मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भूजल रिचार्ज के काम अब NGT की निगरानी में होंगे। कितने वैज्ञानिक और प्रभावी हैं भूजल रिचार्ज के प्रयास और NGT ने क्यों उठाया यह कदम? जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय खबर “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
फ्रांस और स्पेन में भीषण गर्मी के बीच जंगलों में लगी आग से हजारों लोगों को घर छोड़ना पड़ा। स्पेन ने पहली बार जंगल की आग को लेकर राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया है। फ्रांस में करीब 63 हजार लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया, वहीं मैड्रिड के पास की आग को इलाके के इतिहास की सबसे भयानक आग बताया जा रहा है।
असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है, पिछले 24 घंटे में ही 14 लोगों की जान गई। तीन लाख से ज्यादा लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे पड़ोसी राज्य नागालैंड में बादल फटने का असर बताया और कहा कि मरने वालों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।
अहमदाबाद में 24 घंटे में 294 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो शहर के इतिहास की चौथी सबसे ज्यादा बारिश है और साल 2000 के बाद सबसे ज्यादा है। भारी बारिश से शहर में जगह-जगह जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी। इससे शहर की सामान्य जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई।
लगातार छह दिन खराब मौसम के चलते बंद रही अमरनाथ यात्रा शनिवार से फिर शुरू हो गई। जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से छह हजार से ज्यादा श्रद्धालु बालटाल के लिए रवाना हुए। भूस्खलन से बंद जम्मू-श्रीनगर हाईवे भी अब आवाजाही के लिए खुल गया है, और अब तक करीब चार लाख श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भूजल रिचार्ज के काम अब सिर्फ कागजों पर पूरे नहीं होंगे। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकारों से पूछा है कि रिचार्ज के लिए जगह किस वैज्ञानिक आधार पर चुनी गई और उससे भूजल स्तर में कितना सुधार हुआ। ट्रिब्यूनल ने सरकारों को शपथपत्र देने और तीन हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा है।
पन्ना जिले के पहाड़ीखेरा गांव में एक खेत से आठ दुर्लभ गिद्धों और एक सियार का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। शुरुआती अंदाजा है कि जहरीला मांस खाने से गिद्धों की मौत हुई। सैंपल जांच के लिए सागर और जबलपुर की लैब भेजे गए हैं और वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने मोहाली की कंपनी रेहान हेल्थकेयर का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। जांच में फैक्ट्री बेहद गंदी हालत में मिली, जहां सफाई का स्कोर सिर्फ 12 प्रतिशत था और कीड़े-मकोड़े व फफूंद तक पाई गई। कंपनी को तुरंत उत्पादन बंद करने और कमियां सुधारने का आदेश दिया गया है।
विस्तृत चर्चा
भूजल रिचार्ज कितना कारगर? NGT ने तीन राज्यों से मांगा वैज्ञानिक आकलन
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भूजल रिचार्ज के नाम पर किए जा रहे काम अब सवालों के घेरे में हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT ने राज्य सरकारों से पूछा है कि भूजल रिचार्ज के लिए स्थानों का चयन किस वैज्ञानिक आधार पर किया गया और इन संरचनाओं का भूजल स्तर पर वास्तविक असर कितना पड़ा है।
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण यानी CGWA की 24 सितंबर 2020 की अधिसूचना के अनुपालन को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने संबंधित सरकारों से इस संबंध में शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।
ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि केवल रिचार्ज संरचनाओं का निर्माण कर देना पर्याप्त नहीं है। सरकारों को यह भी बताना होगा कि इन संरचनाओं के बनने के बाद संबंधित क्षेत्रों में भूजल स्तर में कितना सुधार हुआ और उनके प्रभाव का आकलन किस आधार पर किया गया।
शुक्रवार को हुई सुनवाई में NGT ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह शपथपत्र के जरिए बताए कि भूजल रिचार्ज के लिए स्थलों का चयन करते समय किन वैज्ञानिक मानकों और सावधानियों का पालन किया गया। इसके साथ ही जिन स्थानों पर रिचार्ज के काम हुए हैं, वहां भूजल स्तर में आए बदलाव का साइटवार मूल्यांकन भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
मामले में केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने अपना जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों समेत अन्य पक्षों को भी निर्धारित अवधि में अपना जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
चंद्रप्रताप, यहां एक महत्वपूर्ण संदर्भ यह भी है कि ग्राउंड रिपोर्ट भूजल दोहन और रिचार्ज व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को पहले भी रिपोर्ट करता रहा है। हमारी रिपोर्टिंग में सामने आया था कि कई इलाकों में जमीन से जिस रफ्तार से पानी निकाला जा रहा है, उस अनुपात में उसका पुनर्भरण नहीं हो पा रहा है।
इसका एक उदाहरण मध्य प्रदेश का राजगढ़ जिला है, जहां पांच वर्षों में भूजल दोहन का स्तर 84 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि भूजल की भरपाई के लिए बनाई जा रही रिचार्ज संरचनाएं वास्तव में कितनी प्रभावी हैं। अब NGT ने भी इसी सवाल को केंद्र में रखा है—संरचनाएं कितनी बनाई गईं, इससे आगे बढ़कर यह बताना होगा कि उनसे जमीन के नीचे पानी वास्तव में कितना बढ़ा।
इस सवाल की तस्वीर संबंधित सरकारों और प्राधिकरणों की रिपोर्ट सामने आने के बाद और स्पष्ट होगी।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
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