मध्य प्रदेश में थर्मल पावर प्लांट के लिए छिपाए गए पर्यावरणीय तथ्य, केन-बेतवा विस्थापितों पर अत्याचार और दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की कोशिशें — पर्यावरण आज के एपीसोड में इन्ही विषयों पर होगी बात।
आज की प्रमुख पर्यावर्णीय खबरें
दिल्ली में निर्माण और ध्वस्तीकरण (कंस्ट्रक्शन और डिमॉलिशन) साइट पर हाई-डेंसिटी डस्ट बैरियर लगाना अनिवार्य होगा। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने तत्काल प्रभाव से यह नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं। निर्माण साइटों से होने वाला धूल उत्सर्जन दिल्ली में प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है, जिसे नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।
दिल्ली सरकार अब पार्कों और बगीचों के रखरखाव एवं विकास के लिए एनजीओ और आवासीय सोसाइटियों को 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देने की तैयारी कर रही है। पहले सोसाइटियों को केवल 90 प्रतिशत वित्तीय मदद मिलती थी। इस पहल का उद्देश्य यह है कि आर्थिक रूप से कमज़ोर आवासीय सोसाइटियाँ भी हरित पार्क विकसित कर सकें।
मध्य प्रदेश में सतपुड़ा के जंगल और तवा नदी के बीच एक थर्मल पावर प्लांट लगाया जाना है। पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance) प्राप्त करने के लिए इस परियोजना में कई महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं। नदी और वेटलैंड का एक बड़ा हिस्सा इस परियोजना में उपयोग किया जाएगा, जिससे वन्यजीव और जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) को गंभीर नुकसान होना तय है। वन विभाग का कहना है कि उनसे अनुमति तक नहीं ली गई।
केन-बेतवा लिंक परियोजना में विस्थापितों की लड़ाई लड़ रहे समाजसेवी अमित भटनागर जमानत मिलने के बाद से लापता हैं। उनके परिजनों ने अपहरण का आरोप लगाया है।
केन बेतवा लिंक परियोजना के विरोध की लड़ाई तेज़ हुई

रिपोर्टर- चंद्र प्रताप तिवारी
आंदोलन काफी गंभीर स्थिति में है। सोमवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी छतरपुर पहुँचे। वे केन-बेतवा लिंक परियोजना से विस्थापित होने वाले लोगों से मिले। उन्होंने सीधे प्रशासन को चेताया कि अगर इन लोगों की बात नहीं सुनी गई, तो राहुल गांधी खुद यहाँ आ सकते हैं।
लेकिन इस आंदोलन के फेस अमित भटनागर कल तक फॉर्मली पुलिस की हिरासत में थे। दरअसल उन्हें 8 तारीख को होने वाले मार्च से पहले गिरफ्तार कर लिया गया था। कल जब उनके भाई अंकित ने उनकी जमानत करवाई तो उन्हें रिहा तो किया, लेकिन उसके बाद उनका कहीं पता नहीं चला। उनके भाई का आरोप है कि वन विभाग के लोग उन्हें अपने साथ ले गए हैं। साथ ही उन्होंने आशंका व्यक्त की है कि उनके भाई का अपहरण भी किया जा सकता है।
दरअसल, यह मामला पेचीदा है। 8 तारीख को जो अमित की हिरासत हुई थी, उसकी शिकायत रूंझ डैम की कंस्ट्रक्शन कंपनी की ओर से की गई थी। इस मामले में अमित पर कई प्रकरण दर्ज किए गए हैं, जिनमें अनलॉफुल असेंबली से लेकर मारपीट तक की धाराएँ हैं। लेकिन कल की ही तारीख में अमित के परिवार को एक सूचना दी गई है कि 7 अप्रैल, यानी ठीक एक महीने पहले, उन पर वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी, उसके संबंध में उन्हें आज न्यायालय में पेश किया जाना है। लेकिन उनके परिवार को गिरफ्तारी का कोई नोटिस नहीं दिया गया।
अमित भटनागर की गिरफ्तारी के बाद से ही प्रभावित गाँव के लोग सड़कों पर थे। लेकिन कल जो घटनाक्रम सामने आया है, उसके बाद जो विज़ुअल्स और ज़मीनी जानकारी मुझे मिल रही है, उसमें लोग रात भर प्रदर्शन पर डटे हुए हैं। आपको याद होगा पल्लव, कि अप्रैल में भटनागर के नेतृत्व में गाँव वालों ने चिता प्रदर्शन किया था। कल रात भर ग्रामीण उन्हीं चिताओं पर लेटे रहे।
ये सभी स्थितियाँ बताती हैं कि पन्ना और छतरपुर में माहौल काफी तनावपूर्ण है। जो प्रदर्शन विस्थापितों के मुआवज़े और उस भू-दृश्य (लैंडस्केप) के पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए शुरू हुआ था, वह अब अपने सामने एक नई चुनौती देख रहा है।
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