यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-118 है। शनिवार, 17 जनवरी को देश और दुनिया की पर्यावरण से जुड़ी बड़ी ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए मध्य प्रदेश में दूषित पेयजल पर NGT की सख्त टिप्पणी, पहाड़ों में सूखी सर्दी का असर, जम्मू-कश्मीर में जंगल की आग और भोपाल में चल रही SNHC 2026 नेशनल कॉन्फ्रेंस की अहम बातें।
मुख्य सुर्खियां
NGT ने मध्य प्रदेश में पीने के पानी की गंदी सप्लाई पर गहरी चिंता जताई है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि यह मामला पर्यावरण और जन स्वास्थ्य दोनों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। कई शहरों में पानी की पाइपलाइन और सीवर लाइन बहुत पास बिछी हैं, जिससे गंदा पानी सप्लाई में मिल रहा है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 में ऐसा ही मामला सामने आया था। गंदा पानी पीने से कई लोग बीमार हुए और कुछ की मौत भी हुई। NGT ने राज्य सरकार को पूरे सिस्टम को सुधारने और सख्त निगरानी के निर्देश दिए हैं।
इस साल सर्दियों में उत्तराखंड से हिमाचल और जम्मू-कश्मीर तक पहाड़ों पर बर्फ और बारिश बेहद कम हुई। पर्वतीय चोटियां सूखी और खाली नजर आ रही हैं। IMD के मुताबिक दिसंबर और जनवरी में उत्तराखंड में बारिश नहीं हुई। हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भी बारिश और बर्फबारी कम रही। देश में सर्दी का मौसम सूखा रहा।सबसे ज्यादा असर नॉर्थ वेस्ट रीजन में देखा गया। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वेस्टर्न डिस्टर्बेंस कमजोर रहे। इससे पानी, खेती और जंगलों पर संकट बढ़ रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी मध्य प्रदेश को 4400 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं की सौगात देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में 8 नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और शिलान्यास होगा।
181 किलोमीटर लंबी सड़कें सेंट्रल इंडिया और बुंदेलखंड की कनेक्टिविटी मजबूत करेंगी। रतापानी वाइल्डलाइफ सेंचुरी में अंडरपास के साथ 4 लेन सड़क बनेगी। इससे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
लंबे ड्राई स्पेल के चलते जम्मू-कश्मीर में फिर से जंगल की आग की घटनाएं सामने आई हैं। फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के मुताबिक 2025-26 में अब तक 310 मामले दर्ज हुए हैं। पिछले साल इसी अवधि में 1,276 घटनाएं हुई थीं। अप्रैल में सबसे ज्यादा 127 आग की घटनाएं सामने आईं। अब तक 880 हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जल चुका है।
दक्षिणी अफ्रीका के तीन देशों साउथ अफ्रीका, मोजाम्बिक और जिम्बाब्वे में बाढ़ से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। लगातार बारिश से हालात बिगड़े। मोजाम्बिक सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। यहां दो लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए और हजारों घर तबाह हो गए।
दिल्ली सरकार अगले चार साल में प्रदूषण कम करने के लिए नई बसें, ईवी पॉलिसी और सड़कों के सुधार पर काम करेगी। इस पूरे मामले पर मैं अपने साथी पल्लव जैन से जानकारी लेता हूं।
भोपाल में चल रही 4th National Conference on Lesser Known Species मध्य प्रदेश के लिए अहम मानी जा रही है। देश भर से आए विशेषज्ञ कम जानी जाने वाली प्रजातियों पर चर्चा कर रहे हैं। पहले दिन कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ, यह जानते हैं अपने साथी पल्लव जैन से।
विस्तृत चर्चा
भोपाल में कम ज्ञात प्रजातियों पर चर्चा
भोपाल में ‘लेसर नोन स्पीशीज’ (कम ज्ञात प्रजातियों) पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन का मुख्य उद्देश्य उन प्रजातियों पर ध्यान केंद्रित करना था, जिन्हें अक्सर बाघ या चीते जैसी लोकप्रिय प्रजातियों की तुलना में नजरअंदाज कर दिया जाता है। पॉडकास्ट में बताया गया कि संरक्षणवादी और सरकारी अधिकारी अपने शोध और अनुभवों को साझा करने के लिए एक मंच पर आए, क्योंकि ये कम ज्ञात प्रजातियां संकटग्रस्त हैं और इनके लुप्त होने का खतरा बना हुआ है, इसलिए इन पर शोध करना और चर्चा करना अत्यंत आवश्यक है।
सम्मेलन में संरक्षण से जुड़ी कुछ गंभीर चुनौतियों और विफलताओं को भी स्वीकार किया गया। मुख्य वन्यजीव वार्डन शुभंजन सेन ने माना कि गोडावन और लेसर फ्लोरिकन पक्षियों का लगभग खत्म हो जाना एक बड़ी नाकामी है, और पिछले मानसून सर्वेक्षण के परिणाम भी अच्छे नहीं रहे। इसके अलावा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वी.एन. अंबेडे ने विकास कार्यों के दौरान काटे जाने वाले पेड़ों पर मौजूद घोंसलों को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि असद रहमानी ने चेतावनी दी कि घास के मैदानों (Grasslands) में रहने वाले जीव सबसे अधिक खतरे में हैं,। यह भी बताया गया कि मध्य भारत में जंगली भैंसों की संख्या अब 50 से भी कम रह गई है।
चुनौतियों के बावजूद, सम्मेलन में कुछ सकारात्मक आंकड़े और भविष्य की योजनाएं भी साझा की गईं। चंबल नदी में अब 2462 घड़ियाल मौजूद हैं और गंगा डॉल्फिन की संख्या में सुधार हुआ है; साथ ही मगरमच्छ संरक्षण कार्यक्रम के 50 साल पूरे हो चुके हैं। अन्य सफलताओं में हिलमैना पक्षी शामिल हैं, जिनकी संख्या अब जंगलों में 200 से 300 के बीच है। भविष्य की योजनाओं के तहत, गांधी सागर अभयारण्य में जल्द ही स्याह घोष (Caracal) के लिए एक विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा और घड़ियालों के घोंसलों को खनन से बचाने को प्राथमिकता दी गई है।
विशेषज्ञों ने संरक्षण की रणनीतियों पर जोर देते हुए कहा कि केवल जानवरों की गिनती करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके व्यवहार और पर्यावरण पर गहरा शोध करना भी जरूरी है,। भारतीय वन्यजीव संस्थान की शोमिता मुखर्जी ने बताया कि भारत में दुनिया की लगभग 75% जंगली बिल्लियां पाई जाती हैं, इसलिए ‘वेस्टलैंड’ (बंजर भूमि) को बचाने के लिए नीतिगत फैसले लेने होंगे। सुमित डुकिया ने राजस्थान में स्थानीय युवाओं को संरक्षण प्रयासों से जोड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ द्वारा इस सम्मेलन की विस्तृत कवरेज और विशेषज्ञों के साक्षात्कार उनके यूट्यूब चैनल और वेबसाइट पर उपलब्ध कराए गए हैं,।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का प्रदूषण नियंत्रण प्लान
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी में प्रदूषण को 24/7 नियंत्रित करने और अगले चार वर्षों में पीएम 2.5 के स्तर को कम करने के लिए एक नई सरकारी योजना की घोषणा की है। इस चर्चा के अनुसार, सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए ‘ईवी पॉलिसी 2.0’ के तहत सब्सिडी देगी और धूल प्रदूषण कम करने के लिए बड़े पैमाने पर सड़कों का विकास करेगी।
योजना में मार्च 2029 तक बस बेड़े को बढ़ाकर 14,000 करने का लक्ष्य है, जिसमें लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए 500 छोटी इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी। इसके अलावा, लगभग 3300 किलोमीटर सड़कों के पुनर्निर्माण और वाहनों को मैनेज करने के लिए स्मार्ट पार्किंग मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करने की भी बात कही गई है। चर्चा के अंत में यह नोट किया गया कि वर्तमान सरकार के आने के बाद प्रदूषण गंभीर स्तर पर है और मुख्य चुनौती इस डस्ट पॉल्यूशन कंट्रोल रणनीति को जमीनी स्तर पर जल्द से जल्द लागू करने की होगी
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