आज के एपिसोड में सुनिए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 20वें दिन का हाल, भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का शुभारंभ, मौसम विभाग का साप्ताहिक पूर्वानुमान, अल नीनो से प्रभावित 111 संवेदनशील ज़िलों की रिपोर्ट, मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जल सुरंग, और दिल्ली-NCR में प्रस्तावित इलेक्ट्रिक ट्रक लॉजिस्टिक्स हब की पूरी जानकारी। साथ ही आज की खास चर्चा में जानिए हाइड्रोजन ट्रेन से जुड़ी हर बात, विस्तार से।
आज की प्रमुख हेडलाईन्स
1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि उनकी सेहत गंभीर स्थिति में पहुँच गई है और अगर अनशन जारी रहा तो उनकी हालत और बिगड़ सकती है।
वांगचुक विरोध जारी रखने पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि सरकार से कोई प्रतिक्रिया मिले बिना अनशन खत्म करने से गलत संदेश जाएगा। इसके बजाय, उन्होंने समर्थकों से 20 जुलाई को होने वाले CJP के प्रस्तावित संसद मार्च को और मज़बूत करने की अपील की।
2. आज हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे। नॉर्दर्न रेलवे के जींद और सोनीपत सेक्शन के बीच 10-कोच वाली ट्रेन के लॉन्च के साथ, भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जिन्होंने क्लीन टेक्नोलॉजी को अपनाया है।
हाइड्रोजन ट्रेन में गैस लीक, गर्मी और धुएं का पता लगाने के लिए सुरक्षा सिस्टम लगे हैं, साथ ही, इसमें एक ऑटोमैटिक शट-ऑफ सिस्टम भी है जो किसी भी असामान्य स्थिति का पता चलने पर, बिना किसी मानवीय प्रतिक्रिया का इंतज़ार किए, हाइड्रोजन की सप्लाई बंद कर देगा।
3. मौसम विभाग ने गुरुवार को कहा कि जुलाई के बाकी दिनों में देश के ज़्यादातर हिस्सों में मौसम सूखा रहेगा, सिवाय पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों के, जहाँ बारिश होती रहेगी।
IMD ने अपनी साप्ताहिक भविष्यवाणी में कहा, “कुल मिलाकर, 16-22 जुलाई के दौरान पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्सों में बारिश सामान्य या सामान्य से ज़्यादा होने की संभावना है, जबकि देश के बाकी हिस्सों में यह सामान्य से कम रहेगी। 22-29 जुलाई के दौरान मध्य भारत में सामान्य बारिश होने की संभावना है।”
4. अल नीनो के प्रभाव से इस वर्ष कम वर्षा की संभावना को देखते हुए सरकार ने देश में 111 ज़िलों की पहचान की है जो खेती-किसानी और पानी की उपलब्धता के लिहाज़ से संवेदनशील श्रेणी में आते हैं। डाउन टू अर्थ के विश्लेषण में पता चला है कि इन 111 ज़िलों में से 69 ज़िलों में पहले ही कम बारिश दर्ज की जा रही है। इन ज़िलों में कई किसान लगभग पूरी तरह से मॉनसून पर निर्भर हैं और वहाँ सिंचाई की सुविधा बहुत कम है। नतीजतन, उनके लिए खरीफ़ की बुवाई का मौसम मुश्किल होता जा रहा है।
5. मध्य प्रदेश के कटनी ज़िले के स्लीमनाबाद में बन रही 11.95 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी जल सुरंग (वाटर टनल) लगभग पूरी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार दोपहर नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के अधिकारियों के साथ परियोजना का निरीक्षण करेंगे।
टनल के शुरू होने के बाद बरगी बांध का पानी पहली बार कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना ज़िलों तक पहुंचेगा। परियोजना से करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलने का दावा है। वहीं प्रारंभिक चरण में लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सीधे लाभ मिलने की संभावना है।
6. सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने पर डीज़ल ट्रकों को दिल्ली के बॉर्डर पर रोक दिया जाता है। नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के आसपास पाँच मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब का एक नेटवर्क बनाने का प्रस्ताव है जो कार्गो ट्रकों को अपनी यात्रा जारी रखने की इजाज़त दे सकता है।
ये हब दिल्ली के बाहर फ्रेट इंटरचेंज पॉइंट के तौर पर काम करेंगे, जहाँ पड़ोसी राज्यों से लंबी दूरी के डीज़ल ट्रक अपने ट्रेलर या कार्गो को राजधानी में आखिरी पड़ाव के लिए इलेक्ट्रिक ट्रकों में ट्रांसफर करेंगे।
केंद्र की ‘नेशनल हाईवेज़ फ़ॉर EV’ (NHEV) योजना के तहत — जो एक PPP पहल है — इन्हें सोनीपत, फ़रीदाबाद, ग़ाज़ियाबाद, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में बनाने की योजना है।
भारत की पहली हायड्रोजन ट्रेन बनने की कहानी
रिपोर्ट- चंद्र प्रताप तिवारी

आज की मुख्य चर्चा में बात हुई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच नॉर्दर्न रेलवे के सेक्शन पर चलेगी। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने जींद के एकलव्य स्टेडियम में करीब 14,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया।
यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिज़ाइन और तैयार की गई है, जो देश की बढ़ती रेलवे इंजीनियरिंग क्षमता को दिखाती है। इस लॉन्च के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जहाँ हाइड्रोजन ट्रेनें चलती हैं। खास बात यह है कि जहाँ बाकी देश आमतौर पर दो या तीन कोच वाली हाइड्रोजन ट्रेनें चलाते हैं, वहीं भारत ने 10 कोच वाली ट्रेन बनाई है, जो लगभग 2,600 यात्रियों को ले जा सकती है। यह दुनिया की सबसे ज़्यादा क्षमता वाली हाइड्रोजन ट्रेन है।
इस ट्रेन में 3,200 हॉर्सपावर का प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जो इसे सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाता है। यह हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर चलती है, जिसमें हाइड्रोजन को बिजली में बदला जाता है और इस प्रक्रिया में सिर्फ जलवाष्प निकलती है, यानी संचालन के दौरान कार्बन उत्सर्जन शून्य रहता है। पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह इसे ओवरहेड बिजली लाइनों की ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि बिजली ट्रेन के अंदर ही बनती है।
सुरक्षा के लिहाज़ से ट्रेन में गैस लीक, गर्मी, आग और धुएं का पता लगाने वाले कई सुरक्षा सिस्टम लगाए गए हैं। जींद में एक हाइड्रोजन सुविधा केंद्र भी बनाया गया है ताकि सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन हो सके। यह परियोजना स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन की दिशा में भारत का एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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