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भारत में 126 वर्षों के इतिहास में दूसरा सबसे सूखा जून बीता

ऐतिहासिक सूखे से लेकर नॉर्थ-ईस्ट में भारी बारिश की चेतावनी तक जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ

जल संकट से जूझते पकिस्तान की भारत को धमकी, NTPC छोटे परमाणु रिएक्टरों के लिए करेगी साझेदारी, भारत दूसरा सबसे बड़ा जलीय जीव उत्पादक देश बना, नॉर्थ-ईस्ट में भारी बारिश और उत्तर भारत में हीटवेव का अलर्ट। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।


मुख्य सुर्खियां

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि पाकिस्तान की जल सुरक्षा को खतरा पहुंचा तो मामला युद्ध तक जा सकता है। यह बयान सिंधु जल संधि को लेकर बढ़े तनाव और पाकिस्तान में गहराते जल संकट के बीच आया है। 


भारत की दिग्गज कंपनी NTPC छोटे परमाणु रिएक्टरों के लिए होल्टेक (Holtec), EDF और रोसाटॉम जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ साझेदारी के लिए बातचीत कर रही है। कंपनी ने राजस्थान के माही बांसवाड़ा में 2,800 मेगावाट की परमाणु परियोजना के लिए क्षमता स्वीकृति प्राप्त कर ली है और वह थोरियम आधारित ईंधन के विकास की संभावनाओं को भी तलाश रही है।


संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की SOFIA 2026 रिपोर्ट के अनुसार भारत अब चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा जलीय जीव (मछली सहित) उत्पादक देश बन गया है। भारत अंतर्देशीय (नदियों, झीलों और तालाबों) मत्स्य उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच गया है और लगभग 22 लाख टन उत्पादन दर्ज किया गया। 


एक ओर दक्षिण-पश्चिम मानसून के फिर से सक्रिय होने से पूर्वोत्तर भारत और सिक्किम में 200 मिमी तक भारी बारिश की संभावना है, वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ में 24-25 जून तक भीषण गर्मी (हीटवेव) का प्रकोप जारी रहेगा। ब्रह्मपुरी और बांदा जैसे क्षेत्रों में तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से 5 से 7 डिग्री अधिक बना हुआ है।


कांग्रेस पार्टी मध्य प्रदेश सरकार से विधान सभा के 14वें और 15वें सत्र के 1,479 लंबित प्रश्नों का हिसाब मांगने की तैयारी कर रही है। इन अनुत्तरित प्रश्नों में 14वीं विधानसभा के 535 और 15वीं के 865 प्रश्न शामिल हैं, जहां खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों द्वारा अक्सर ‘जानकारी एकत्र की जा रही है’ जैसे जवाब देकर महत्वपूर्ण मुद्दों को टाला गया है।


भोपाल के मैनिट (MANIT) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे मौजूदा सोलर इन्वर्टर वोल्टेज रेगुलेटर की तरह काम कर सकेंगे और लो-वोल्टेज की पुरानी समस्या का समाधान होगा। इस शोध को राज्य सरकार ने अपनी नीतियों में शामिल किया है और इसका सफल प्रदर्शन 230 किलोवाट के रूफटॉप सोलर प्लांट पर किया गया है, जो दिन और रात दोनों समय ग्रिड को स्थिरता प्रदान कर सकता है।

विस्तृत चर्चा

आज की चर्चा में हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी से जानिए जून में मानसून कैसा रहा और आगे क्या होने वाला है?  

भारत का थमा हुआ मानसून और जून का ऐतिहासिक सूखा

आज की चर्चा में भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्तमान स्थिति को रेखांकित किया गया है। चर्चा में मानसून की महत्वपूर्ण देरी, वर्षा की ऐतिहासिक कमी और नए मौसम प्रणालियों के कारण आगामी राहत की संभावना पर प्रकाश डाला गया है।

दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगे बढ़ना

लगभग दो सप्ताह तक थमे रहने के बाद, अब दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। बंगाल की खाड़ी में एक नया मौसम सिस्टम बना है, जिसके मानसून को छत्तीसगढ़ तक पहुंचाने का अनुमान है। यदि यह सिस्टम अपनी रफ्तार अच्छी बनाए रखता है, तो इससे ओडिशा, बिहार और झारखंड जैसे क्षेत्रों में भी भारी बारिश हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसके बहुत तेजी से आगे बढ़ने की गुंजाइश अभी भी कम है।

वर्षा की भारी कमी और ऐतिहासिक संदर्भ

इस साल मानसून सीजन में बारिश के आंकड़ों में भारी गिरावट देखी गई है:

वर्षा की कमी: 21 जून तक देश में सामान्य रूप से 99.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन केवल 57.4 मिमी ही दर्ज की गई है—जो कि 42.2% की कमी को दर्शाता है।

ऐतिहासिक रिकॉर्ड: भारत में मानसून के 126 साल के इतिहास में यह दूसरा सबसे सूखा जून बीत रहा है।

2009 से तुलना: इससे पहले जून का सबसे खराब रिकॉर्ड 2009 में रहा था, जब कोटे से 49% कम बारिश हुई थी, जिससे मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में खेती पर बुरा असर पड़ा था।

मासिक कोटा: जून के महीने के लिए भारत का कुल वर्षा कोटा 165.4 मिमी है, जिसे हासिल करना फिलहाल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

क्षेत्रीय प्रभाव और देरी से आगमन

मानसून की यह देरी मुंबई जैसे बड़े शहरों में साफ तौर पर देखी जा रही है:

मुंबई में देरी: आमतौर पर मानसून 11 जून तक मुंबई पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसने अभी तक वहां दस्तक नहीं दी है।

पिछले वर्ष की तुलना: साल 2023 में भी मानसून देरी से आया था और 25 जून को मुंबई पहुँचा था।

वर्तमान स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, जैसा कि 2009 के सूखे के दौरान देखा गया था। अब सबकी नज़रें बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम पर टिकी हैं कि वह कितनी जल्दी सक्रिय होता है।

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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