पॉडकास्ट “पर्यावरण आज”: ट्रंप ने अगस्त 2026 से जेनरिक दवाओं पर टैरिफ लगाया, जिससे भारत के फार्मा निर्यात को नुकसान होगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने मर्क की गार्डासिल वैक्सीन को बिना ट्रायल शामिल करने पर सरकार को फटकारा। गुजरात में बाढ़ से सड़कें बंद, हज़ारों लोग विस्थापित। मध्य प्रदेश में केन-बेतवा परियोजना पुनर्वास शिकायतें, मनरेगा में 100 दिन रोज़गार पूरा नहीं हुआ, मातृ-शिशु मृत्यु दर में सुधार पर अब भी राष्ट्रीय औसत से खराब। आज की चर्चा असम में भीषण बाढ़ से 27 लोगों की मौत।
आज की हेडलाईन्स
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को अमेरिका में बिकने वाली जेनरिक दवाओं पर भारी टैरिफ का ऐलान किया जो 1 अगस्त 2026 से लागू होगा। पहले वर्ष कोई टैरिफ नहीं है, तीसरे साल 100 फीसदी और चौथे साल यह 200 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप चाहते हैं कि कंपनियां तय समय में अमेरिका में प्लांट लगाकर उत्पादन शुरू करें। इस फैसले से भारत के फार्मा सेक्टर को नुकसान होगा क्योंकि भारतीय जेनरिक दवाओं के कुल निर्यात में 38 फीसदी हिस्सा अमेरिका का है।
केंद्र सरकार ने अमेरिकी फार्मा कंपनी मर्क की गार्डासिल वैक्सीन को भारत के एचपीवी वैक्सीनेशन प्रोग्राम में शामिल करने का फैसला किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर सरकार को फटकार लगाई है, क्योंकि मर्क पर अमेरिका में कई मुकदमे चल रहे थे जिनमें आरोप लगाया गया था कि गार्डासिल (Gardasil) के कारण युवा महिलाओं में गंभीर ऑटोइम्यून बीमारियां हुईं। ऐसे में भारत में बिना ट्रायल इस वैक्सीन के इस्तेमाल के फैसले ने कई सुरक्षा संबंधी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वलसाड, सूरत और नवसारी में बाढ़ की वजह से 500 से ज़्यादा पंचायत सड़कें बंद कर दी गई हैं और तीनों ज़िलों में 1,600 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। सूरत की खाड़ियों के किनारे निचले इलाकों में NDRF और SDRF की दो और टीमें तैनात की गई हैं।
मौसम विभाग के अनुसार 28 जुलाई तक देश में बारिश का दौर जारी रहेगा, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के ऊपर 5 मौसमी सिस्टम एक्टिव हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि 44,605 करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण विस्थापित परिवारों के पुनर्वास से जुड़ी शिकायतों की जांच की जाएगी। विधानसभा में तीखी बहस के दौरान विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने मुआवज़े, पुनर्वास सर्वे और ग्राम सभा की कार्यवाही में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप लगाया था।
सिंघार के सवालों का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि पुनर्वास पैकेज के तहत लगभग सभी प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा दिया गया है और उन्होंने किसी भी घोटाले से इनकार किया। हालांकि, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन को भरोसा दिलाया कि सरकार के सामने लाई गई किसी भी शिकायत की जांच की जाएगी और उन्होंने एक महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी करने का वादा किया है।
मध्य प्रदेश में मनरेगा (वीबी जीरामजी) की 100 दिन रोजगार की गारंटी पूरी नहीं हो सकी। कैग की रिपोर्ट के अनुसार 2019 से 2024 के बीच एक करोड़ से अधिक पंजीकृत श्रमिकों में से सिर्फ 2 फीसदी को ही 100 दिन का रोज़गार मिला है। 30 से 47 प्रतिशत श्रमिकों को चार दिन तक भी काम नहीं मिल पाया।
मध्य प्रदेश में पिछले 5 वर्षों में मातृ और शिशु मृत्यु दर में सुधार हुआ है। मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख जीवित जन्म पर 173 से घटकर 135 और शिशु मृत्यु दर प्रति एक हज़ार जीवित जन्म पर 52 से घटकर 35 हो गई है। इसके बावजूद दोनों ही मामलों में खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में मध्य प्रदेश देश में सबसे अव्वल है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों सूचकांक राष्ट्रीय औसत से खराब हैं।
आज की चर्चा
ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट ज़िलों में अभूतपूर्व बाढ़ आई है। बाढ़ हर दिन इलाके के नए हिस्सों में फैल रही है और अब तक 27 लोगों की जान ले चुकी है। सोमवार को 24 घंटे के भीतर 21 लोगों की मौत हो गई।
चर्चा: चंद्रप्रताप तिवारी, ग्राउंड रिपोर्ट
असम में बाढ़ ने हज़ारों परिवारों की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी है। कई गांवों में लोगों को अपना घर छोड़कर ऊंचे इलाकों और राहत शिविरों में जाना पड़ा। शिवसागर जिले के कई गांव पूरी तरह पानी में डूब गए, जहां लोगों का कहना है कि उनके घर, खेत, मवेशी और सालों की जमा पूंजी बाढ़ में बह गई। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बाढ़ से 5.6 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 31 लोगों की मौत हो चुकी है। कई इलाकों में लोगों को नावों के सहारे निकाला गया, जबकि हज़ारों लोग अब भी राहत शिविरों में रह रहे हैं। लगातार बारिश और नदियों के उफान से सड़क और रेल संपर्क भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जिन परिवारों ने किसी तरह जान बचाई है, उनके सामने अब सबसे बड़ी चुनौती रोज़मर्रा की ज़रूरतें पूरी करने, खेती दोबारा शुरू करने और अपने घरों को फिर से बसाने की है। रिपोर्ट में प्रभावित लोगों ने बताया कि उनके पूरे गांव पानी में डूब गए और अब उन्हें यह भी नहीं पता कि वे अपने घर कब लौट पाएंगे।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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