यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-122 है। गुरुवार, 22 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए केंद्र के बदलावों से कैसे बढ़ सकता है आपका बिजली का बिल और पंजाब के किसान क्यों चाहते हैं पाकिस्तान बॉर्डर के पास खेती करना?
मुख्य सुर्खियां
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की स्पष्ट परिभाषा तय करने के लिए विशेषज्ञों के नाम मांगे हैं। अदालत चाहती है कि पर्यावरण, वन और भू-विज्ञान के विशेषज्ञ मिलकर समग्र रिपोर्ट तैयार करें।
दिल्ली सरकार ने शहर में ईवी को बढ़ावा देने के लिए 2026 में 7000 नए चार्जिंग पॉइंट और 100 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया है। हालांकि मौजूदा हालात में दिल्ली में 36 हज़ार से अधिक चार्जिंग पॉइंट्स की ज़रूरत है।
केंद्र सरकार ने गंगोत्री और यमुनोत्री इलाके में 17,625 पेड़ों को काटने की मंज़ूरी दे दी है। साथ ही सरकार 2,800 से ज़्यादा ग्लेशियल झीलों और वाटर बॉडीज पर नज़र रख रही है। यह बात ngt का एक जवाब देते हुए खुद सरकार ने बताई।
फुकुशिमा हादसे के बाद पहली बार जापान के काशिवाज़ाकी-कारीवा परमाणु संयंत्र का एक रिएक्टर फिर शुरू किया गया। चिंताजनक बात यह है कि इसे वही कंपनी संचालित कर रही है, जिस पर पहले सुरक्षा में चूक के आरोप लगे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ की सुखना झील की बदहाली पर गहरी नाराज़गी जताई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि नौकरशाही, राजनीति और बिल्डर गठजोड़ के कारण झील विनाश के कगार पर पहुंच गई है।
इस साल मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों से 51 लाख 75 हज़ार मीट्रिक टन धान खरीदा है। यह अब तक की सबसे अधिक खरीद है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर के कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वह दूषित पानी से हुई मौतों के मामले से संबंधित दस्तावेज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करें ताकि उनसे कोई छेड़छाड़ न हो सके। इस बीच इंदौर के भागीरथपुरा में 10 दिनों में डायरिया के 65 नए केस आए हैं।
विस्तृत चर्चा
नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी (NEP) 2026 का ड्राफ्ट
केंद्र सरकार ने 21 जनवरी 2026 को नई नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी किया है, जो 2005 की पुरानी नीति का स्थान लेगी। इस नई नीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
टैरिफ में वार्षिक संशोधन: इस प्रस्ताव के अनुसार, यदि राज्य बिजली नियामक (State Electricity Regulators) समय पर टैरिफ ऑर्डर जारी नहीं कर पाते, तो बिजली की दरों में इंडेक्स-लिंक्ड वार्षिक संशोधन (Index-linked Revision) किया जाएगा। इससे कई राज्यों में बिजली के बिल बढ़ने का अनुमान है।
डिस्कॉम (DISCOMs) का वित्तीय स्वास्थ्य: वर्तमान में डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियाँ भारी नुकसान और कर्ज से जूझ रही हैं, जिसका मुख्य कारण टैरिफ रिवीजन में होने वाली देरी है। केंद्रीय बिजली मंत्री ने ‘कॉस्ट रिफ्लेक्टिव टैरिफ’ (लागत के अनुरूप दरें) की आवश्यकता पर जोर दिया है और मुफ्त बिजली के वादों के खिलाफ चेतावनी दी है।
बिजली क्षेत्र में प्रगति: भारत ने 2021 में यूनिवर्सल इलेक्ट्रिफिकेशन हासिल कर लिया है और बिजली उत्पादन की क्षमता चार गुना बढ़ गई है। 2024-25 में प्रति व्यक्ति बिजली की खपत बढ़कर 10460 किलोवाट प्रति घंटे हो गई है।
रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज: वर्तमान में भारत की कुल बिजली क्षमता का आधा हिस्सा रिन्यूएबल एनर्जी से आता है। नई नीति में 2030 तक रिन्यूएबल और कन्वेंशनल पावर के बीच समानता लाने और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बैटरी और हाइड्रो प्रोजेक्ट) के मार्केट-आधारित उपयोग पर जोर दिया गया है।
उपभोक्ताओं के लिए नए अधिकार: उपभोक्ताओं को यह अनुमति दी जा सकती है कि वे अपने रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम या स्टोरेज से बची हुई बिजली को सीधे दूसरे उपभोक्ताओं या एग्रीगेटर्स के साथ ट्रेड (बेच) कर सकें।
पंजाब के सीमावर्ती किसानों की चुनौतियां
पंजाब के 532 किलोमीटर लंबे भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर लगी सुरक्षा बाड़ (Fencing) के कारण वहां के किसानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बाड़ और जमीन का विवरण: इस बॉर्डर पर लगी कंटीली बाड़ कई स्थानों पर अंतरराष्ट्रीय सीमा से काफी अंदर है। इस बाड़ और बॉर्डर के बीच 21,500 एकड़ किसानों की निजी जमीन और 10,000 एकड़ सरकारी जमीन स्थित है।
पहुंच की पाबंदियां: किसानों को अपनी ही जमीन पर काम करने के लिए बीएसएफ के गेट से अनुमति लेनी पड़ती है। यह गेट केवल कुछ घंटों और कुछ ही दिनों के लिए खुलता है, जिससे ट्रैक्टर और मजदूरों को वहां ले जाना बहुत मुश्किल हो जाता है। प्रत्येक किसान के साथ सुरक्षा के लिए गार्ड भी मौजूद रहता है और आवाजाही की सख्त सीमाएं तय हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: यह बाड़ 1988 में मिलिटेंसी के दौर के दौरान लगाई गई थी। किसानों को मुआवजे के तौर पर ₹2,500 प्रति एकड़ की बात कही गई थी, लेकिन यह राशि उन्हें नियमित रूप से नहीं मिली।
किसानों की मांगें: किसानों की मांग है कि तकनीक (जैसे ड्रोन और आधुनिक सर्विलांस) बदलने के साथ ही अब इस बाड़ को अंतरराष्ट्रीय सीमा (जीरो लाइन) के करीब शिफ्ट किया जाना चाहिए ताकि वे अपनी जमीन तक बिना रोक-टोक पहुंच सकें।
बीएसएफ अधिकारियों का कहना है कि यह बाड़ 40 साल पुरानी हो चुकी है और नई बाड़ लगाने में काफी समय और पैसा खर्च होगा। पंजाब के मुख्यमंत्री ने कहा है कि केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सैद्धांतिक सहमति दी है।
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