अगली फ़रवरी तक रहेगा ‘बेहद मजबूत’ एल नीनो, लद्दाख में अब स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदें, बिहार की सौर ऊर्जा क्षेत्र में 1.38 लाख करोड़ रु निवेश की तैयारी, खजुराहो में पिछले 24 घंटों में 7 इंच बारिश। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि एक ‘बेहद मजबूत’ एल नीनो का प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। इसके कारण दुनिया भर में तापमान और बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव हो सकते हैं। इस स्थिति से वैश्विक स्तर पर सूखे और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।
अमेरिका ने भारत को चेतावनी दी है कि यदि वह ईरान के साथ कोई व्यापारिक समझौता करता है, तो उसे कड़े प्रतिबंधों के लिए तैयार रहना चाहिए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने में करता है। इस पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका पहले अपने टैरिफ दरों की घोषणा करे, तभी व्यापारिक समझौते पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के सभी सात जिलों में अब स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदें (LAHDCs) स्थापित की जाएंगी। उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने इस ऐतिहासिक फैसले की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है। इस कदम से स्थानीय स्वशासन मजबूत होगा और विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी।
ऊर्जा संकट से जूझ रहा बिहार अगले पांच वर्षों में सौर ऊर्जा क्षेत्र में 1.38 लाख करोड़ रुपये के निवेश की तैयारी कर रहा है। राज्य का लक्ष्य साल 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 6 गीगावाट-घंटा ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करना है।
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र में सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण भारी बारिश हुई है। खजुराहो में पिछले 24 घंटों में 7 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि भोपाल में हल्की बूंदाबांदी हुई। इस दौरान पन्ना जिले में तेज बहाव में बहने से दो लोगों की मौत हो गई और एक बच्चा लापता है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने शाहपुरा तालाब को जनता की संपत्ति घोषित किया है। ट्रिब्यूनल ने तालाब के 50 मीटर के बफर ज़ोन के दायरे में आने वाले सभी अवैध कब्जों को हटाने का आदेश दिया है। इन कब्जों में मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) का दफ्तर, एपको, एक निजी अस्पताल और दो कॉलोनियां शामिल हैं। प्रशासन को हर 15 दिन में इस कार्रवाई की रिपोर्ट ट्रिब्यूनल को सौंपनी होगी।
विस्तृत चर्चा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़ (GLOF) के प्रति सतर्क रहने को कहा है। गृह सचिव गोविंद मोहन ने इस संबंध में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई। इस बारे में और जानिए पल्लव जैन से।
भारत की GLOF के लिए तैयारी
नेपाल के रसुवा में आई बाढ़ के बाद भारत में ग्लेशियल झीलों के फटने से संभावित त्रासदी पर तैयारियां की जा रही हैं। गृह मंत्रालय ने हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ग्लेशियल झील के फटने से आने वाली बाढ़ (GLOFs) और हिमस्खलन से निपटने की तैयारी बढ़ाने को कहा है। साथ ही घटना हो जाने के बाद एकशन लेने की बजाय, बचाव और रोकथाम के लिए कम्यूनिटी बेस्ड तैयारियों पर ध्यान देने को कहा है।
गृह मंत्रालय की बैठक में क्या हुआ?
गृह मंत्रायल में हुई इस बैठक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (UT) से इस तरह के खतरों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बात पर ज़ोर दिया गया कि खतरों को कम करने के उपायों को ज़िले और स्थानीय स्तर पर ठोस कामों में बदला जाए।
गृह सचिव ने सलाह दी गई कि राज्य तैयारी की योजनाओं की नियमित समीक्षा करें, शुरुआती चेतावनी और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने (इवैक्यूएशन) की व्यवस्था में कमियों की पहचान करें और किसी भी बड़ी घटना से पहले ज़रूरी सुधार करें।
कैसे सुधार होंगे?
प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने, संवेदनशील हिमनदी झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों की निगरानी, उच्च जोखिम वाले स्थानों की पहचान, हिम प्रवाह पथ मानचित्रण, समय पर अलर्ट का प्रसार, निकासी की तैयारी और प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इस बैठक में संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के अधिकारियों, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और डिफेंस जियो-इन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टेब्लिशमेंट के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
2024 के प्रोजेक्ट्स पर काम होगा
2024 में केंद्र सरकार ने GLOF (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) से बचाव के प्रोजेक्ट्स तैयार किये थे जिन पर अब तेजी से काम होगा। हम जानते हैं कि ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से हिमायलयी क्षेत्रों में बर्फ पिघलने से ग्लेशियल झीलो का निर्माण हो रहा है जो नेपाल जैसी त्रासदी लेकर आ सकती है। भारत में भी हालांकि हम इस तरह की त्रासदियां देख चुके हैं चाहे तीस्ता नदी में आई बाढ़ हो या केदारनाथ की बाढ़।
भारत में ग्लेशियल झीलों से बचाव का प्लान 2024 में बना था जिसमें तकनीक से इन झीलों की मॉनिटरिंग, मार्किंग का काम शुरु हुआ था। अब उम्मीद है कि इस पर और अधिक गंभीरता से काम होगा।
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