54 जलाशयों में पानी 80% तक कम, हिमाचल में भूस्खलन और बाढ़ से 13 लोगों की मौत, चीन में ‘नोल’ तूफ़ान से 10 की मौत, मप्र में सभी जल स्रोतों की बनेगी ‘हेल्थ रिपोर्ट’। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
मानसून के बावजूद देश के 54 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण 80% से भी कम है। कुल मिलाकर जल भंडारण में लगभग 15% की कमी दर्ज की गई है। इससे खरीफ सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि बार-बार हो रही चरम वर्षा, पहाड़ों में अनियोजित निर्माण और संवेदनशील क्षेत्रों में विकास कार्य आपदाओं की तीव्रता बढ़ा रहे हैं।
दक्षिण चीन में आए ‘नोल’ (Noul) तूफान और उसके बाद आई बाढ़ के कारण 10 लोगों की मौत हो गई है। तूफान के दौरान हवा की गति 162 किमी प्रति घंटा तक पहुँच गई थी।
संसद में सरकार ने बताया कि 24 जुलाई 2026 तक देश में 1 करोड़ हेक्टेयर (10 मिलियन हेक्टेयर) से अधिक कृषि क्षेत्र जलवायु और मौसम संबंधी आपदाओं से प्रभावित हुआ है। बाढ़, भारी बारिश, सूखा और अन्य हाइड्रो-मौसमीय घटनाओं ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है।
मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश के करीब 20 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। अब तक प्रदेश में औसत 13.2 इंच (334.9 मिमी) बारिश हुई है, जबकि 15.5 इंच (395.2 मिमी) पानी गिर जाना था। इस तरह 2.3 इंच यानी, 15 प्रतिशत बारिश कम हुई है।
मध्य प्रदेश सरकार राज्य के सभी बोरवेल, कुओं और तालाबों का हेल्थ रिपोर्ट कार्ड तैयार करेगी। इसमें पानी की गुणवत्ता और प्रदूषण स्तर का रिकॉर्ड रखा जाएगा। जिला स्तर की मॉनिटरिंग कमेटियां इसकी नियमित जांच करेंगी।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी आपको बता रहे हैं मूंग खरीद पर मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच आए टकराव के बारे में।
मूंग खरीद पर केंद्र सरकार ने मप्र को क्या कहा?
मध्यप्रदेश के कृषि मंत्री ऐंदल सिंह कंसाना ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय को औपचारिक रूप से पत्र लिखकर मूंग खरीद के कोटे को वर्तमान 25% से बढ़ाकर 40% करने का अनुरोध किया है।
मध्यप्रदेश का तर्क: राज्य के अधिकारियों का तर्क है कि मध्यप्रदेश में मूंग का उत्पादन 18 से 20 लाख टन के बीच होता है। वर्तमान 25% के नियम के तहत, खरीद की सीमा लगभग 4.54 लाख टन निर्धारित है, जिसे राज्य अपर्याप्त मानता है,। किसान पंजीयन के आधार पर लगभग 10 लाख टन मूंग आने की संभावना है, इसलिए राज्य चाहता है कि खरीद की सीमा बढ़ाकर 8 लाख टन की जाए।
पिछला उदाहरण: राज्य ने यह भी उल्लेख किया है कि पिछले साल भी उन्हें उत्पादन अधिक होने के कारण 40% (लगभग 7.5 लाख टन) की खरीद करनी पड़ी थी।
केंद्र सरकार का जवाब
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्य के अनुरोध पर कड़ा रुख अपनाते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे हैं:
वर्तमान कोटे का कम उपयोग: केंद्र ने बताया कि 16 जुलाई तक स्वीकृत कोटे का केवल 2% ही खरीदा गया था (लगभग 12,000 किसानों से 7,947 टन)। हालांकि नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, खरीद बढ़कर 52,284 से अधिक किसानों से 36,682 टन हो गई है, फिर भी केंद्र का मानना है कि मौजूदा सीमा अभी पूरी नहीं हुई है।
अकेले मध्यप्रदेश को बड़ा आवंटन: केंद्र सरकार ने रेखांकित किया कि देशभर में मूंग खरीद के लिए मंजूर कुल मात्रा का 87% हिस्सा अकेले मध्यप्रदेश को दिया गया है।
शर्त: केंद्र ने स्पष्ट किया है कि स्थापित नियमों के तहत अतिरिक्त मात्रा के प्रस्तावों पर विचार तभी किया जाएगा जब वर्तमान में स्वीकृत 4.54 लाख टन की पूरी खरीद कर ली जाएगी।
वित्तीय और लॉजिस्टिक दबाव
स्रोतों से पता चलता है कि पिछली खरीद के कारण राज्य सरकार पर काफी वित्तीय दबाव है:
गोदामों में पुराना स्टॉक: मार्कफेड का पुराना मूंग स्टॉक अभी भी गोदामों में भरा हुआ है,। पिछले साल राज्य ने अपने कोटे से 3.5 लाख टन अधिक मूंग खरीदा था, जिसे अब खुले बाजार में बेचना तय हुआ है।
अनुमानित घाटा: राज्य सरकार को इन खुले बाजार की बिक्री से लगभग ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। मूंग को ₹8,500 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदा गया था, और अन्य खर्चों को मिलाकर इसकी लागत लगभग ₹9,500 प्रति क्विंटल बैठती है। पिछले अनुभवों के आधार पर खुले बाजार में कीमतें इस लागत से 20-30% तक कम होती हैं।
वर्तमान स्थिति
मूंग की खरीद 10 अगस्त तक जारी रहने वाली है। केंद्र सरकार का कहना है कि PM-AASHA योजना के तहत किसानों को MSP का पूरा लाभ सुनिश्चित कराने के लिए सहयोग दिया जा रहा है। जबकि राज्य सरकार अधिक उत्पादन और पंजीकृत किसानों की बड़ी संख्या के कारण दबाव में है।
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