यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-184 है। सोमवार, 6 अप्रैल को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए भारत के बिजली नियामक ने पवन और सौर ऊर्जा उत्पादकों को कौन सी नई छूट दी है?
मुख्य सुर्खियां
उत्तर प्रदेश और दिल्ली में एक फर्जी दवा रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। 50 करोड़ रुपये की नकली जीवन रक्षक दवाएं बनाने के आरोप में पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।
गुजरात में मिड-डे मील योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले तीन वर्षों में घटी है, लेकिन इस पर होने वाला खर्च 57% से अधिक बढ़ गया है। सरकार के अनुसार, खर्च में यह वृद्धि इनपुट लागत और बर्तनों जैसी नई वस्तुओं की खरीद के कारण हुई है।
दिल्ली सरकार ने प्रवासियों की सुविधा के लिए 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर खरीदने के नियमों में ढील दी है। अब उपभोक्ता बिना किसी एड्रेस वेरिफिकेशन के केवल एक वैध पहचान पत्र दिखाकर ये सिलेंडर खरीद सकते हैं।
सिक्किम के मंगन जिले में भारी बारिश और बर्फबारी के बाद हुए भूस्खलन के कारण 800 से अधिक पर्यटक फंस गए। सड़क मार्ग टूटने की वजह से प्रशासन सोमवार से सेना और बीआरओ (BRO) की मदद से बचाव अभियान शुरू करने की योजना बना रहा है।
मध्य प्रदेश के 17 जिलों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में कटी हुई गेहूं की फसल भीग गई। भोपाल में पारा गिरकर 33.4 डिग्री पर पहुंच गया, जो अप्रैल के महीने में पिछले 2 साल का सबसे कम तापमान है।
खराब मौसम और ओलों की मार से आम की फसल को भारी नुकसान हुआ है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल आम की पैदावार में 30% तक की गिरावट आ सकती है और आपूर्ति घटने से इसके दाम 10-25% तक बढ़ सकते हैं।
विस्तृत चर्चा
नए नियम लागू करने में देरी और रीन्यूबल एनर्जी प्रोड्यूसर्स को लाभ
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) द्वारा पावर जनरेटर्स के लिए नए नियमों को लागू करने की समय सीमा एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। इससे विंड और सोलर पावर जनरेटर्स को फायदा मिलेगा।
CERC ने पावर जनरेटर्स पर तय मात्रा से कम या ज्यादा बिजली उत्पादन करने पर लगने वाली सख्त पेनल्टी के नियमों को टाल दिया है। पहले ये नियम अप्रैल 2026 से लागू होने वाले थे, लेकिन अब इन्हें अप्रैल 2027 तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।
रिन्यूएबल एनर्जी क्षेत्र को राहत
इस देरी का सबसे बड़ा लाभ विंड और सोलर पावर जनरेटर्स को मिलने वाला है।
अनिश्चितता: रिन्यूएबल एनर्जी पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करती है, जिसके कारण इनके उत्पादन का सटीक अनुमान लगाना बहुत कठिन होता है।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में रिन्यूएबल एनर्जी जनरेटर्स को कोल (कोयला) या हाइड्रो पावर जैसे पारंपरिक स्रोतों की तुलना में नियमों में कुछ ढील मिली हुई है। हालांकि, नए नियमों का उद्देश्य इन रिन्यूएबल स्रोतों पर भी पारंपरिक स्रोतों के समान ही पेनल्टी लगाना है।
डेविएशन चार्ज क्या है?
डेविएशन चार्ज एक प्रकार का आर्थिक जुर्माना है जो ग्रिड ऑपरेटर्स द्वारा बिजली उत्पादकों पर लगाया जाता है।
वजह: यह जुर्माना तब लगता है जब बिजली का वास्तविक उत्पादन, पहले से तय की गई (अनुबंधित) सप्लाई से कम या ज्यादा होता है।
उदाहरण: यदि किसी सोलर प्लांट ने 10 मेगावाट ऑवर बिजली देने का अनुबंध किया है, लेकिन उत्पादन इससे कम या ज्यादा होता है, तो ग्रिड की स्थिरता प्रभावित होती है और उत्पादक पर चार्ज लगाया जाता है।
ग्रिड स्थिरता की चुनौतियां
ग्रिड को संतुलित रखना ग्रिड ऑपरेटर्स के लिए एक बड़ी चुनौती है, खासकर जब रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग बढ़ रहा हो।
संतुलन बनाए रखना: यदि उत्पादन तय मात्रा से कम है, तो ऑपरेटर्स को दूसरे स्रोतों से बिजली मांगनी पड़ती है; और यदि ज्यादा है, तो अन्य प्लांट से उत्पादन कम करना पड़ता है।
इंटरमिटेंट नेचर: हवा न चलने पर विंड एनर्जी और धूप न होने पर सोलर एनर्जी का उत्पादन अचानक गिर सकता है, जिससे ग्रिड में अस्थिरता पैदा होती है।
नए नियमों का मुख्य उद्देश्य
भारत तेजी से अपने ग्रिड में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है, जिससे प्रेडिक्शन (पूर्वानुमान) में छोटी सी गलती भी बड़ा संकट पैदा कर सकती है।
इन सख्त नियमों का मकसद बिजली उत्पादकों को अधिक सटीक अनुमान लगाने के लिए प्रोत्साहित करना है। नए नियमों के माध्यम से समय के साथ ग्रिड में होने वाली गड़बड़ियों को कम करना और सिस्टम का संतुलन बनाए रखना मुख्य लक्ष्य है।
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