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भारत में एक तरफ भीषण गर्मी, वहीं दूसरी तरफ मानसून की दस्तक।

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड- 216 है। गुरुवार, 13 May को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए देश में बढ़ती हीटवेव, समय से पहले अंडमान सागर पहुंच रहे ...

यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड- 216 है। गुरुवार, 13 May को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए देश में बढ़ती हीटवेव, समय से पहले अंडमान सागर पहुंच रहे मॉनसून और मौसम में हो रहे बड़े बदलावों के बारे में

आज की प्रमुख पर्यावर्णीय खबरें

महाराष्ट में प्याज़ किसान को मिल रहा प्रति किलो 50 पैसे का भाव, फसल मंडी में ले जाने पड़ रहा महंगा, कई किसानों ने कर्ज लेकर लगाई थी प्याज़, दाम न मिलने से आर्थिक बोझ बढ़ा। सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं किसान।


कूनो नैशनल पार्क में जन्में केजीपी 12 चीता के सभी चार शावकों की मौत हो गई है, मौत के कारणों की जांच जारी है, लेकिन प्राथमिक तौर पर तेंदुए का हमला वजह बताई जा रही है। एक माह पहले ही देश में इन शावकों के जन्म का जश्न मनाया गया था क्योंकि जंगल के भीतर जन्म लेने वाले यह पहले चीता थे।


काज़ीरंगा नैशनल पार्क से करबी एंगलॉग हिल्स तक जाने वाले वाईल्ड लाईफ कॉरिडोर पर अवैध निर्माण किया जा रहा है, इसकी शिकायत सुप्रीम कोर्ट के पैनल से की गई है। यह कॉरीडोर फ्लड्स के समय वाईळडलाईफ मूवमेंट में मददगार है।


भारत में बढ़ती महंगाई के बाद भी वर्ष 2012 से अब तक ओल्ड एज पेंशन में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत सरकार 200 रुपए प्रतिमाह वृद्ध जनों को डायरेक्ट ट्रांस्फर करती है।


अल नीनो की वजह से एक्सट्रीम हीट और बिलो एवरेज मॉनसून के फोरकास्ट को देखते हुए मुंबई में 15 मई से पानी की सप्लाय में 10 फीसदी की कटौती शुरु की जा रही है। मुंबई वॉटर स्पलाय के लिए अपने 7 बड़े तालाबों पर निर्भर है, जिनमें लगातार जल स्तर गिरता जा रहा है।


हफ्ते के अंत तक अंडमान सागर पहुंच जाएगा साउथ वेस्ट मॉनसून, यह भारत में 70 फीसदी बारिश के लिए जिम्मेदार है। हर वर्ष 22 मई तक पहुंचता है अंडमान सागर इस वर्ष 10 दिन जल्दी आने का अनुमान।


तो यह थी आज की प्रमुख हेडलाईन्स, देश में एक्सट्रीम हीटवेव से लोग परेशान हैं, मॉनसून के जल्दी आने की खबर एक राहत हो सकती है, आईये जानते हैं हमारे रिपोर्टर वाहिद भट से देशभर के मौसम का हाल और क्यों इस बार जल्दी आ रहा है मॉनसून।

भारत में गर्मी का कहर और जल्द मानसून

भारत के मौसम में इन दिनों काफी बदलाव देखा जा रहा है, जहां एक तरफ देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी और हीट वेव (लू) का प्रकोप है, वहीं दूसरी तरफ मानसून के जल्दी आने की खबर सामने आई है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तेज गर्मी ने लोगों को काफी परेशान कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान के बाड़मेर में तापमान 47.3° सेल्सियस तक पहुँच गया है, जो इस सीजन का सबसे अधिक तापमान है, जबकि जैसलमेर और जोधपुर जैसे इलाकों में भी यह 44° से ऊपर रिकॉर्ड किया गया है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की तरफ से आने वाली गर्म हवाओं के कारण राजस्थान के थार इलाके में गर्मी बहुत अधिक बढ़ गई है। मौसम विभाग (IMD) ने यह भी चेतावनी दी है कि उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में 18 मई तक तापमान धीरे-धीरे और बढ़ सकता है।

explained: what is land surface temperature that is increasing in Delhi
An elderly man walks a child to school along a sun-baked road as temperatures climb.

इन भीषण परिस्थितियों के बीच देश के लिए एक राहत की खबर भी है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस हफ्ते अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह तक पहुँच सकता है। यह मानसून के आने के सामान्य समय (जो कि 22 मई माना जाता है) से 5-6 दिन पहले है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि मानसून के जल्दी दस्तक देने का यह मतलब नहीं है कि इस पूरे सीजन में बारिश भी ज्यादा होगी। बंगाल में बने कम दबाव के क्षेत्र और मौसम में इस बदलाव के कारण केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर-पूर्व के राज्यों में अगले कुछ दिनों में बारिश होने की संभावना भी जताई गई है।

उत्तर भारत के कुछ इलाकों में भी मौसम बदलने के आसार हैं। राजस्थान के श्रीगंगानगर जैसे इलाकों में ठंडी हवाओं के साथ बारिश और ओले पड़ने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर में भी आसमान में बादल छाए रहने, 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और हल्की बारिश होने का अनुमान है, जिससे वहां का तापमान 37 से 40° सेल्सियस के बीच रह सकता है। गर्मी के इस कहर को देखते हुए मौसम विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने और दिन के सबसे गर्म समय (पीक आवर्स) में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है

ग्राउंड रिपोर्ट की बात

पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।

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Support Ground Report to keep independent environmental journalism alive in India

We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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