रेयर अर्थ मिनरल पर भारत-अमेरिका की डील, चंबल में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट की फटकार, प्री-मानसून बारिश के आसार के बीच बांदा अब भी सबसे गर्म, मध्य प्रदेश में लू लगने से 6 साल के बच्चे की मौत। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
भारत और अमेरिका ने दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की माइनिंग और सप्लाई के लिए एक बड़ा समझौता किया है ताकि इस क्षेत्र में चीन के एकाधिकार को चुनौती दी जा सके। इस योजना के तहत सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए प्राइवेट सेक्टर के सहयोग से भारी निवेश किया जाएगा।
चंबल इलाके में हो रही अवैध रेत माइनिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि प्रशासन केवल डांट पड़ने के बाद ही क्यों जागता है और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार 29 मई से 5 जून के बीच देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश हो सकती है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान अब भी 47.4 डिग्री तक पहुंच रहा है, जो देश में सबसे अधिक है।
दिल्ली में कचरा बीनने वाले श्रमिकों को अब आधिकारिक पहचान पत्र दिए जाएंगे। एमसीडी ने अब तक 13 हजार से अधिक वेस्ट पिकर्स का सर्वे किया है, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
मध्य प्रदेश के पन्ना में कुएं की खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने से 5 मजदूरों की जान चली गई। जांच में सामने आया है कि इन्हें ज़्यादा मजदूरी का लालच देकर असुरक्षित तरीके से काम पर लगाया गया था और उनका नाम सरकारी पोर्टल पर भी दर्ज नहीं था।
वहीं छतरपुर जिले में एक 6 साल के बच्चे की कथित तौर पर लू लगने से मौत हो गई। इसके कुछ देर बाद उसे लेकर आई मां की भी मौत हो गई। हालांकि मां की मौत का कारण अब भी स्पष्ट नहीं है।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पल्लव जैन से जानिए दिल्ली की यमुना के घटते जल स्तर और पानी के गहराते संकट के बारे में। साथ ही चंद्रप्रताप तिवारी बता रहे हैं मध्य प्रदेश में स्थानीय निकायों की फंडिंग बढ़ाने की सिफारिशों के बारे में।
यमुना का ऐतिहासिक निचला स्तर और भविष्य की चुनौतियां
दिल्ली वर्तमान में एक गंभीर जल संकट का सामना कर रही है, जहां यमुना नदी का जलस्तर अपने ऐतिहासिक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। स्थिति इतनी विकट है कि दिल्ली सरकार को जून के महीने में पानी की कटौती से बचने के लिए हरियाणा सरकार से अतिरिक्त पानी छोड़ने की गुहार लगानी पड़ी है।
वजीराबाद जलाशय की चिंताजनक स्थिति दिल्ली में पानी की आपूर्ति के लिए मुख्य स्रोत वजीराबाद जलाशय (Pond/Reservoir) है, जहां यमुना का पानी इकट्ठा कर उसका ट्रीटमेंट किया जाता है। दिल्ली जल बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को यहाँ जलस्तर 668 फीट दर्ज किया गया, जो मानक स्तर 674.5 फीट से काफी नीचे है। इस स्तर को ‘क्रिटिकली बिलो’ (अत्यधिक कम) माना जा रहा है।
वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट पर प्रभाव जलाशय में पानी की कमी का सीधा असर दिल्ली के वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स पर पड़ रहा है।
दिल्ली में कुल नौ वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट हैं।
वर्तमान में केवल सोनिया विहार और भागीरथी प्लांट ही अपनी पूरी क्षमता (optimally) से काम कर पा रहे हैं।
अन्य प्लांट्स में पानी की इतनी कमी है कि उन्हें सुचारू रूप से चलाना भी मुश्किल हो रहा है।
पड़ोसी राज्यों से जल की मांग यह इस साल में दूसरी बार है जब दिल्ली सरकार ने हरियाणा से अतिरिक्त पानी की मांग की है। इससे पहले अक्टूबर में छठ पूजा के दौरान भी इसी तरह की मांग की गई थी। हालांकि रिपोर्ट के अनुसार केवल हरियाणा ही नहीं, बल्कि गंगा के कई बेल्ट्स में भी जलस्तर काफी कम हो गया है।
राष्ट्रीय स्तर पर जल संकट और विरोध प्रदर्शन पानी की यह समस्या केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के इंदौर जैसे शहरों में पानी की किल्लत को लेकर लोगों के विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं। मई के इस महीने में पूरे भारत में जल संकट गहराता जा रहा है।
कमजोर मानसून की चेतावनी और भविष्य की चिंता भविष्य की स्थिति और भी चिंताजनक लग रही है क्योंकि मौसम विभाग ने कमजोर मानसून की भविष्यवाणी की है। औसत या औसत से अधिक बारिश होने पर भी गर्मियों में जलाशयों का स्तर बनाए रखना मुश्किल होता है। ऐसे में यदि मानसून औसत से कम रहता है, तो अगला साल एक बहुत बड़े जल संकट का संकेत दे रहा है।
जल संरक्षण की आवश्यकता प्रशासनिक स्तर पर वर्तमान में तैयारियों की कमी दिखाई दे रही है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि केवल नदियों पर निर्भर रहने के बजाय रेन वॉटर हार्वेस्टिंग (Rain Water Harvesting) और जल संरक्षण के प्रयासों को हर स्तर पर अपनाना अनिवार्य है, क्योंकि नदियों की भी अपनी एक सीमित क्षमता है।
यदि अभी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य की पानी की जरूरतें पूरी करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।
स्थानीय निकायों की फंडिंग बढ़ाने की सिफ़ारिश
मध्यप्रदेश सरकार राज्य के नगर निकायों और पंचायतों को आर्थिक रूप से अधिक मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। वर्तमान में राज्य सरकार अपनी कुल राजस्व आय का केवल 6 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकायों को देती है, जबकि महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में यह हिस्सा 40 से 45 प्रतिशत तक है। इसी असमानता को दूर करने के लिए राज्य के छठे वित्त आयोग ने 88 महत्वपूर्ण सिफारिशें तैयार की हैं, जिन्हें जल्द ही सरकार को सौंपा जाएगा।
आयोग ने सुझाव दिया है कि स्थानीय निकायों को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 10 प्रतिशत तक किया जाए। इससे शहरों और गांवों में विकास कार्यों को गति मिलेगी। रिपोर्ट में पेयजल व्यवस्था, सीवेज सिस्टम, कचरा प्रबंधन, सड़क निर्माण और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। छोटे शहरों और पंचायतों में भी आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए अतिरिक्त बजट देने की सिफारिश की गई है।
आयोग का मानना है कि यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है तो स्थानीय निकाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे और लोगों को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिल सकेंगी। इससे गांवों और शहरों में विकास कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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