टाईगर रिजर्व के लिए सरकार का नया प्लान, दिल्ली में डॉक्टरों की हड़ताल, दिल्ली वायु प्रदूषण के लिए 8 हज़ार करोड़ की परियोजना, मध्य प्रदेश में गेहूं खरीद में घोटाला। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
भारत सरकार ने देश के उन टाइगर रिजर्व को फिर से सक्रिय करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है जहाँ बाघों की संख्या बहुत कम या शून्य है। इस योजना के तहत शिकार की उपलब्धता और बाघों के रहने योग्य वातावरण को सुधारने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि घनी आबादी वाले क्षेत्रों से बाघों को इन सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा सके।
दिल्ली स्टेट हेल्थ मिशन के तहत काम करने वाले सैकड़ों डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने नौकरी की सुरक्षा और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर हड़ताल की। उनका कहना है कि लंबे समय से अनुबंध पर काम करने के बावजूद उन्हें उचित वेतन वृद्धि और अन्य लाभ नहीं मिल रहे हैं।
दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए विश्व बैंक के सहयोग से 8,300 करोड़ रुपये की सात साल की कार्ययोजना बनाई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले धुएं, सड़क की धूल और निर्माण कार्यों से निकलने वाले कचरे को नियंत्रित करना है।
हिमाचल प्रदेश में भारी मानसून बारिश और भूस्खलन के कारण पिछले 24 घंटों में तीन लोगों की मौत हो गई है और 49 सड़कें बंद कर दी गई हैं। किन्नौर जिले में नेशनल हाईवे-5 पर भारी मलबे के कारण यातायात घंटों बाधित रहा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अपने करीब 3370 नियमित कर्मचारियों और इंजीनियरों के घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का निर्णय लिया है। इस योजना से बिजली के खर्च में कमी आएगी और उत्पादित अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भी भेजा जा सकेगा।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पल्लव जैन से जानिए गुजरात के किसानों की अडानी पॉवर लाइंस पर जीत के बारे में। वहीं हमारे रिपोर्टर अब्दुल वसीम अंसारी बता रहा रहे हैं मध्य प्रदेश के एक और एमएसपी घोटाले और उस पर हुई कार्रवाई के बारे में।
बेहतर मुआवजे की मांग पर किसानों की जीत
गुजरात के मोर्बी के जेतपार गांव के किसान पिछले तीन हफ्तों से अडानी एनर्जी सॉल्यूशन के पावर ट्रांस्मिशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे थे। इन किसानों की ज़मीन इस प्रोजेक्ट के लिए ली जानी है, लेकिन जो मुआवज़ा दिया जा रहा था वह काफी कम था। तीन हफ्तों के आमरण अनशन के बाद आखिरकार गुजरात सरकार ने किसानों की मांगों को मान लिया। लेकिन ज़मीन के जिस रेट पर सरकार राज़ी हुई है वो अभी भी किसानों की मांग से कम है।
क्या है मामला?
दरअसल जेतपार के किसान कच्छ के खावड़ा में KPS-2 पूलिंग स्टेशन से-मोरबी के हलवद में एक नए स्विचिंग स्टेशन तक हाईटेंशन लाइन बिछाने का विरोध कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को अडानी एनर्जी की हलवद ट्रांस्मिशन लिमिटेड कंपनी अंजाम दे रही है जो देश की सबसे बड़ी प्राईवेट सेक्टर की पावर ट्रांस्मिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी है।
गुजरात के कच्छ और मोरबी के लगभग 400 गांवों में बिजली ट्रांसमिशन का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
किसानों की मांगें
किसानों ने दावा किया कि उनकी ज़मीन पर ट्रांसमिशन टावर और हाई-टेंशन बिजली के तार लगने से ज़मीन की कीमत बहुत कम हो जाएगी। इसके लिए उन्होंने छह मांगें रखीं: ज़मीन की बाज़ार कीमत तय करने के लिए एक ‘मार्केट रेट कमेटी’ (MRC) बनाना;
टावर वाले इलाके के लिए एमआरसी द्वारा तय बाज़ार कीमत का 400% मुआवज़ा;
ग्रामीण, नगरपालिका और नगर निगम इलाकों में बिजली लाइनों के आस-पास सुरक्षित ‘राइट ऑफ़ वे’ (RoW) इलाके के लिए अलग-अलग मुआवज़ा स्लैब; और मुआवज़े का पूरा भुगतान पहले ही कर देना।
गुजरात के कृषि मंत्री और सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघाणी ने शुक्रवार को कहा कि दूसरे राज्यों की नीतियों का अध्ययन करने के बाद सरकार ने मुआवज़ा बढ़ाने का फ़ैसला किया है, ताकि राज्य के लाखों किसानों को उनकी ज़मीन के लिए उचित और बाज़ार-आधारित मुआवज़ा मिल सके।
न्यूज़ चैनलों से ग़ायब आपकी खबर
किसानों को अपनी मांगे मनवाने के लिए आमरण अनशन यहां करना पड़ा, कई किसानों ने 10 दिनों से कुछ खाया पिया नहीं था, कई की तबीयत इस दौरान खराब हो गई थी।
आखिरकार सरकार किसानों के आगे झुकी है। लेकिन सबसे ज्यादा अचरज की बात यह है कि किसानों का यह विरोध प्रदर्शन न्यूज़ चैनलों पर नदीं दिखाया गया।
एमएसपी घोटाले पर कार्रवाई
मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल खरीदी में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रशासन द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई की गई है।
राजगढ़ जिला: जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बाद, यहां आठ कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
भिंड जिला: यहां नौ अधिकारियों और कर्मचारियों को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है।
कुल कार्रवाई: अब तक तीन जिलों में कुल 64 लोगों के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इन कार्रवाइयों में बर्खास्तगी, निलंबन, विभागीय जांच और अन्य अनुशासनात्मक कदम शामिल हैं।
अनियमितताओं की प्रकृति
प्रारंभिक जांच में फसल खरीदी प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर मुद्दे सामने आए हैं:
रिकॉर्ड में गड़बड़ी: समर्थन मूल्य पर खरीदी के दौरान आधिकारिक रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ के आरोप हैं।
नियमों का उल्लंघन: प्रशासनिक नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई है。
वित्तीय कदाचार: अधिकारी उन मामलों की जांच कर रहे हैं जहां वित्तीय अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग के पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे, ताकि नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सके।
सरकार का रुख और भविष्य की संभावना
राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसानों के हितों से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संबंधित विभागों को एमएसपी खरीदी व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वर्तमान में जांच अभी भी जारी है और दस्तावेजों तथा खरीदी रिकॉर्ड की विस्तृत समीक्षा की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है और और भी बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। इस सख्त कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में काफी हलचल देखी जा रही है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
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