यह ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ के डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट का एपिसोड-106 है। शनिवार, 03 जनवरी को देश भर की पर्यावरणीय ख़बरों के साथ पॉडकास्ट में जानिए दुर्लभ मेंढ़कों के गायब होने का क्या है ‘फोटोग्राफी से कनेक्शन’ और बुलेट ट्रेन पर क्या है नया अपडेट?
मुख्य सुर्खियां
इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतों पर कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार ने नगर निगम कमिश्नर को पद से हटा दिया है। वहीं 2 अन्य बड़े अधिकारीयों को सस्पेंड कर दिया है।
इस मामले में शुक्रवार को सरकार ने एक स्टेटस रिपोर्ट भी सबमिट की है जिसमें केवल 4 मौतों की पुष्टि की गई है जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 16 तक बताया जा रहा है।
कैबिनेट सेकेट्री टीवी सोमनाथन ने कहा कि 38% इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट फारेस्ट, वाइल्डलाइफ और एनवायरनमेंट से जुड़े हुए मसलों के कारण लेट हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तिहाई से ज्यादा प्रोजेक्ट भूमि अधिग्रहण के मामलों के चलते लेट हो रहे हैं।
तेलंगाना प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार हैदराबाद की 185 में से कोई भी लेक ऐसी नहीं है जिसका पानी एक्वाटिक लाइफ के लिए अच्छा हो। इनमें डिजोल्व्ड ऑक्सिजन की मात्रा 0.3 मिलीग्राम/प्रति लीटर है जो 5 मिलीग्राम/प्रति लीटर से बहुत ही कम है।
निजी इलेक्ट्रिक वाहनों को शेयर्ड टैक्सी के रूप में चलाने के लिए दिल्ली सरकार ने इनप्रिंसिपल सहमती प्रदान कर दी है। हालांकि इसकी गाइडलाइन या नियम आने में अभी समय है।
अफगानिस्तान में अत्यधिक बारिश और बर्फ़बारी के कारण 17 लोगों की मौत हो गई वहीं कम से कम 11 लोग घायल हैं।
विस्तृत चर्चा
गैलेक्सी फ्रॉग: अनएथिकल फोटोग्राफी और विलुप्ति का खतरा
दुर्लभ प्रजाति और उनकी विशेषताएं गैलेक्सी मेंढक दुनिया के सबसे दुर्लभ और शानदार उभयचरों में से एक हैं, जो मुख्य रूप से केरल के पश्चिमी घाट में पाए जाते हैं। इनकी खोज पहली बार 1878 में हुई थी, लेकिन ये इतने दुर्लभ हैं कि इनके बारे में जानकारी बहुत सीमित है। ये मेंढक आकार में मात्र 2 से 3 सेंटीमीटर के होते हैं और आम मेंढकों की तरह आवाज नहीं निकालते; माना जाता है कि ये अपनी त्वचा पर मौजूद धब्बों के जरिए संवाद करते हैं,। इनके दुर्लभ होने के कारण इन्हें IUCN की लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में शामिल किया गया है।
अनएथिकल फोटोग्राफी का जानलेवा प्रभाव
‘जर्नल हेपेटोलॉजी नोट्स’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी घाट के सात गैलेक्सी फ्रॉग की मौत का कारण अनएथिकल फोटोग्राफी पद्धतियां हैं। फोटोग्राफर्स बेहतर फोटो के लिए:
इन मेंढकों को उनके प्राकृतिक आवास (सड़े हुए लट्ठों के नीचे) से निकालकर खुले में रख देते हैं।
इन्हें नंगे हाथों से पकड़ते हैं।
हाई-पावर कैमरा फ्लैश और लाइट के सामने इन्हें चार-चार घंटों तक एक्सपोज किया जाता है।
शोधकर्ता राजकुमार और उनकी टीम ने मार्च 2020 में जिन सात मेंढकों को खोजा था, वे 2021 और 2022 में उसी स्थान पर मृत या गायब पाए गए। रिपोर्ट के अनुसार, जब फोटोग्राफर्स लट्ठों को हटाते हैं, तो वहां का माइक्रो-हैबिटेट (नमी और तापमान) बदल जाता है। ये मेंढक ठंडे खून वाले जीव हैं और जीवित रहने के लिए इन्हें सटीक पारिस्थितिक स्थितियों की आवश्यकता होती है, जो इस मानवीय हस्तक्षेप के कारण नष्ट हो जाती है। विशेष रूप से 2021 में जब इन्हें मथिकेतन शोला नेशनल पार्क की फ्लैगशिप प्रजाति घोषित किया गया, तब से ‘फोटो टूरिज्म’ इनके लिए एक बड़ा खतरा बन गया है।
बुलेट ट्रेन परियोजना: तकनीकी मील का पत्थर और वित्तीय चुनौतियां
माउंटेन टनल-5 (MT5) की सफलता बुलेट ट्रेन परियोजना ने एक बड़ा तकनीकी पड़ाव पार कर लिया है। पालघर में विरार और बोइससर के बीच 1.5 किलोमीटर लंबी पहाड़ी सुरंग (MT5) की खुदाई पूरी हो गई है। इसे ‘टनल ब्रेकथ्रू’ कहा जा रहा है क्योंकि दो अलग-अलग दिशाओं से की जा रही खुदाई के सिरे अब मिल गए हैं। यह महाराष्ट्र में इस परियोजना की पहली और पूरे 508 किमी कॉरिडोर की दूसरी सबसे बड़ी पहाड़ी सुरंग है।
परियोजना की वित्तीय स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। इस प्रोजेक्ट की शुरुआती अनुमानित लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। लागत दोगुनी होने के पीछे मुख्य कारण देरी, महंगाई और डिजाइन में किए गए बदलाव बताए जा रहे हैं।
स्थानीय और पर्यावरणीय प्रभाव: परियोजना को कई स्तरों पर आलोचना का सामना करना पड़ रहा है:
स्थानीय समस्या: अगस्त 2025 में सुरंग निर्माण के दौरान हुए ब्लास्टिंग की वजह से पालघर के 290 से ज्यादा घरों और इमारतों में दरारें आने की शिकायतें मिली थीं।
पर्यावरणीय क्षति: पर्यावरण समूहों का आरोप है कि इस परियोजना के कारण महाराष्ट्र में 13 हेक्टेयर से ज्यादा मैंग्रोव नष्ट हो गए हैं, जिससे ठाणे क्रीक जैसे संवेदनशील इकोसिस्टम पर बुरा असर पड़ा है और तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
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