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सितंबर भी सूखा और गर्म बीतने का अनुमान

देश भर में सितंबर के मौसमी अनुमान से लेकर अलीराजपुर के किसानों तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

पहली तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर 7.8%, अल नीनो से रबी फसलों को खतरा, यूपी में स्वाइन फ्लू के 500 से भी ज्यादा मामले, मप्र में कैबिनेट मंत्री का किसानों के साथ प्रदर्शन। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


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मुख्य सुर्खियां

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की आर्थिक विकास दर 7.8% रही है। यह विकास दर रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अनुमानित 7% से काफी बेहतर है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में भारत की विकास दर 6.9% थी।


केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सचेत किया है कि अल नीनो का बढ़ता प्रभाव रबी फसलों (विशेष रूप से गेहूं और सरसों) की पैदावार को प्रभावित कर सकता है। इससे देश में Food inflation का खतरा उत्पन्न होने की आशंका है। मंत्रालय की अगस्त की आर्थिक समीक्षा के अनुसार अल नीनो का प्रभाव साल के अंत तक अपने चरम पर पहुंच सकता है और मार्च 2027 तक बने रहने की संभावना है। 

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ओएनजीसी अगले पांच वर्षों में गहरे और अत्यधिक गहरे पानी में खोज के लिए लगभग ₹1 लाख करोड़ का निवेश करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज करना है। वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) के दौरान हुए परीक्षणों से 55 कुओं में हाइड्रोकार्बन की उपस्थिति की पुष्टि हुई है। 


उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में H1N1 (स्वाइन फ्लू) के नए मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य के 57 जिलों में अब तक कुल 551 H1N1 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें से अकेले लखनऊ में 113 मामले हैं, जो गौतम बुद्ध नगर के बाद राज्य में सर्वाधिक हैं। 


नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच ने मध्य प्रदेश में ई-कचरे के बढ़ते संकट को ‘परमाणु और रेडियोलॉजिकल आपातकाल’ की तरह गंभीरता से लेने का निर्देश दिया है। राज्य में सालाना लगभग 5,000 मीट्रिक टन ई-कचरा उत्पन्न होता है, जो वर्ष 2019 में केवल 500 टन था। अकेले भोपाल शहर हर साल 415 टन ई-कचरा पैदा करता है, जिसमें से केवल 10% का ही वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होता है। 

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अलीराजपुर में कम बारिश के कारण फसलों के नुकसान के डर से किसानों ने कलेक्ट्रेट तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला। वे नर्मदा सिंचाई परियोजना से तत्काल पानी छोड़ने की मांग कर रहे थे। कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान खुद किसानों के साथ इस मार्च में शामिल हुए और कलेक्ट्रेट के सामने जमीन पर बैठकर प्रदर्शन किया।

विस्तृत चर्चा

सितंबर में देशभर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है, जिससे इस साल मानसून का अंत घाटे के साथ होने की संभावना है। आईएमडी ने इस पर क्या कहा है बता रहे हैं वाहिद भट। 

सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, सितंबर में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि सितंबर में कुल बारिश दीर्घकालिक औसत (Long Period Average – LPA) के 91% से कम रह सकती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस वर्ष का मानसून सीजन पानी की कमी के साथ समाप्त होगा।

मानसून घाटे में वृद्धि की आशंका 

31 अगस्त तक देश में मानसून की बारिश में पहले ही 14% की कमी दर्ज की जा चुकी थी। यदि सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश होती है, तो यह घाटा और अधिक बढ़ सकता है। सितंबर आमतौर पर मानसून का आखिरी बड़ा महीना होता है, जिसमें देश में औसतन 167.9 मिमी बारिश दर्ज की जाती है।

क्षेत्रीय विविधताएं 

हालांकि देश के कई हिस्सों में सूखा या कम बारिश का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन उत्तर-पश्चिम (North West), उत्तर-पूर्व (North East), पूर्व (East) और पूर्वी-मध्य (East Central) भारत के कुछ हिस्सों में मानसून सामान्य या सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है।

अगस्त 2026 का ऐतिहासिक गर्मी रिकॉर्ड 

मौसम में बदलाव का सबसे बड़ा संकेत अगस्त 2026 में देखने को मिला। इस महीने देश का राष्ट्रीय औसत तापमान 28.08 डिग्री सेल्सियस रहा, जो कि सामान्य तापमान से 0.67 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इसी के साथ अगस्त 2026, वर्ष 1901 के बाद से भारत का सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया है।

कृषि और ऊंचे खाद्यान्न लक्ष्यों पर संकट 

मौसम के इस असामान्य मिजाज से फसलों को लेकर चिंता काफी बढ़ गई है। भारत ने वर्ष 2026-27 के लिए खाद्यान्न उत्पादन (Foodgrain Production) का लक्ष्य पिछले कई वर्षों के मुकाबले बहुत अधिक रखा है। चर्चा के अंत में यह गंभीर सवाल उठाया गया है कि यदि सितंबर में बारिश कम और अनियमित रही, तो क्या भारत अपने इस ऊंचे उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त कर पाएगा, और क्या सितंबर में भी गर्मी के नए रिकॉर्ड बनते दिखाई देंगे।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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