यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड- 217 है। शुक्रवार, 15 May को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए उत्तरकाशी में खीर गंगा नदी को मोड़ने की कोशिशों पर उठ रहे सवाल
आज की प्रमुख पर्यावर्णीय खबरें
जैसलमेर, राजस्थान के रामदेवरा और सुदासरी ब्रीडिंग सेंटर में आर्टिफिशियल इंसेमिनेशन तकनीक के जरिए ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के दो नए बच्चों का जन्म हुआ है, जिससे इन क्रिटिकली एंडेंजर्ड पक्षियों की संख्या अब 85 तक पहुंच गई है।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आंधी तूफान और भारी बारिश की वजह से 31 लोगों की मौत हो गई है।
एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मिथेनॉल के इंपोर्ट को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 37,500 करोड़ के कोल गैसिफिकेशन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है।
एविएशन फ्यूल के बढ़े हुए दामों और ईंधन संकट की वजह से एयर इंडिया ने अपनी 400 से ज्यादा इंटरनेशनल फ्लाइट्स का ऑपरेशन कम करने का फैसला किया है।
दिल्ली के सेंट्रल रिज के 10 एकड़ क्षेत्र को मियावाकी तकनीक से ग्रीन करने के फैसले का विरोध हो रहा है क्योंकि एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह तकनीक छोटे अर्बन स्पेस के लिए है, बड़े क्षेत्रों के लिए नहीं।
तो यह ती आज की प्रमुख हेडलाईन्स आईये कुछ खबरों पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
सरकार ने 14 खरीफ फसलों की MSP बढ़ाई
केंद्र सरकार ने बुधवार को एक कैबिनेट बैठक की, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने बैठक में किसानों के फायदे से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है। कैबिनेट ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए धान, मक्का, सोयाबीन और ज्वार समेत 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है।

इसके अलावा भी कैबिनेट ने कई अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मोदी सरकार के इन फैसलों की जानकारी दी।
सरकार ने सबसे अधिक बढ़ोतरी सूरजमुखी के बीज, कपास, तिल और नाइजरसीड के एमएसपी में की है। केंद्र का यह फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे दालों और तिलहनों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का उद्देश्य है कि लागत से कम से कम 50 फीसदी अधिक मुनाफा मिले।
कैबिनेट ने सबसे अधिक सूरजमुखी के बीज के एमएसपी में 622 रुपये प्रति क्विंटल, कपास के एमएसपी में 557 रुपये प्रति क्विंटल, नाइजरसीड के एमएसपी में 515 रुपये प्रति क्विंटल और तिल के एमएसपी में 500 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है।
उत्तरकाशी में खीर गंगा को मोड़ना एक खतरा
यह पॉडकास्ट उत्तराखंड के उत्तरकाशी में खीर गंगा नदी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा करता है। पिछले साल 5 अगस्त को खीर गंगा में आई भयानक बाढ़ ने धौली गाँव में भारी तबाही मचाई थी, जिसमें कई लोग मारे गए और 67 लोग अभी भी लापता हैं। वर्तमान में, उत्तराखंड का सिंचाई विभाग नदी को उसके पुराने रास्ते पर वापस लाने के लिए लगभग 300 मीटर लंबा एक नहर चैनल बना रहा है क्योंकि नदी अब खेतिहर जमीन से होकर बह रही है।

हालाँकि, पर्यावरण विशेषज्ञ और भूवैज्ञानिक इस फैसले पर गहरी चिंता जता रहे हैं। उनका मानना है कि हिमालय जैसे संवेदनशील इलाके में नदियों को जबरदस्ती नियंत्रित करना और मोड़ना बेहद खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के कारण जमा हुए पत्थर और बोल्डर इस बनाए गए चैनल को ब्लॉक कर सकते हैं, जिससे नदी अपना रास्ता बदलकर भविष्य में और भी अधिक नुकसान पहुंचा सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि खीर गंगा को उस नए रास्ते पर ही बहने देना चाहिए जो उसने इस आपदा के बाद प्राकृतिक रूप से बनाया है। उनका मानना है कि असली जरूरत हिमालय के संवेदनशील इलाकों में मानवीय हस्तक्षेप को नियंत्रित करने की है, न कि नदियों को जबरदस्ती मोड़ने की। अंततः, यह पूरी स्थिति हिमालय में बढ़ते जलवायु परिवर्तन के जोखिमों और विकास परियोजनाओं के बीच एक सही संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर देती है
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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