तर बढ़ने लगा, जिसकी वजह से आपदा के हालात पैदा हो गए। कोलंबो के साथ-साथ गंमपाहा जिले में भी गंभीर स्थिति है। करीब 148,000 लोग बाढ़ की चपेट में हैं, और कई घर तबाह हो चुके हैं।
भारत का सहयोग: इस संकट की घड़ी में भारत श्रीलंका के साथ खड़ा है। भारत ने ‘ऑपरेशन सागर बंदूक’ चलाया है, जिसके तहत आईएनएस विक्रांत और उदयगिरी से राहत सामग्री श्रीलंका तक पहुंचाई गई है।
भारत पर असर: यह चक्रवात तेजी से भारत में उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी, और दक्षिणी आंध्र के तटों की ओर बढ़ रहा है।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि तमिलनाडु में तूफान के टकराने से 100 कि.मी. प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी तूफान आएगा। तमिलनाडु के अलावा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के तटीय इलाकों में 60 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी और भारी बारिश होगी।
तैयारियां और बचाव कार्य: प्रभावित राज्यों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। मछुआरों को तटीय इलाकों में जाने से रोका गया है, और बाढ़ की चपेट में आने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने सारी तैयारियों का जायजा लिया है, और राहत और बचाव की टीमें मौके पर तैनात की गई हैं।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स उत्पादन
सेंट्रल कैबिनेट ने ₹7,280 करोड़ की एक नई योजना को मंजूरी दी है। यह योजना भारत के मैन्युफैक्चरिंग प्रोग्राम को एक बड़ा बूस्ट माना जा रहा है। इस योजना का मुख्य मकसद आरईपीएम (रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स) का उत्पादन भारत में शुरू करना है।
आरईपीएम का महत्व: आरईपीएम काफी मजबूत मैग्नेट्स होते हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवीज) के मोटर्स, विंड टरबाइन, कई डिफेंस सिस्टम्स, और मोबाइल-लैपटॉप जैसी रोज़मर्रा की चीज़ों में इस्तेमाल होते हैं। ये हमारी डे टू डे लाइफ में काफी क्रूशियल हैं।
रणनीतिक परिदृश्य और निर्भरता: वर्तमान में, भारत इन मैग्नेट्स के लिए लगभग पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। भारत के आयात का तकरीबन 80% शेयर चाइना का है। वैश्विक स्तर पर, चाइना इस क्षेत्र को लगभग 90% तक कंट्रोल करता है। इसलिए, यह एक इकोनॉमिकली और स्ट्रेटेजिक मूव भी है।
कार्यान्वयन के विवरण: सरकार ने पांच नई फैक्ट्रियों को मंजूरी दी है। इनकी सालाना उत्पादन क्षमता 6,000 मीट्रिक टन होगी। हर यूनिट में पूरी प्रोसेसिंग होगी, जिसमें रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर मेटल एलॉय और फिर मैगनेट के अंतिम फॉर्म तक की प्रक्रिया शामिल होगी।
इस पूरी प्रक्रिया में ₹450 करोड़ सेल्स लिंक्ड इंसेंटिव के तौर पर दिए जाएंगे, और ₹750 करोड़ कैपिटल सब्सिडी के तौर पर प्रदान किए जाएंगे।
पूरा लक्ष्य यह है कि अगले तीन से चार सालों में भारत आरईपीएम्स के मामले में आत्मनिर्भर बन जाए। मंत्री एचडी कुमार स्वामी ने इस शुरुआत को “हिस्टोरिकल शुरुआत” बताया है।
पर्यावरण संबंधी चिंताएं: रेयर अर्थ की माइनिंग आसान नहीं होती है, क्योंकि ये खनिज दूसरी चीज़ों के साथ मिलते हैं। इसके लिए काफी इंटेंसिव माइनिंग की जरूरत होती है।
माइनिंग के दुष्परिणाम हो सकते हैं, और इसके साथ रेडियोएक्टिव डेबरीज (जैसे थोरेनियम और यूरेनियम) के बनने का भी खतरा रहता है। यदि वेस्ट मैनेजमेंट प्रॉपर न हो, तो पानी, मिट्टी, और हवा सब कुछ अफेक्ट हो सकती है।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि यह पूरी प्रोसेस डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी और कोस्टल रेगुलेशन जोन जैसे मानकों को ध्यान में रखकर चलाई जाएगी।
यह था हमारा डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट। ग्राउंड रिपोर्ट में हम पर्यावरण से जुडी हुई महत्वपूर्ण खबरों को ग्राउंड जीरो से लेकर आते हैं। इस पॉडकास्ट, हमारी वेबसाईट और काम को लेकर आप क्या सोचते हैं यह हमें ज़रूर बताइए। आप shishiragrawl007@gmail.com पर मेल करके, या ट्विटर हैंडल @shishiragrawl पर संपर्क करके अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
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