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एमपी में नल जल योजना में हुआ जमकर भ्रष्टाचार

पर्यावरण आज | प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलेगा। भोपाल के भोजवेटलैंड में भारी सीवेज गिर रहा है। रातापानी टाइगर रिज़र्व में जंगल काटकर रिसॉर्ट बने। केन-बेतवा कार्यकर्ता का अनशन खत्म हुआ। अडानी ...

पर्यावरण आज | प्रीमियम पेट्रोल में एथेनॉल नहीं मिलेगा। भोपाल के भोजवेटलैंड में भारी सीवेज गिर रहा है। रातापानी टाइगर रिज़र्व में जंगल काटकर रिसॉर्ट बने। केन-बेतवा कार्यकर्ता का अनशन खत्म हुआ। अडानी बीना-निग्री में न्यूक्लियर प्लांट की योजना बना रहा है। चंबल में तस्करी की आशंका पर अलर्ट। चिली-यूरोप में मौसमी आपदाएं। मुख्य चर्चा: जल जीवन मिशन में 27 हज़ार करोड़ खर्च फिर भी 34 लाख घर बिना नल कनेक्शन, कैग रिपोर्ट में ठेकेदारों को गलत भुगतान उजागर।

आज की प्रमुख हेडलाईन्स

भोपाल में अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट भोजवेटलैंड के छोटे तालाब में हर दिन 80 लाख से लेकर 1 करोड़ लीटर तक सीवेज मिल रहा है। इस तालाब में शहर के 28 नालों का सीवेज सीधे मिलाया जा रहा है। इसी गंदगी के बीच एथलीट वॉटर स्पोर्ट्स का अभ्यास करने को मजबूर हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में इस मामले पर सुनवाई चल रही है।


मध्य प्रदेश में रातापानी टाइगर रिज़र्व के इको सेंसिटिव ज़ोन में 100 एकड़ जंगल काटकर वहां रिसॉर्ट और होटल बना दिए गए हैं, साथ ही 400 एकड़ ज़मीन को समतल कर वहां खेती करने का मामला सामने आया है। यह मामला रातापानी से सटे यारनगर क्षेत्र से सामने आया है।


केन बेतवा की लड़ाई लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। अपर कलेक्टर विनय द्विवेदी ने जिला अस्पताल पहुंचकर अमित भटनागर को नारियल पानी पिलाकर उनका अनशन खत्म करवाया। सरकार ने मुआवज़ा न मिलने वाले ग्रामीणों की लिस्ट का पुनः सत्यापन कराने का आश्वासन दिया है, जिसके बाद भटनागर ने अनशन खत्म करने का ऐलान किया।


अडानी पावर मध्य प्रदेश के बीना और निग्री में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगाने की संभावनाएं तलाश रहा है। इन दोनों साइट्स पर अभी थर्मल पावर प्लांट संचालित हैं, जिन्हें अडानी ग्रुप ने जय प्रकाश एसोसिएट्स को एक्वायर कर हासिल किया है। हालांकि अभी सरकार ने प्राइवेट कंपनियों की भागीदारी के लिए स्पष्ट नियम अधिसूचित नहीं किए हैं।


मॉनसून सीज़न में चंबल नदी से घड़ियाल और कछुओं के बच्चों की तस्करी की आशंका को लेकर वन विभाग ने हाई अलर्ट जारी किया है। विभाग ने नदी के संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। मध्य प्रदेश से घड़ियाल और कछुओं के बच्चों की तस्करी कर यूपी और पश्चिम बंगाल में बेचने के मामले में संगठित गिरोह के सक्रिय होने के इनपुट्स मिले हैं।


दक्षिण अमेरिकी देश चिली में भारी बर्फबारी, बारिश, तूफान और ऊंची समुद्री लहरों ने जनजीवन अस्तव्यस्त कर दिया है। प्राकृतिक आपदा के कारण देश के 16 राज्यों में से 10 में हालात गंभीर बने हुए हैं, 13 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से ज्यादा लोग लापता हैं, और हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। वहीं यूरोप में भीषण गर्मी से कई हिस्सों में नदियां सूख चुकी हैं, हीटवेव से अब तक 10 हज़ार अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार यह आंकड़ा 25 हज़ार तक पहुंच सकता है।


आज की चर्चा

कैग रिपोर्ट में नल जल योजना में गड़बड़ी का खुलासा

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत मार्च 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को 100% नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, विधानसभा में पेश कैग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 5 साल में 27 हज़ार करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद 34 लाख घरों तक नल से जल नहीं पहुंच पाया।

चर्चा: अब्दुल वसीम अंसारी

Jal Jeevan Mission data doesn't match with ground reality in Bundelkhand
हैंडपंप से पानी भरती महिलाएं, छतरपुर,मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन को लेकर कैग की ऑडिट रिपोर्ट में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं।

सरकार ने मार्च 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में नल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा था। लेकिन 5 साल में 27 हज़ार करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद 34 लाख घरों तक पानी नहीं पहुंच पाया। दिसंबर 2024 तक कुल 1 करोड़ 11 लाख ग्रामीण परिवारों में से सिर्फ 77 लाख (करीब 61%) परिवारों को ही नल कनेक्शन मिल पाया, जबकि 13.5 लाख परिवारों के पास योजना शुरू होने से पहले ही कनेक्शन मौजूद थे।

मार्च 2025 तक पूरे देश में औसतन 80% घरों तक पानी पहुंच चुका था, लेकिन मध्य प्रदेश सिर्फ 61% पर ही अटका रहा।

सितंबर 2024 तक 147 प्रोजेक्ट्स में से केवल 39 ही पूरे हो सके। 30 ठेकों में 136 से लेकर 1262 दिन तक की देरी हुई।

इसके बावजूद कई ठेकेदारों को नियम तोड़कर पैसा दिया गया —

  • विदिशा की हिनोतिया परियोजना में ठेकेदार को 12.86 करोड़ रुपए का अनियमित भुगतान हुआ
  • मोहनपुरा प्रोजेक्ट में 11.73 करोड़ रुपए का काम हिसाब में ही नहीं जोड़ा गया, जिससे ठेकेदार को फायदा मिला
  • पायली प्रोजेक्ट में नियम बदलकर ठेकेदार को 15.93 करोड़ रुपए का अतिरिक्त लाभ दिया गया

2023-24 में केंद्र और राज्य सरकार के आंकड़ों में 8 लाख परिवारों का फर्क पाया गया। हर घर तक पानी पहुंचा या नहीं, इसका सर्वे तक नहीं कराया गया और न ही इसके लिए कोई एजेंसी तय हुई।

8 जिलों के 4,570 गांवों में जनभागीदारी से 241.74 करोड़ रुपए जुटाने थे, लेकिन सिर्फ 27 लाख रुपए ही जुट पाए। नियम तोड़कर लागत बांटने से केंद्र सरकार पर 89.52 करोड़ और राज्य सरकार पर 87.18 करोड़ रुपए यानी कुल 176.7 करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ा।

कुल मिलाकर रिपोर्ट बताती है कि योजना में पैसा तो खूब खर्च हुआ, लेकिन काम समय पर पूरा नहीं हुआ और कई जगह गड़बड़ी भी हुई।


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We do deep on-ground reports on environmental, and related issues from the margins of India, with a particular focus on Madhya Pradesh, to inspire relevant interventions and solutions. 

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