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लंबी सरकारी लापरवाही से थेलेसीमिया पीड़ित बच्चे हुए एचआईवी पॉजिटिव

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-197 है। मंगलवार, 21 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए सतना में कैसे सरकारी लापरवाही के कारण थेलेसेमिक बच्चे हुए एचआईवी पॉजिटिव और मध्य प्रदेश में मौसम का पूर्वानुमान कैसे तहसील और गांवों स्तर पर लगाया जा सकेगा?  


मुख्य सुर्खियां

जापान के पूर्वोत्तर तट पर 7.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की है और हजारों निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया है।


दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने सभी सरकारी विभागों को समयबद्ध तरीके से रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया है। ऐसा न करने पर पानी का कनेक्शन काटने जैसी सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।


असम के गुवाहाटी में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। एक खुले नाले में गिरने से एक महिला की मौत हो गई और शहर के कई हिस्सों में जलभराव के कारण स्कूल बंद कर दिए गए हैं।


मौसम विभाग ने अगले 15 दिनों में पूर्वोत्तर भारत (असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश) में रिकॉर्ड बारिश की संभावना जताई है, जबकि मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम सूखा रहने का अनुमान है।


ओडिशा सरकार ने मरीन स्पेशल प्लान शुरू करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य मरीन स्पीशीज की सुरक्षा और समुद्री संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है।


जबलपुर में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ पुलिस की छापेमारी के दौरान 21 वर्षीय एक युवक नर्मदा नदी में कूद गया। डूबने से युवक की मौत हो गई।

विस्तृत चर्चा

सतना जिला अस्पताल में एचआईवी लापरवाही का मामला

सतना के वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल में बीते साल थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चे ब्लड ट्रांसफ्यूजन के बाद एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। अब इस मामले में विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आई है।

रिकॉर्ड और प्रबंधन की विफलता: जांच में स्वास्थ्य प्रणाली की भारी लापरवाही सामने आई है। रक्तदाताओं (ब्लड डोनर्स) का कोई सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया था; न तो उनके पते दर्ज थे, न ही उनके पेशे या हीमोग्लोबिन के स्तर की जानकारी थी। इसके अलावा, उपयोग की गई टेस्टिंग किटों के बैच नंबर और कंपनी संबंधी विवरण भी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं थे।

परिचालन संबंधी कमियां: ब्लड सेंटर में कर्मचारियों की भारी कमी देखी गई। जहां प्रतिदिन 40 से 50 डोनर्स आते थे, वहां डोनेशन रूम कथित तौर पर एक समय में केवल एक ही व्यक्ति द्वारा संचालित किया जा रहा था। काउंसलर का पद खाली होने के कारण दाताओं की कोई काउंसलिंग या स्क्रीनिंग नहीं की गई। इसके साथ ही, डोनेशन रूम में अक्सर अनधिकृत और संदिग्ध व्यक्तियों का आना-जाना भी देखा गया।

टीटीआई प्रोटोकॉल का उल्लंघन: ट्रांसमिशन ट्रांसमिटेड इंफेक्शन नियमों के अनुसार, दान किए गए रक्त की एचआईवी, हेपेटाइटिस और अन्य बीमारियों के लिए 4th जनरेशन ELISA या CLIA जैसी संवेदनशील तकनीकों से जांच होनी चाहिए।

अपर्याप्त परीक्षण: जांच में पाया गया कि जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच इन बच्चों को दी गई 204 यूनिट में से 35 यूनिट की जांच CLIA के बजाय ‘रैपिड कार्ड’ से की गई थी, जो कम संवेदनशील और सस्ते होते हैं।

निजी केंद्रों की भूमिका: जांच का दायरा एक निजी संस्थान ‘बिरला ब्लड सेंटर’ तक भी पहुँचा, जहां कई एक्सपायर्ड ब्लड यूनिट जारी करने की बात सामने आई, जिनमें से एक थैलेसीमिया पीड़ित लड़की को चढ़ाया गया था।

इस मामले में सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने निलंबित ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल और दो लैब तकनीशियनों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है।


डिजिटल मौसम निगरानी और कृषि सुरक्षा पहल

मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश की सभी 23,634 ग्राम पंचायतों में ऑटोमेटिक रेन गेज (ARG) और सभी 444 तहसीलों में ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन (AWS) स्थापित करने का निर्णय लिया है।

निवेश और फंडिंग: इस पूरी परियोजना पर करीब ₹100 करोड़ से ₹120 करोड़ का निवेश किया जाएगा। भारत सरकार कुल लागत का 50% हिस्सा ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) के रूप में देगी, जबकि शेष राशि राज्य सरकार और एजेंसियां वहन करेंगी।

तकनीकी विशेषता: यह सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमेटिक और सौर ऊर्जा से संचालित होगा। इसमें आधुनिक सेंसर और सिम कार्ड आधारित टेलीमेट्री सिस्टम लगा होगा।

रीयल-टाइम डेटा: यह उपकरण हर 15 मिनट में बारिश, हवा की गति, तापमान और नमी जैसे आंकड़ों को सीधे ‘विंड्स’ (WINDS) के केंद्रीय सर्वर पर भेजेंगे। इसमें मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे डेटा की शुद्धता बनी रहेगी।

किसानों और फसल बीमा के लिए महत्व: वर्तमान में मौसम का डेटा केवल जिला या ब्लॉक स्तर पर उपलब्ध होता है, जो स्थानीय स्तर (जैसे एक ही तहसील के अलग-अलग गांवों) की सटीक जानकारी नहीं दे पाता।

सटीक स्थानीय डेटा होने से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के फसल नुकसान का सही मूल्यांकन हो सकेगा और दावों के निपटान में होने वाली देरी या संदेह खत्म हो जाएगा।

इस डिजिटल सिस्टम के लागू होने से भविष्य में मुआवजे को लेकर होने वाली गड़बड़ियों या ‘शकुबा’ की गुंजाइश खत्म होने की उम्मीद है।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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