केन-बेतवा लिंक परियोजना और मध्य प्रदेश की अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के विस्थापन, पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े मुद्दों को लेकर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने 18वें दिन अपना अनशन स्थगित कर दिया। उन्होंने अपनी मां और आंदोलन में शामिल आदिवासी महिलाओं के हाथों नारियल पानी पीकर अनशन स्थगित किया।
अनशन स्थगित करने के बाद जारी एक वीडियो संदेश में भटनागर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त नहीं किया है। उन्होंने कहा, “मैंने अपना आमरण अनशन समाप्त नहीं, बल्कि स्थगित किया है।”
भटनागर के मुताबिक, प्रशासन की ओर से सकारात्मक पहल किए जाने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उन्होंने दावा किया कि छतरपुर जिले में परियोजनाओं से प्रभावित ऐसे लोगों की पहचान के लिए गांवों में टीमें भेजी जा रही हैं, जिनके नाम पहले सर्वे या प्रभावितों की सूची में छूट गए थे। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में जय किसान संगठन का एक प्रतिनिधि भी शामिल रहेगा।
भटनागर ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर, वकील प्रशांत भूषण, सौम्या दत्ता, नीलम अहलूवालिया, कैलाश मीणा और अभिनेत्री पूजा भट्ट समेत कई लोगों ने उनसे अनशन स्थगित करने की अपील की थी। उनके मुताबिक, देशभर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान नेताओं, राजनीतिक प्रतिनिधियों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों सहित करीब 400 लोगों ने उनसे अनशन समाप्त या स्थगित करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि छतरपुर और पन्ना जिले की महिलाओं द्वारा आंदोलन के समर्थन में किए जा रहे ‘चूल्हा बंद’ का भी उनके फैसले पर असर पड़ा। भटनागर के मुताबिक, कई महिलाएं खुद भी खाना नहीं खा रही थीं, जिससे उन पर अनशन स्थगित करने का नैतिक दबाव बना।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अनशन स्थगित होने के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। भटनागर ने कहा, “यह एक लंबी लड़ाई है। पर्यावरण, आदिवासियों के न्याय और अधिकार और विस्थापन कानून को लेकर हम अपनी मांगें लगातार उठाते रहेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य ठीक होने के बाद वह दोबारा प्रभावित इलाकों में जाकर लोगों से मिलेंगे। वीडियो संदेश जारी करने के समय वह डॉक्टरों की निगरानी में थे।
भटनागर ने कहा कि प्रशासन की ओर से सार्थक पहल होने पर आंदोलनकारी उसके साथ सहयोग करेंगे, लेकिन जहां उन्हें अन्याय या गलत कार्रवाई दिखाई देगी, वहां वे विरोध और संघर्ष जारी रखेंगे।
यह आंदोलन 3 जुलाई को छतरपुर जिले के कूपी गांव में बराना नदी पर निर्माणाधीन पुल के नीचे शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारी केन-बेतवा लिंक परियोजना और दूसरी सिंचाई परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही परियोजना प्रभावित लोगों को कानून के तहत मिलने वाले अधिकार सुनिश्चित करने की मांग भी की जा रही थी।
प्रदर्शनकारियों ने पुनर्वास पैकेज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। भटनागर ने दावा किया था कि 19 जुलाई को जिस दिन प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल खाली कराया, उस दिन वह मीडिया के सामने करीब 400 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज पेश करने वाले थे।
19 जुलाई को पुलिस ने मानसून के दौरान बराना नदी का जलस्तर बढ़ने का हवाला देते हुए प्रदर्शन स्थल खाली कराया था। इसके बाद भटनागर को पहले बिजावर सिविल अस्पताल और फिर छतरपुर जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। उस समय भी उन्होंने कहा था कि उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
आंदोलन में शामिल जय किसान संगठन ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान भटनागर के परिवार के सदस्यों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साथी प्रदर्शनकारियों को उनसे मिलने नहीं दिया गया। संगठन ने यह भी दावा किया था कि आंदोलन के समर्थन में कई गांवों की महिलाओं ने ‘चूल्हा बंद’ आंदोलन शुरू किया था।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ज्यादातर शिकायतें पड़ोसी पन्ना जिले के गांवों से जुड़ी हैं, जबकि आंदोलन छतरपुर जिले में किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अगर छतरपुर जिले से संबंधित कोई शिकायत या प्रभावित लोगों की सूची प्रशासन को दी जाती है तो उसकी जांच कर जरूरी कार्रवाई की जाएगी।
44,605 करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना है, जिसे नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत लागू किया जा रहा है। परियोजना का लक्ष्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में लगभग 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा देना, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और जलविद्युत उत्पादन करना है।
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