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मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है।

नमस्कार दोस्तों, मैं हूं पल्लव जैन और आप सुन रहे हैं ग्राउंड रिपोर्ट का डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट “पर्यावरण आज”। यहां हम बात करेंगे दिन की महत्वपूर्ण पर्यावर्णीय खबरों पर। शुरुवात करते हैं ...

नमस्कार दोस्तों, मैं हूं पल्लव जैन और आप सुन रहे हैं ग्राउंड रिपोर्ट का डेली मॉर्निंग पॉडकास्ट “पर्यावरण आज”। यहां हम बात करेंगे दिन की महत्वपूर्ण पर्यावर्णीय खबरों पर। शुरुवात करते हैं प्रमुख हैडलाईन्स के साथ….

पर्यावरण आज में सुनिये, कांगो में इबोला महामारी से अब तक 11 हजार मौतों का दावा। दिल्ली में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में छह गुना से ज्यादा बढ़ोतरी। दिल्ली के कबूतर मार्केट से 863 पक्षियों और जानवरों को बचाया गया, जिनमें 431 संरक्षित प्रजातियां शामिल हैं। मध्य प्रदेश में नकली पनीर पर रोक लगाने की तैयारी। पेंच टाइगर रिजर्व में अवैध मछली कारोबार पर एनटीसीए ने एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी। और आज की चर्चा में मध्य प्रदेश के बालाघाट में 7 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत के मामले पर बात करेंगे, जिनकी मौत की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है।

पर्यावरण हेडलाईन्स

कॉंगो में जारी इबोला महामारी में 28000 मामलों पर 11000 मौतें हो चुकी हैं,यह इतिहास में अब तक की सबसे घातक बीमारी बन चुकी है,यह बात वर्लड हेल्थ ऑर्गेनाईज़ेशन प्रमुख टेड्रोस अधानॉम ने बुधवार को कही है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति जारी रही तो वर्ष 2014 से 2016 के बीच वेस्ट अफ्रीका में हुए इबोला आउटब्रेक का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली महामारी का भी रिकॉर्ड टूट जाएगा।

इस साल दिल्ली में इन्फ्लूएंजा H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हुई है। नेशनल सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल (NCDC) के आंकड़ों के मुताबिक, 12 अगस्त तक 1,449 मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल इसी दौरान दर्ज किए गए 229 मामलों से छह गुना से भी ज़्यादा हैं।

H1N1 वायरस, जिसे आम तौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से जाना जाता है, इन्फ्लूएंजा वायरस का ही एक प्रकार है। यह नाक, गले और फेफड़ों में वायरल इन्फेक्शन का कारण बनता है।


दिल्ली के कबूतर मार्केट से 863 पक्षियों और जानवरों को बचाया गया, इसमें 431 संरक्षित या शेड्यूल की गई प्रजातियाँ शामिल थीं। पुलिस के मुताबिक बचाए गए संरक्षित पक्षियों में 183 रिंग-नेक्ड पैराकीट, 72 प्लम-हेडेड पैराकीट, 63 एलेक्जेंड्रिन पैराकीट और 113 मुनिया पक्षी शामिल थे। यह रेड सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट पुलिस ने ‘पीपल फॉर एनिमल्स’ (PFA), ‘वर्ल्ड वाइड एनिमल’ और वन एवं वन्यजीव विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर की थी।

इस मामले में जांचकर्ता अवैध वन्यजीव व्यापार से जुड़े संभावित सप्लायर, ट्रांसपोर्टर, डिस्ट्रीब्यूटर और अन्य प्रतिष्ठानों की पहचान करने और पूरी सप्लाई चेन का पता लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राज्य में एनालॉग पनीर (या नकली पनीर) पर रोक लगाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार सस्ते नॉन-डेयरी विकल्पों को बढ़ावा नहीं देगी, बल्कि दूध उत्पादन बढ़ाने की अपनी कोशिश के तहत प्राकृतिक दूध से बने उत्पादों को बढ़ावा देगी।

एनालॉग पनीर को आम पनीर जैसा बनाया जाता है, लेकिन इसमें आम डेयरी पनीर में पाए जाने वाले मिल्क फैट और प्रोटीन के बजाय नॉन-मिल्क इंग्रीडिएंट्स, जैसे वेजिटेबल फैट, स्टार्च और दूसरी चीज़ें इस्तेमाल की जा सकती हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया ने इस साल 22 अप्रैल को, फूड सर्विस देने वाली कंपनियों को अपने चीज़ एनालॉग्स पर सही लेबल लगाने के लिए एक पब्लिक नोटिस जारी किया था।


पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र (तोतलाडोह बांध) में चल रहे अवैध मछली कारोबार पर नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने मप्र सरकार से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने पेंच नदी पर महाराष्ट्र की सीमा में बने तोतलादोह डैम से मछली पकड़ने की सभी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद मप्र की सीमा से प्रवेश कर संगठित मछली माफिया पिछले कई सालों से बेखौफ होकर मछलियों का शिकार कर रहे हैं।

तो यह थी आज की प्रमुख हेडलाईन्स अब समय है आज की चर्चा का।


आज की चर्चा – चंद्र प्रताप ग्राउंड रिपोर्ट

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आई है।

मध्य प्रदेश के बालाघाट में 7 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत हो गई है। यह मौतें किस बीमारी से हुई क्या कारण रहे इसका अभी तक प्रशासन पता नहीं लगा सका है। क्या है पूरा मामला समझते हैं हमारे रिपोर्टर चंद्र प्रताप तिवारी से।

िरसा इलाके के बैगा बहुल आदिवासी गांवों में बच्चे एक अज्ञात बीमारी की चपेट में हैं। अब तक आठ बच्चों की मौत की पुष्टि की गई है। सबसे हाल में तीन साल की प्रियंका धुर्वे की मौत हुई। उसे 9 अगस्त को बालाघाट जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 11 अगस्त की रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रभावित इलाके में अडोरी और मछुरदा पंचायत के गांव शामिल हैं।

बीमार बच्चों में कई तरह के लक्षण देखे गए हैं। इनमें तेज बुखार, निमोनिया, खून की कमी, शरीर में पानी की कमी और किडनी प्रभावित होने जैसे लक्षण शामिल हैं। कुछ बच्चों में खुजली और मलेरिया जैसे लक्षण भी सामने आए हैं।

लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि आखिर बीमारी की वजह क्या है।

जबलपुर मेडिकल कॉलेज और स्थानीय डॉक्टरों की टीम प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुकी है। बीमारी का कारण पता लगाने के लिए बच्चों के नमूने पुणे की लैब भेजे गए हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग को जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

इस बीच बच्चों की मौत को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मामले की राज्य स्तर पर जांच कराने की मांग की है। उन्होंने लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग भी की है। दिग्विजय सिंह ने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल के बड़े अस्पतालों में इलाज कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इन बच्चों के इलाज का पूरा खर्च सरकार को उठाना चाहिए।

उन्होंने मृत बच्चों के परिवारों को मुख्यमंत्री सहायता कोष से दस-दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग भी की है। दिग्विजय सिंह ने प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ भेजने और मेडिकल कैंप लगाने की मांग की है।

उन्होंने दूषित पानी और संक्रमण की आशंका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, बीमारी का कारण दूषित पानी है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीमारी की असली वजह क्या है और इसकी जांच रिपोर्ट कब सामने आएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में हैं और पुणे की लैब रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। बालाघाट के इन आदिवासी इलाकों में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और समय पर इलाज की उपलब्धता, दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

धन्यवाद चंद्रप्रताप


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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

We believe climate change should be the basis of current discourse, and our stories attempt to reflect the same.

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