दिल्ली में प्रदूषण की पहले से तैयारी, रिन्युबल एनर्जी कैपेसिटी में अडानी का रिकॉर्ड, घाना और आइवरी कोस्ट में बाढ़ से 24 की मौत, स्वच्छ-हरित विद्यालय रेटिंग में मप्र का नाम चमका। जानिए आज की प्रमुख पर्यावरणीय और कृषि खबरें “पर्यावरण आज” पॉडकास्ट के साथ।
मुख्य सुर्खियां
दिल्ली सरकार ने सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए 1 नवंबर से 28 फरवरी तक कड़े प्रतिबंध लागू किए हैं, जिसके तहत बाहरी राज्यों के गैर-BS VI वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध और सरकारी व निजी कार्यालयों में 50% शारीरिक उपस्थिति जैसे नियम भी अनिवार्य किए गए हैं।
अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने 20 गीगावाट (GW) की ऑपरेशनल रिन्युबल एनर्जी कैपेसिटी को पार कर लिया है और यह मुकाम हासिल करने वाली भारत की पहली कंपनी बन गई है। यह क्षमता सालाना 52 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पन्न करती है, जो न्यूयॉर्क शहर जैसे बड़े महानगर को एक साल तक बिजली देने के लिए पर्याप्त है।
घाना और आइवरी कोस्ट में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण कम से कम 24 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें से 12-12 मौतें दोनों देशों में दर्ज की गई हैं। बाढ़ के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं और बचाव दल फंसे हुए लोगों को निकालने के कार्य में जुटे हैं।
भारत सरकार की ‘स्वच्छ-हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26’ में मध्य प्रदेश के 10 स्कूलों का चयन हुआ है, जिसमें रतलाम का सांदीपनि विद्यालय पहले और भोपाल का कमला नेहरू सांदीपनि विद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे स्थान पर रहा। इन स्कूलों को एक-एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि और मेरिट प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा।
दैनिक भास्कर की एक खबर के अनुसार पिछले पांच वर्षों में बाजरा और उड़द जैसी फसलों की उत्पादन लागत में 53% तक की भारी वृद्धि हुई है, जबकि उनके सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में केवल 34% का इजाफा हुआ है। लागत और भाव के बीच का यह असंतुलन किसानों की आर्थिक स्थिति के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
विस्तृत चर्चा
आज की चर्चा में हमारे एडिटर इन चीफ पल्लव जैन से जानिए वीबी जी राम जी से जुड़ा विवाद और असोसिएट एडिटर वाहिद भट बताएंगे हिमाचल में मानसून पहुंचने के बाद कैसे हैं हालात?
नई ग्रामीण रोज़गार योजना और विवाद
‘विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन – ग्रामीण’ (VB G RAM G) ने 1 जुलाई 2026 से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह ले ली है। इस नई योजना के तहत रोजगार की गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इसके उद्देश्यों में जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आपदा न्यूनीकरण और जलवायु अनुकूलन जैसे कार्यों को केंद्र में रखा गया है।
मजदूरी दरों में संशोधन और विरोध
अब रंग बदलकर आई इस योजना से उम्मीद थी की जब यह लागू होगी तो मज़दूरों की अमदनी बढ़ेगी। शायद मोदी सरकार ने मज़दूरों के हित के बारे में कुछ सोचकर योजना में बदलाव किये होंगे। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि प्रतिदिन की मज़दूरी में बढ़ोतरी 1 रुपए से लेकर 60 रुपए तक की गई है। कई राज्यो में तो यह मिनिमम वेज से भी कम है। ऐसे में यह योजना ग्रामीण रोज़गार गारंटी से जुड़ी चिंताओं को संबोधित करती नहीं दिखती।
तो केंद्र सरकार ने 30 जून को श्रमिकों के लिए संशोधित मजदूरी दरों की घोषणा की। संशोधित दरों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच काफी अंतर देखा गया। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मजदूरी में 6 रुपये की बढ़ोतरी हुई, जबकि दादरा और नगर हवेली में पिछली MGNREGA मजदूरी दर की तुलना में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।
तेलंगाना के लिए मजदूरी दर 307 रुपये से बढ़ाकर 308 रुपये कर दी गई है, यानी सिर्फ 1 रुपए की बढ़ोतरी। महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में 5-5 रुपये की बढ़ोतरी हुई है; महाराष्ट्र में मजदूरी 312 रुपये से बढ़कर 317 रुपये और आंध्र प्रदेश में 307 रुपये से बढ़कर 312 रुपये हो गई है।
सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी सिक्किम में हुई, जहां मजदूरी दर 61 रुपये बढ़कर 450 रुपये हो गई।
बढ़ोत्तरी अपर्याप्त है
हालांकि श्रमिक संगठनों का कहना है कि यह बढ़ोतरी अपर्याप्त है और चेतावनी दी कि कई राज्यों में VB-GRAMG के तहत मिलने वाली मजदूरी अभी भी न्यूनतम मजदूरी के बराबर नहीं है। ऐसे में वे लोग वीबी जी राम को वापस लेने के लिए प्रोटेस्ट करते रहेंगे।
वीबी जी राम में जो अच्छी बाते हैं वो यह हैं कि यह 100 की जगह 125 दिनों के काम का वादा करता है। वहीं नया प्रोग्राम ग्रामीण कामकाज की योजना बनाने में जल सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचे, आजीविका से जुड़ी संपत्तियों, डि़ज़ास्टर मिटिगेशन और क्लाईमेट रेसीलियेंस जैसे उ्ददेश्यों को केंद्र में रखता है।
लेकिन मजदूरी में न के बराबर बढ़ोतरी ने सबको निराश कर दिया है।
फंडिंग स्ट्रक्चर और राज्यों की चिंताएं
तमिलनाडु के नव निर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि योजना का मौजूदा फंडिंग स्ट्रक्चर राज्य पर 5,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा का अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालेगा। उन्होंने फंडिंग पैटर्न और कामकाज से जुड़े दिशा-निर्देशों पर फिर से विचार करने को कहा है। उन्होंने तर्क दिया कि योजना के कई प्रावधान ग्रामीण रोज़गार और राज्य के वेलफोयर प्रोग्रामस पर बुरा असर डाल सकते हैं।
सीएम ने नए फंडिंग स्ट्रक्चर पर सवाल उठाए हैं। पहले 100 फीसदी मज़दूरी का भुगतान केंद्र सरकार करती थी अभी 60:40 का नया स्ट्रक्चर है जो राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ायेगा।
दूसरा विजय ने खेती के मुख्य मौसमों की घोषणा करने में ज़्यादा लचीलापन लाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्लाईमेट चेंज के हालात को देखते हुए, रोज़गार के कामों के लिए पहले से तय 60 दिन की रोक की मौजूदा व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है।
हम अपने श्रोताओं को बता दें कि नई योजना में प्रावधान है कि खेती के सीज़न के ऐसे समय में जब खेतों में मज़दूरों की सबसे ज़रूरत होती है, में योजना पर रोक लगा दी जाएगी ताकी मज़दूर गांवों में ही रहें और किसानों को मज़दूरों की कमी न हो।
हिमाचल प्रदेश में मानसून से भारी तबाही
मानसून की लगातार बारिश ने हिमाचल प्रदेश में जनजीवन को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जहां अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। कांगड़ा जिले में बिजली गिरने और भूस्खलन की घटनाओं में तीन लोगों की जान गई है, जबकि मंडी और अन्य जिलों में भी मौतें दर्ज की गई हैं। राज्य में कम से कम 35 सड़कें बंद हैं, जिनमें कुल्लू जिला सबसे अधिक प्रभावित है। इसके अतिरिक्त, बिजली का बुनियादी ढांचा भी क्षतिग्रस्त हुआ है, जिसमें अकेले कुल्लू में 80 से अधिक ट्रांसफार्मर खराब हो गए हैं।
अन्य राज्यों की स्थिति
मुंबई और महाराष्ट्र: मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में भारी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन गई है। मौसम विभाग ने यहां ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है और शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है।
दिल्ली और उत्तर भारत: दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में मानसून के अगले दो-तीन दिनों में पहुंचने की उम्मीद है। यहां 40 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
दक्षिण और उत्तर-पूर्व भारत: कर्नाटक के मंगलुरु में भूस्खलन से एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत हो गई है। अरुणाचल प्रदेश में भी भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ के कारण चार लोगों की मौत हुई है और कई लोग लापता हैं।
जहां एक ओर पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में बारिश भीषण गर्मी से राहत लेकर आई है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के कारण लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
ग्राउंड रिपोर्ट की बात
पर्यावरण सिर्फ खबर नहीं, यह हमारी सांसों का सवाल है। ग्राउंड रिपोर्ट की कोशिश है कि इन मुद्दों को ज़मीनी स्तर पर उठाया जाए और चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाया जाए। अगर आप पर्यावरण पत्रकारिता को ज़रूरी मानते हैं, तो इस एपिसोड को शेयर करें और हमें अपना फीडबैक भेजें।
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