स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रेन नहीं: आईसीएमआर, 73 लाख किसानों ने छोड़ी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदा के कारण 224 की मौत, भूमिहीनों को ज़मीन देने में मप्र दूसरे नंबर पर। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
आईसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि देश में H1N1 स्वाइन फ्लू का कोई नया स्ट्रैन सामने नहीं आया है। वर्तमान में फैल रहा वायरस इन्फ्लूएंजा ए (H1N1) pdm09 जैसा ही है, इसलिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है। दिल्ली में इस साल इन्फ्लूएंजा-ए के 2,300 से अधिक मामले मिले हैं, जिनमें से शुक्रवार तक 1,777 मामले H1N1 के थे।
केंद्र सरकार ने राज्यों को घरों में LPG से PNG (पाइप प्राकृतिक गैस) में स्विच करने के लिए जिला-स्तरीय प्रशासनिक सहायता देने को कहा है। पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को इस संबंध में पत्र लिखा है। सरकार का उद्देश्य परिवारों को LPG और PNG दोनों कनेक्शन रखने से रोकना है।
पिछले दो वर्षों में देश के 73 लाख किसानों (29.6%) ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को छोड़ दिया है। अकेले महाराष्ट्र में पिछले दो वर्षों में रिकॉर्ड 36.83 लाख किसान इस योजना से बाहर हो गए हैं। इसके विपरीत, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इस योजना से 3.88 लाख नए किसान जुड़े हैं।
हिमाचल प्रदेश में मानसून और भारी बारिश के कारण पिछले 55 दिनों में 224 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 91 मौतें भूस्खलन, बादल फटने और डूबने जैसी आपदाओं से हुई हैं। राज्य में अभी भी 149 सड़कें पूरी तरह बंद (blocked) हैं।
भूमिहीनों को जमीन देने में मध्य प्रदेश 95.84% की उपलब्धि के साथ देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य 38 हज़ार से ज्यादा ग्रामीण भूमिहीन परिवार चिह्नित हैं। इनमें से साढ़े 36 हज़ार से ज्यादा को जमीन आवंटित की जा चुकी है। इस सूची में पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ 99% के साथ पहले स्थान पर है।
मध्य प्रदेश में सिर्फ 13 दिनों में 9 गुना अधिक खाद उठाने का गंभीर मामला सामने आया है। यह धांधली तब शुरू हुई जब शासन ने 29 जुलाई को ई-टोकन सिस्टम बंद कर दिया और बिना प्रक्रिया के खाद वितरण शुरू हुआ। इस घोटाले की जांच अब सभी 15 जिलों के कलेक्टर करेंगे।
विस्तृत चर्चा
मध्य प्रदेश का पूर्वी हिस्सा इस वक़्त बाढ़ से जूझ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने रीवा और शहडोल संभाग में भारी बारिश और बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। पूरा अपडेट बता रहे हैं वाहिद भट।
मध्य प्रदेश मौसम और बाढ़ संकट
मध्य प्रदेश में एक बार फिर से मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है। विशेष रूप से रीवा और शहडोल संभागों में भारी बारिश के बाद बाढ़ और जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वयं रीवा का दौरा किया और वहां चल रहे राहत और बचाव कार्यों की समीक्षा की।
प्रशासन और राहत कार्य के लिए मुख्य निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को त्वरित राहत पहुंचाने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं:
बुनियादी सुविधाएं: प्रभावित लोगों को तुरंत भोजन, शुद्ध पीने का पानी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
विशेष चिकित्सा शिविर: प्रभावित ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष मेडिकल कैंप लगाए जाएं।
वित्तीय सहायता (RBC 6-4): बाढ़ में जिन लोगों के घर या अन्य सामान नष्ट हो गए हैं, उन्हें आरबीसी 6-4 (RBC 6-4) के तहत तत्काल आर्थिक सहायता और राहत राशि प्रदान की जाए।
बुनियादी ढांचे की बहाली: बिजली आपूर्ति को तुरंत बहाल करने तथा जल स्रोतों व हैंडपंपों की साफ-सफाई पर विशेष बल दिया गया है ताकि संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोका जा सके।
पशु चिकित्सा: प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के इलाज के लिए भी विशेष पशु चिकित्सा टीमें तैनात की गई हैं।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान और अलर्ट
पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए चेतावनी: मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले 24 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
सक्रिय मौसम प्रणालियां: मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के संयुक्त प्रभाव के कारण इस क्षेत्र में भारी बारिश की आशंका है।
ऑरेंज अलर्ट: पूर्वी मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों, विशेषकर बालाघाट में 4 से 8 इंच तक भारी बारिश की संभावना के चलते ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
अति भारी बारिश की चेतावनी वाले जिले: जबलपुर, सागर, रायसेन, छिंदवाड़ा, शहडोल और रीवा जिलों में बहुत तेज बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
पश्चिमी मध्य प्रदेश की स्थिति: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों में हल्की से तेज बारिश होने की संभावना है।
मध्य प्रदेश में मानसून और बारिश के आंकड़े
चर्चा में मध्य प्रदेश में इस सीजन की बारिश से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े भी साझा किए गए हैं:
कुल दर्ज बारिश: राज्य में अब तक 629.8 मिलीमीटर (यानी 24.8 इंच) बारिश दर्ज की गई है।
बारिश में कमी (डेफिसिट): यह आंकड़ा सामान्य बारिश (जो इस समय तक 27.8 इंच होनी चाहिए थी) से लगभग 3 इंच कम है। वर्तमान में पूरे राज्य में 11% बारिश की कमी बनी हुई है।
संभागीय कमी: पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में बारिश का स्तर सामान्य से 19% तक कम है।
मौसम का आउटलुक: मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य प्रदेश में भारी बारिश का यह सिलसिला 27 अगस्त तक जारी रहने का अनुमान है।
बाढ़ और सूखे की दोहरी चुनौती
मध्य प्रदेश वर्तमान में एक अनूठी दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ जहाँ पूरे राज्य और विशेष रूप से पूर्वी हिस्सों में बारिश का कुल आंकड़ा सामान्य से काफी कम है, वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में कम समय में अत्यधिक बारिश होने के कारण अचानक बाढ़ और जलभराव का संकट पैदा हो गया है। आने वाले कुछ दिन रीवा, शहडोल और समूचे पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए मौसम के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहेंगे।
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