नमस्कार दोस्तों, मैं हूं पल्लव जैन और आप सुन रहे हैं ग्राउंड रिपोर्ट का डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट “पर्यावरण आज”। यहां हम बात करेंगे दिन की महत्वपूर्ण पर्यावर्णीय खबरों पर।
शुरुवात करते हैं प्रमुख हैडलाईन्स के साथ..
मुख्य सुर्खियां
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस बार भारत में मॉनसून में केवल 90 फीसदी बारिश होने का अनुमान है,यह पिछले एक दशक का सबसे सूखा मॉनसून होगा, जिससे भारत में कृषि और जल संकट खड़ा हो सकता है।
नैशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 6 के मुताबिक भारत में एडलट्स में मोटापे और डायबटीज़ की समस्या तेज़ी से बढ़ी है। देश में ओवरवेट महिलाओं की संख्या 30 फीसदी है तो वहीं 24 फीसदी पुरुषों का वज़न अधिक पाया गया है।
क्रिटीकली एंडेंजर्ड वाईट बेलीड हेरॉन के महत्वपूर्ण हैबिटैट में 1200 मेगावॉट के कलाई 2 हायड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को पर्यावरण मंत्रालय की एडवाईज़री कमीटी ने क्लीयरेंस दे दी है। लोहित नदी पर यह बांध बनेगा, इसमें 869 हेक्टेयर जंगल पानी में डूब जाएगा। पेड़ों के नुकसान की भरपाई मध्य प्रदेश में पौधे लगाकर की जाएगी।
कोलकाता में भारी बारिश और तूफान की वजह से 7 लोगों की मौत हो गई है और बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्टर को नुकसान हुआ है। सभी मृतकों के परिवारों के लिए सरकार ने 4 लाख का मुआवज़ा घोषित किया है।
रेयर टाईप इबोला वायरस के 906 मामले अब तक दर्ज हुए हैं जिसमें से 223 संक्रमित मरीज़ों की मौत हुई है। वर्लड हेल्थ ऑर्गेनाईज़ेशन चीफ तेद्रोस अधनम इबोला के प्रसार के रोकथाम की तैयारियों को देखने कॉंगो पहुंचे हैं।
खराब मौसम और हीटवेव्स की वजह से उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र में आम की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसके साथ ही ईरान वॉर और जापान द्वारा भारतीय आम के इंपोर्ट पर बैन ने मैंगो एक्सपोर्टर्स को प्रभावित किया है।
तो यह ती आज की प्रमुख हेडलाईन्स आईये कुछ खबरों पर विस्तार से चर्चा करते हैं।
विस्तृत चर्चा
भारतीय मौसम विभाग ने इस वर्ष 92 फीसदी मॉनसून बारिश का अनुमान लगाया था जिसे अब घटाकर 90 फीसदी कर दिया है। यह पिछले एक दशका का सबसे कमज़ोर मॉनसून माना जा रहा है, ऐसे में भारत पर इसका क्या असर होगा आईये समझते हैं हमारे रिपोर्टर वाहिद भट से। वाहिद ग्राउंड रिपोर्ट में मौसम संबंधी खबरों पर नज़र रखते हैं।
भारत में इस साल होगा सबसे सूखा मानसून
इस पॉडकास्ट में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी किए गए मानसून के नए पूर्वानुमान, मानसून में हो रही देरी के कारणों और देश की कृषि पर इसके संभावित प्रभावों पर विस्तृत चर्चा की गई है।
यहाँ इस चर्चा का पूरा विवरण दिया गया है:
मानसून का नया पूर्वानुमान (Forecast): आईएमडी ने अपने पहले के पूर्वानुमान (जो 92% था) को घटा दिया है और अब अनुमान लगाया है कि इस साल साउथ-वेस्ट मानसून की बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का सिर्फ 90% ही रह सकती है। अगर यह पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो देश को पिछले 10 सालों के सबसे सूखे मानसून का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश सामान्य रह सकती है, लेकिन मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य से काफी कम रहने का अनुमान है।
केरल में मानसून की देरी के मुख्य कारण: मानसून की रफ्तार केरल के पास आकर धीमी पड़ गई है और इसके आधिकारिक आगमन में देरी हो रही है। विशेषज्ञों ने इस देरी के कई कारण बताए हैं:
- समुद्री तापमान में बदलाव: प्रशांत महासागर में तापमान बढ़ने (जिससे मानसूनी हवाएं और बारिश का पैटर्न डिस्टर्ब होता है) और हिंद महासागर की मौजूदा स्थितियों को मानसून के लिए सपोर्टिव नहीं माना जा रहा है।
- मौसम प्रणाली का स्थिर न होना: केरल तट के पास मानसूनी बारिश के लिए जरूरी पश्चिमी हवाएं (Western winds) और ठंडे सिस्टम अभी तक पूरी तरह से विकसित और स्थिर नहीं हुए हैं।
- नमी का खिंचाव: एक ट्रोपो सिस्टम अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से मानसून की नमी को अपनी तरफ खींच रहा है, जिससे केरल के ऊपर बारिश की गतिविधियाँ कमजोर पड़ रही हैं।
- लक्षद्वीप के पास चक्रवात: लक्षद्वीप के पास बन रहा चक्रवाती सिस्टम बारिश को समुद्र के ऊपर ही रोके हुए है और इसे केरल के जमीनी इलाकों तक नहीं पहुंचने दे रहा है।
- वेस्टर्न डिस्टरबेंस: उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) ने तापमान और मानसून के पैटर्न को प्रभावित किया है, जिससे मानसून की मूवमेंट स्लो हुई है।
कृषि, गर्मी और अर्थव्यवस्था पर असर: मानसून की धीमी गति के कारण उत्तर और मध्य भारत में हीटवेव (लू) का प्रकोप जारी है और तापमान लगातार 45°C से ऊपर बना हुआ है। देश की लगभग आधी खेती सीधे तौर पर बारिश पर निर्भर करती है, इसलिए कृषि क्षेत्र और किसानों की नजरें मानसून पर ही टिकी हुई हैं।
राहत की बात: विशेषज्ञों का मानना है कि देश के पास वर्तमान में ‘फूड ग्रेन’ (अनाज) का स्टॉक काफी अच्छे स्तर पर है। इसका मतलब यह है कि अगर बारिश कम भी होती है, तो भी देश में तुरंत कोई बड़ा खाद्य संकट (Food Security Crisis) नहीं आएगा। हालांकि, अगर बारिश लंबे समय तक सामान्य से कम रहती है, तो इसका सीधा असर भविष्य की खेती, ग्राउंड वाटर (भूजल) के स्तर और खाद्य पदार्थों की कीमतों पर जरूर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल देश भर की नजरें केरल तट और मानसून के आगे बढ़ने की गति पर बनी हुई हैं
आज के पॉडकास्ट में बस इतना ही। उम्मीद है आपको यह ऐपीसोड पसंद आया होगा। अगर आप पर्यावरण विषय में रुची रखते हैं तो ग्राउंड रिपोर्ट डॉट इन विजिट करना न भूलें। हमारी कोशिश है कि हम पर्यावरणीय विषयों को ज़मीनी स्तर पर कवर करें, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण विषय है और हमारी आपकी सांसे पर्यावरण की बेहतरी पर टिकी हुई हैं।
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